NHAI का Bee कॉरिडोर; छत्तीसगढ़ में इन हाइवे के किनारे बनेगा मधुमक्खियों का गलियारा

NHAI Bee Corridor: इस योजना के अंतर्गत राजमार्गों के किनारे विभिन्न प्रजातियों के फूलदार और देशी पेड़-पौधे लगाए जाएंगे, ताकि मधुमक्खियों को पूरे वर्ष पर्याप्त पराग और मधुरस उपलब्ध हो सके. इस बारे में केंद्र सरकार की ओर से आवश्यक निर्देश जारी किए जा चुके हैं छत्तीसगढ़ में इसकी शुरुआत सबसे पहले नेशनल हाईवे-53 पर जाएगी.

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NHAI Bee Corridor: NHAI का Bee कॉरिडोर; छत्तीसगढ़ में इन हाइवे के किनारे बनेगा मधुमक्खियों का गलियारा

NHAI Bee Corridor: राष्ट्रीय राजमार्गों को केवल बेहतर यातायात के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक अहम और सराहनीय कदम उठाया है. इसके तहत अब सड़कों और पुलों के निर्माण के साथ‑साथ मधुमक्खियों और अन्य परागणकारी जीवों के संरक्षण के लिए विशेष ‘बी कॉरिडोर' (मधुमक्खी गलियारे) विकसित किए जाएंगे. अधिकारियों के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे ‘बी कॉरिडोर' विकसित करने की यह अनूठी पहल न सिर्फ सड़कों को हरा‑भरा बनाएगी, बल्कि जैव विविधता, कृषि, पर्यावरण और पारिस्थितिक संतुलन को भी मजबूती देगी. छत्तीसगढ़ से शुरू हो रही यह योजना आने वाले समय में पूरे देश के लिए एक मॉडल पहल साबित हो सकती है.

NHAI Bee Corridor: मधुमक्खी गलियारा

छत्तीसगढ़ में यहां से होगी योजना की शुरुआत

छत्तीसगढ़ में इस नई पहल की शुरुआत सबसे पहले नेशनल हाईवे‑53 के आरंग–सरायपाली मार्ग पर ‘बी कॉरिडोर' से होगी. इसके बाद अगले चरणों में नेशनल हाईवे‑30 (रायपुर–धमतरी) और नेशनल हाईवे‑130 (कटघोरा–पथरापाली) मार्ग पर भी ऐसे कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे. इस संबंध में केंद्र सरकार की ओर से आवश्यक निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं.

क्या है ‘बी कॉरिडोर'?

‘बी कॉरिडोर' दरअसल राजमार्गों के किनारे बनाई जाने वाली फूलों और देशी पौधों की एक लंबी, निरंतर हरित पट्टी होगी. इसमें फूलों वाले पेड़, झाड़ियाँ, जड़ी‑बूटियाँ और घास शामिल रहेंगी. इन पौधों को इस तरह चुना जाएगा कि अलग‑अलग मौसम में अलग‑अलग प्रजातियाँ खिलें, जिससे मधुमक्खियों को पूरे साल पराग और मकरंद (अमृत) मिलता रहे.

सजावटी हरियाली से जैव विविधता की ओर कदम

NHAI का उद्देश्य राजमार्गों के किनारे होने वाले पौधरोपण को केवल सजावटी हरियाली तक सीमित न रखकर, उसे जैव विविधता को सहारा देने वाली वनस्पति में बदलना है. इससे न सिर्फ मधुमक्खियों, बल्कि तितलियों और अन्य परागणकारी जीवों को भी सुरक्षित आवास मिलेगा.

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कौन‑कौन से पेड़ और पौधे लगाए जाएंगे?

‘बी कॉरिडोर' में मुख्य रूप से स्थानीय और देशी प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी. इनमें नीम, करंज, महुआ, पलाश, बॉटल ब्रश, जामुन और सीरिस जैसे पेड़‑पौधे शामिल हैं. इसके अलावा फूलने वाली जंगली घासों को भी पनपने दिया जाएगा. परागणकारी जीवों के लिए उपयोगी सूखी लकड़ी और खोखले तने भी छोड़े जाएंगे, ताकि उन्हें प्राकृतिक निवास मिल सके.

कैसे होगा कॉरिडोर का निर्माण?

NHAI के अनुसार ‘बी कॉरिडोर' का विकास उपयुक्त हाईवे खंडों और NHAI की खाली भूमि पर किया जाएगा. राजमार्गों के किनारे हर 500 मीटर से 1 किलोमीटर की दूरी पर फूलों वाले पेड़ों के समूह लगाए जाएंगे. यह दूरी मधुमक्खियों की भोजन खोजने की औसत क्षमता को ध्यान में रखते हुए तय की गई है.

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2026–27 में बनेंगे कम से कम तीन बी कॉरिडोर

एनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालय वर्ष 2026–27 के दौरान कम से कम तीन ‘बी कॉरिडोर' विकसित करेंगे. इसी अवधि में देशभर में करीब 40 लाख पेड़ लगाने की योजना है. इनमें से लगभग 60 प्रतिशत पेड़ ‘बी कॉरिडोर' पहल के तहत लगाए जाएंगे. छत्तीसगढ़ में इस योजना के अंतर्गत लगभग दो लाख पौधे लगाए जाने का लक्ष्य रखा गया है.

मधुमक्खियों के संरक्षण से खेती को भी फायदा

विशेषज्ञों के अनुसार मधुमक्खियाँ खेती और बागवानी के लिए बेहद जरूरी हैं. परागण की प्रक्रिया में उनकी अहम भूमिका होती है. मधुमक्खियों की संख्या घटने से फसलों की पैदावार और गुणवत्ता पर असर पड़ता है. ‘बी कॉरिडोर' से मधुमक्खियों को सुरक्षित माहौल मिलेगा, जिससे कृषि और बागवानी उत्पादकता को भी लाभ होगा.

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम कदम

NHAI का मानना है कि यह पहल मधुमक्खियों और अन्य परागणकारी जीवों पर बढ़ते पारिस्थितिक दबाव को कम करने में मदद करेगी. साथ ही यह पर्यावरण‑अनुकूल और जिम्मेदार राजमार्ग विकास की दिशा में एक मजबूत उदाहरण बनेगी.

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