Malnutrition Case: सतना जिले में कुपोषण का एक और गंभीर मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य विभाग और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सुरांगी गांव की घटना के बाद अब नयागांव क्षेत्र में मात्र 5 माह की एक बच्ची गंभीर कुपोषण की हालत में पाई गई है. बच्ची की शारीरिक स्थिति बेहद चिंताजनक बताई जा रही है. संयुक्त स्वास्थ्य टीम द्वारा चिन्हित किए जाने के बाद उसे जिला अस्पताल लाया गया, जहां प्राथमिक इलाज के बाद हालत को देखते हुए उसे मेडिकल कॉलेज रीवा रेफर कर दिया गया. यह मामला ग्रामीण इलाकों में कुपोषण की भयावह तस्वीर को उजागर करता है.
सुबह गांव में पहुंची चिकित्सा टीम, बच्ची को किया चिन्हित
शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे संयुक्त स्वास्थ्य टीम चित्रकूट के नयागांव क्षेत्र में निरीक्षण के लिए पहुंची थी. इसी दौरान टीम को 5 माह की बच्ची मोहनी प्रजापति बेहद खराब हालत में मिली. बच्ची के पिता मुकेश कुमार प्रजापति और माता सावित्री देवी नयागांव क्षेत्र के निवासी हैं. बच्ची की दशा देखकर स्वास्थ्यकर्मी भी चिंतित हो उठे.
Malnutrition Case: नयागांव कुपोषित बच्ची
वजन महज 2.327 किलो, गंभीर कुपोषण की श्रेणी में
चिकित्सकीय जांच में बच्ची का वजन केवल 2 किलो 327 ग्राम पाया गया, जो उसकी उम्र के हिसाब से बेहद कम है. डॉक्टरों के अनुसार यह स्थिति गंभीर कुपोषण (SAM) की श्रेणी में आती है. कुपोषण के कारण बच्ची के हाथ‑पैर बेहद पतले हो चुके हैं, पेट असामान्य रूप से फूला हुआ है और शरीर की हड्डियां साफ दिखाई दे रही हैं.
Malnutrition Case: सतना कुपोषण मामला
जन्मजात विकृति भी आई सामने, एक कान नहीं है विकसित
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि बच्ची के जन्म से ही एक कान विकसित नहीं हुआ है. यह जन्मजात विकृति (Congenital Defect) का मामला माना जा रहा है. परिजनों के अनुसार, बच्ची का जन्म उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के सोनीपुर स्थित जिला अस्पताल में हुआ था. जन्म के बाद से ही बच्ची का स्वास्थ्य सामान्य नहीं था, लेकिन समय पर उचित इलाज और पोषण नहीं मिल पाने से उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई.
आंगनवाड़ी को थी जानकारी, समय पर उपाय नहीं किया
स्थानीय आंगनवाड़ी सहायिका सुषमा को बच्ची की स्थिति की जानकारी होने के बावजूद समय पर प्रभावी हस्तक्षेप नहीं हो सका. इस लापरवाही को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि जब बच्ची की हालत शुरू से ही कमजोर थी, तो उसे पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) या अस्पताल क्यों नहीं भेजा गया.
जिला अस्पताल से रीवा मेडिकल कॉलेज रेफर
संयुक्त स्वास्थ्य टीम ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बच्ची को तत्काल जिला अस्पताल के पीकू (PICU) वार्ड में भर्ती कराया. प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए बच्ची को मेडिकल कॉलेज रीवा रेफर कर दिया. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि बच्ची को सभी आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं और पोषण दिया जा रहा है.
स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है कि इतनी गंभीर स्थिति होने के बावजूद समय पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई. साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि आंगनवाड़ी, आशा कार्यकर्ता और स्थानीय स्वास्थ्य अमले की भूमिका क्या रही.
कुपोषण पर फिर खड़े हुए सवाल
सतना जिले में लगातार सामने आ रहे ऐसे मामले यह साफ करते हैं कि ग्रामीण इलाकों में कुपोषण अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है. सुरांगी के बाद नयागांव की यह घटना सरकारी योजनाओं, पोषण कार्यक्रमों और निगरानी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर करती है. अब देखना होगा कि इस बार प्रशासन क्या ठोस कदम उठाता है, ताकि ऐसी मासूम जिंदगियां कुपोषण का शिकार न हों.
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