महाकालेश्वर मंदिर में खास परंपरा; बाबा महाकाल का गर्मी से बचाव, 29 जून तक '11 पवित्र नदियों' का जलाभिषेक

Shri Mahakaleshwar Jyotirlinga Ujjain: उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में गर्मी से राहत के लिए शिवलिंग पर 11 पवित्र नदियों के नाम वाले कलश बांधे गए, तीन माह चलेगा जलाभिषेक. पढ़िए पूरी खबर.

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श्री महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन में शिवलिंग पर 11 कलश से जलाभिषेक

Mahakal Mandir Ujjain: मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गर्मी के मौसम को देखते हुए बाबा महाकाल को शीतलता प्रदान करने की प्राचीन परंपरा की शुरुआत हो गई है. इसके तहत बुधवार को मंदिर में शिवलिंग के ऊपर 11 कलश बांधे गए. मिट्टी से निर्मित ये कलश देश की 11 पवित्र नदियों के नाम पर स्थापित किए गए हैं. इन कलशों से गिरने वाली जलधाराओं के माध्यम से आगामी तीन महीनों तक बाबा महाकाल का नियमित जलाभिषेक किया जाएगा, जिससे उन्हें गर्मी से राहत मिलेगी. यह परंपरा हर वर्ष गर्मी में निभाई जाती है.

Mahakal Mandir Ujjain: बाबा महाकाल का जलाभिषेक

प्राचीन मान्यता से जुड़ी है परंपरा

मंदिर प्रशासन के अनुसार, मान्यता है कि जैसे आम इंसान को गर्मी का असर होता है, वैसे ही भगवान को भी ग्रीष्म ऋतु में शीतलता की आवश्यकता होती है. इसी मान्यता के तहत शिवलिंग पर 11 कलश, जिन्हें 'गलंतियां' भी कहा जाता है, बांधी जाती हैं. इन कलशों से लगातार जल की बूंदें शिवलिंग पर गिरती रहती हैं.

29 जून तक बहेगी जलधारा

मंदिर के आशीष पुजारी ने बताया कि 3 अप्रैल वैशाख कृष्ण प्रतिपदा से लेकर 29 जून ज्येष्ठ पूर्णिमा तक, इन कलशों से बाबा महाकाल पर लगातार जलधारा बहती रहेगी. भगवान के मस्तक पर रखी गई 11 मटकियों से रक्षा सूत्र के माध्यम से जल की बूंदें गिरती हैं, जो शिवलिंग को शीतलता प्रदान करती हैं.

भक्तों की आस्था और मनोकामनाओं से जुड़ाव

मंदिर के पुजारी ने बताया कि इस जलाभिषेक से न केवल भगवान को गर्मी से राहत मिलती है, बल्कि भक्तों की मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं. श्रद्धालु इसे अत्यंत शुभ मानते हैं और बड़ी संख्या में दर्शन के लिए मंदिर पहुंचते हैं.

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11 नदियों के नाम पर स्थापित किए गए कलश

मंदिर की प्राचीन परंपरा के अनुसार इन कलशों पर देश की प्रमुख 11 नदियों के नाम अंकित किए गए हैं. इनमें गंगा, सिंधु, सरस्वती, यमुना, गोदावरी, नर्मदा, कावेरी, शरयु, शिप्रा और गंडकी शामिल हैं. इन नदियों का स्मरण, आव्हान और ध्यान मंत्रों के साथ जल स्थापित कर बाबा महाकाल पर निरंतर शीतल जलधारा अर्पित की जाती है.

भस्मारती से सायंकालीन पूजन तक रहेगा अनुष्ठान

यह विशेष जलाभिषेक प्रतिदिन सुबह भस्मारती से शुरू होकर सायंकालीन पूजन तक जारी रहेगा. गर्मी के इन महीनों में यह परंपरा मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और सशक्त बनाती है.

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