MP Temple: मध्यप्रदेश की धार्मिक समृद्धि के दावों के बीच विधानसभा में पेश आंकड़ों ने एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने रख दी है. प्रदेश में जहां 2 ज्योर्तिलिंग, 4 शक्तिपीठ और हजारों प्राचीन मंदिर आस्था का केंद्र हैं, वहीं मंदिरों के जीर्णोद्धार का बजट तीन साल में लगभग दो-तिहाई घट गया है.
मध्यप्रदेश विधानसभा में दिए गए लिखित जवाब के अनुसार 2023-24 में मंदिरों के संरक्षण और जीर्णोद्धार के लिए ₹12,05,73,610 स्वीकृत हुए थे और ₹11,99,73,610 जारी किए गए. अगले ही वर्ष 2024-25 में यह राशि घटकर ₹8,35,73,367 स्वीकृत और ₹8,28,55,367 जारी रह गई. और 2025-26 में गिरावट और तेज हो गई इस साल ₹4,11,90,059 स्वीकृत और ₹3,98,58,679 जारी किए गए.
मध्यप्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक भैरों सिंह बापू के जवाब में यह भी स्पष्ट किया गया कि प्रदेश में 22,098 शासन संधारित मंदिरों के रखरखाव की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर है. इनमें से 2,536 मंदिर अकेले उज्जैन जिले में हैं जो सबसे अधिक मंदिरों वाला जिला है. इतने विशाल धार्मिक नेटवर्क के बावजूद जीर्णोद्धार बजट में लगातार गिरावट कई सवाल खड़े कर रही है? क्या 4 करोड़ रुपये में 22 हजार मंदिरों का संरक्षण संभव है? क्या अब केवल चुनिंदा मंदिरों तक ही काम सीमित रहेगा?
MP Temple Renovation Budget
मंत्री ने यह भी बताया कि पुजारियों के मानदेय के रूप में ₹21 करोड़ 96 लाख दिए गए और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना पर ₹42 करोड़ खर्च कर प्रयागराज, अयोध्या, काशी, कामाख्या जैसे तीर्थों की यात्राएं कराई गईं.
हालांकि जब एनडीटीवी ने बजट में गिरावट को लेकर सवाल किया, तो मंत्री ने कहा कि “मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए 25 करोड़ की राशि उपलब्ध कराई जाती है” और यह कहना कि बजट घटाया गया है, सही नहीं है.
सरकार का तर्क है कि सभी मंदिरों को सीधे सरकारी फंड नहीं दिया जाता और कई मंदिर धार्मिक ट्रस्टों के अधीन हैं. लेकिन तथ्य यह है कि जिन मंदिरों की जिम्मेदारी सीधे राज्य पर है, उनके लिए स्वीकृत और जारी राशि में लगातार गिरावट दर्ज हुई है.
कांग्रेस प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता ने तीखा हमला करते हुए कहा कि “बीजेपी की सरकार भगवान, धर्म और मंदिरों से भी छल कर रही है. 12 करोड़ का बजट घटकर 4 करोड़ रह गया. दो-तिहाई कटौती कर दी गई और कहते हैं सेवा कर रहे हैं. सरकार को बताना चाहिए कि असली प्राथमिकता क्या है?”
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