TET पर MP सरकार का बड़ा कदम, सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल; शिक्षकों के साथ अन्याय नहीं : CM मोहन

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TET पर राहत की उम्मीद: MP सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में लगाई पुनर्विचार याचिका

MP TET News: मध्यप्रदेश के लाखों शिक्षकों से जुड़ी शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा और राहत भरा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की है, जिसमें सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा पास करना अनिवार्य किया गया था. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सरकार किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय नहीं होने देगी. इस कदम के बाद शिक्षक संगठनों में उम्मीद जगी है और सरकार के प्रति भरोसा और मजबूत हुआ है. माना जा रहा है कि यह फैसला शिक्षकों के हित में है और सरकार कोर्ट के माध्यम से व्यवहारिक समाधान निकालने का प्रयास कर रही है.

टीईटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट का आदेश

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर 2025 को एक अहम निर्णय देते हुए सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया था. आदेश के अनुसार, ऐसे शिक्षक जिनकी सेवा अवधि 1 सितंबर 2025 को पांच वर्ष से अधिक शेष है और जिन्होंने टीईटी पास नहीं की है, उन्हें परीक्षा में शामिल होना होगा. इसके साथ ही कोर्ट के निर्णय के पैरा-216 में यह भी कहा गया कि जिन शिक्षकों की सेवा में पांच साल से कम समय शेष है, अगर वे भविष्य में पदोन्नति चाहते हैं तो उन्हें भी टीईटी उत्तीर्ण करनी होगी, अन्यथा वे पदोन्नति के पात्र नहीं होंगे.

सरकार ने दाखिल की पुनर्विचार याचिका

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद प्रदेशभर में शिक्षकों के बीच चिंता का माहौल बन गया था. इसे देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर राज्य सरकार ने 17 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की. सरकार का मानना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर अचानक इस तरह की अनिवार्यता थोपना व्यावहारिक नहीं है और इससे कई योग्य शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं. पुनर्विचार याचिका के जरिए सरकार न्यायालय के सामने जमीनी हकीकत और शिक्षकों की कठिनाइयों को रखना चाहती है.

MP TET News: शिक्षक पात्रता परीक्षा मध्यप्रदेश

शिक्षकों के साथ खड़ी है सरकार: सीएम मोहन यादव

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मुद्दे पर संवेदनशील रुख अपनाते हुए कहा कि राज्य सरकार शिक्षकों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने साफ किया कि “किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा.” सीएम ने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ शिक्षक हैं और उनके हितों की रक्षा सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है.

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संगठन मिले मुख्यमंत्री से, मिला आश्वासन

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कई शिक्षक और कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री से उनके निवास पर मुलाकात की थी. संगठनों ने आदेश के बाद उत्पन्न परिस्थितियों और संभावित समस्याओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराया. इस दौरान डॉ. मोहन यादव ने सभी संगठनों को आश्वस्त किया कि सरकार कोर्ट की प्रक्रिया में शिक्षकों का पक्ष मजबूती से रखेगी. उन्होंने कहा कि नियमों के पालन के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण भी जरूरी है.

शिक्षक संगठनों ने जताया भरोसा

राज्य सरकार द्वारा पुनर्विचार याचिका दाखिल किए जाने के बाद शिक्षक संगठनों ने इस कदम का स्वागत किया है. संगठनों का कहना है कि मुख्यमंत्री का यह रुख दर्शाता है कि सरकार केवल आदेशों का पालन करने तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षकों की वास्तविक समस्याओं को समझते हुए समाधान की दिशा में काम कर रही है. अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं, जहां इस मामले में अगली सुनवाई से शिक्षकों को राहत की उम्मीद है.

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