NEET पेपर लीक : डॉक्टर बनने का सपना टूटा; कर्ज में डूबे पिता की बेटी आकांक्षा ने फांसी लगाकर दी जान

NEET पेपर लीक से सदमे में मऊगंज की छात्रा आकांक्षा ने आत्महत्या कर ली. कर्ज में डूबे परिवार का डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह गया. पढ़िए दर्द भरी कहानी.

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NEET पेपर लीक ने ली एक और जान: डॉक्टर बनने का सपना अधूरा, छात्रा ने किया सुसाइड

NEET Paper Leak Scandal: मध्य प्रदेश के मऊगंज से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां डॉक्टर बनने का सपना देख रही एक होनहार छात्रा ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी. यह सिर्फ एक आत्महत्या नहीं, बल्कि टूटते सपनों, आर्थिक बोझ और परीक्षा प्रणाली पर उठते सवालों की त्रासदी है. आकांक्षा चतुर्वेदी, जिसने नीट परीक्षा में सफलता का भरोसा जताया था, पेपर लीक की खबर से इतना टूट गई कि उसने जीवन समाप्त कर लिया. परिवार का कहना है कि उसकी मेहनत और उम्मीदें एक झटके में खत्म हो गईं. इस घटना ने न सिर्फ एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और छात्रों की मानसिक स्थिति को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है.

डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह गया

मऊगंज जिले के मगनिया गांव की रहने वाली आकांक्षा चतुर्वेदी का सपना डॉक्टर बनने का था. इसके लिए वह नागपुर में रहकर नीट परीक्षा की तैयारी कर रही थी. परीक्षा देने के बाद वह बेहद खुश थी और उसे पूरा भरोसा था कि इस बार उसका चयन हो जाएगा. लेकिन जैसे ही पेपर लीक की खबर सामने आई, उसकी उम्मीदें बिखर गईं.

पेपर लीक से टूटा मनोबल, डिप्रेशन में गई छात्रा

परिजनों के अनुसार, पेपर लीक की खबर ने आकांक्षा को गहरे सदमे में पहुंचा दिया. उसने धीरे-धीरे खाना-पीना छोड़ दिया और खुद को अलग-थलग कर लिया. मानसिक तनाव बढ़ता गया और अंततः 20 मई 2026 को उसने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.

सुसाइड नोट में झलका दर्द

आकांक्षा ने आत्महत्या से पहले एक भावुक सुसाइड नोट भी छोड़ा, जिसमें उसने अपने माता-पिता से माफी मांगी. नोट में लिखा था कि उसे दोबारा परीक्षा देने की हिम्मत नहीं है और वह अपने माता-पिता के सपनों को पूरा नहीं कर सकी. यह शब्द उसकी मानसिक स्थिति और सिस्टम से टूटे विश्वास को साफ दर्शाते हैं.

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कर्ज में डूबा था परिवार

आकांक्षा के पिता कृष्ण कुमार चौबे एक किसान हैं, जो नागपुर में कुक का काम करके परिवार चलाते थे. बेटी को पढ़ाने के लिए उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) से करीब 3 लाख रुपये का कर्ज लिया और रिश्तेदारों से भी उधार लिया. उन्होंने अपनी जमीन तक गिरवी रख दी थी ताकि बेटी डॉक्टर बन सके, लेकिन यह सपना अधूरा रह गया.

बीमारी और जिम्मेदारियों के बीच संघर्ष

परिवार के मुताबिक, पिता की तबीयत भी ठीक नहीं रहती थी और उन्हें कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा. ऐसे हालात में भी उन्होंने बेटी की पढ़ाई नहीं रुकने दी, लेकिन इस घटना ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है.

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घटना के बाद सियासत गरमाई

इस दुखद घटना के बाद राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गईं. कांग्रेस और छात्र संगठनों के नेता पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे और घटना को परीक्षा प्रणाली की विफलता बताया.

परिवार को आर्थिक सहायता

घटना के बाद कांग्रेस और एनएसयूआई नेताओं ने परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की. नेताओं द्वारा करीब 3.5 लाख रुपये की मदद दी गई, वहीं किसान क्रेडिट कार्ड के कर्ज को चुकाने का आश्वासन भी दिया गया. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने भी फोन पर बात कर परिवार को सहयोग देने की बात कही.

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

आकांक्षा की मौत ने देश में परीक्षा प्रणाली, विशेष रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पेपर लीक जैसी घटनाएं छात्रों के मनोबल को तोड़ देती हैं और कई बार उनके भविष्य को भी अंधकार में धकेल देती हैं.

मानसिक स्वास्थ्य पर जरूरी चर्चा

यह घटना छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की गंभीरता को भी उजागर करती है. विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव में छात्रों को काउंसलिंग और सहयोग की आवश्यकता होती है, ताकि वे ऐसे तनावपूर्ण हालात से बाहर निकल सकें.

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एक परिवार का सपना खत्म, सिस्टम पर सवाल कायम

आकांक्षा चतुर्वेदी की मौत केवल एक छात्रा की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है, बल्कि उस सिस्टम के लिए चेतावनी है, जो लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है. अब जरूरत है कि ऐसी घटनाओं से सबक लेते हुए परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया जाए, ताकि किसी और आकांक्षा का सपना यूं अधूरा न रह जाए.

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