MP के सागर में पूर्व विधायक के बेटे पर करोड़ों की जमीन में हेरफेर के आरोप, 4.49 करोड़ की वसूली की तैयारी

Land Scam Stamp Duty Ghotala: सागर में पूर्व विधायक के पुत्र पर व्यावसायिक जमीन को कृषि बताकर रजिस्ट्री कराने का आरोप. 4.49 करोड़ की वसूली और नीलामी की तैयारी. पढ़िए पूरी खबर.

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सागर जमीन घोटाला

Land Scam Stamp Duty Ghotala: मध्यप्रदेश के सागर जिले से सामने आया एक भू‑अनियमितता का मामला प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खासा चर्चित हो गया है. यह मामला बीना विधानसभा क्षेत्र से जुड़े भाजपा के पूर्व विधायक महेश राय के पुत्र अमित राय से संबंधित है, जिन पर करोड़ों रुपए मूल्य की व्यावसायिक भूमि को कृषि भूमि दर्शाकर कम कीमत पर रजिस्ट्री कराने का आरोप है. जांच में सामने आया है कि इस कथित हेरफेर से शासन को स्टांप ड्यूटी और अन्य राजस्व मदों में भारी नुकसान हुआ. समय पर बकाया राशि जमा न करने के बाद अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए नीलामी की प्रक्रिया शुरू करने के संकेत दिए हैं. इस प्रकरण ने एक बार फिर जमीन पंजीयन व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

कहां और कैसे उभरा मामला?

यह मामला सागर जिले के बीना शहर के एक अत्यंत व्यस्त और व्यावसायिक क्षेत्र से जुड़ा है. आरोप है कि अमित राय ने यहां की जमीन को कृषि भूमि दर्शाकर पंजीयन कराया, जबकि वास्तविकता में यह क्षेत्र पहले से ही पूरी तरह व्यावसायिक गतिविधियों से घिरा हुआ था. स्थानीय जानकारों के अनुसार, जिस भूमि को कृषि बताया गया, वहां पहले ही बाजार और दुकानें अस्तित्व में थीं.

विधायक रहते हुए दर्ज हुआ पंजीयन

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, कथित अनियमितता उस समय की है जब महेश राय विधायक पद पर थे. इसी दौरान अमित राय के नाम पर जमीन का पंजीयन हुआ. जमीन का स्वरूप गलत दर्शाए जाने के कारण उसका मूल्यांकन बहुत कम दरों पर किया गया, जिससे शासन को स्टांप शुल्क सहित अन्य राजस्व मदों में करोड़ों रुपए की हानि हुई.

Land Scam: स्टांप ड्यूटी घोटाला

सब रजिस्ट्रार को हुआ संदेह

मामले का खुलासा तब हुआ जब पंजीयन प्रक्रिया के दौरान सब रजिस्ट्रार को जमीन के स्वरूप को लेकर संदेह हुआ. दस्तावेजों में दर्ज विवरण और जमीन की वास्तविक स्थिति में विरोधाभास नजर आने पर उन्होंने उच्च अधिकारियों को अवगत कराया.

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जांच टीम के निरीक्षण में चौंकाने वाला खुलासा

इसके बाद गठित जांच टीम ने जब मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया तो पाया कि वहां कृषि भूमि का कोई चिन्ह नहीं था. पूरे क्षेत्र में पक्की दुकानों के साथ व्यावसायिक बाजार संचालित हो रहा था. इस निरीक्षण रिपोर्ट ने दस्तावेजों में की गई प्रविष्टियों की सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए.

जिला पंजीयक ने जारी किया नोटिस

जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला पंजीयक कार्यालय ने अमित राय को नोटिस जारी किया. नोटिस में कहा गया कि भूमि का वास्तविक स्वरूप छिपाकर कराया गया पंजीयन नियमों का उल्लंघन है और इसके चलते शासन को जो राजस्व हानि हुई है, उसकी भरपाई अनिवार्य है. उन्हें निर्धारित समय सीमा में बकाया राशि जमा करने के निर्देश दिए गए.

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समय सीमा खत्म, अब नीलामी की तैयारी

निर्धारित अवधि समाप्त होने के बावजूद जब अमित राय ने राशि जमा नहीं कराई, तो प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए वसूली की अगली कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी. अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकरण में कुल 4 करोड़ 49 लाख 29 हजार 795 रुपए बकाया हैं. यदि निर्धारित प्रक्रिया के तहत यह राशि जमा नहीं होती, तो संबंधित संपत्ति की नीलामी की जा सकती है.

राजनीतिक हलकों में हलचल

मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है. विपक्षी दलों ने इसे सत्ता और प्रभाव के दुरुपयोग का उदाहरण बताते हुए निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है. उनका कहना है कि यदि आम व्यक्ति इस तरह की गलती करता, तो तुरंत कठोर कार्रवाई हो जाती.

प्रशासन का पक्ष

इस मामले पर वरिष्ठ जिला पंजीयक निधि जैन का कहना है कि जांच में साफ तौर पर सामने आया है कि व्यावसायिक भूमि को कृषि भूमि दिखाकर रजिस्ट्री कराई गई. नियमों के तहत नोटिस जारी कर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है और शासन को हुई राजस्व हानि की भरपाई सुनिश्चित की जाएगी.

राजस्व विभाग के नियम क्या कहते हैं

राजस्व मामलों के जानकारों का कहना है कि जानबूझकर भूमि के स्वरूप को गलत दर्शाकर कम स्टांप ड्यूटी देना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है. ऐसे मामलों में न सिर्फ अंतर की राशि वसूली जाती है, बल्कि जुर्माना और अन्य दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान है.

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अमित राय का जवाब

पूर्व विधायक के पुत्र अमित राय ने अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर कहा है कि उन्होंने इस मामले में संभागीय आयुक्त के न्यायालय में अपील दायर की है, जहां वह अपना पक्ष रखेंगे. उनका कहना है कि मामले का निपटारा न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा. फिलहाल, जिला प्रशासन आगे की कार्रवाई में जुटा है और नीलामी की प्रक्रिया किसी भी समय शुरू की जा सकती है. यह प्रकरण सागर जिले ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में जमीन पंजीयन और राजस्व व्यवस्था को लेकर एक अहम उदाहरण बनता जा रहा है.

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