OBC Reservation: फिर अटका 27% पिछड़ा वर्ग आरक्षण का मामला; MP हाईकोर्ट अब इन तारीखों को करेगी अंतिम सुनवाई

OBC Reservation Hearing: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद रिकॉर्ड ट्रांसफर न होने से MP हाईकोर्ट में OBC आरक्षण केस की सुनवाई टल गई. कांग्रेस ने सरकार पर करोड़ों खर्च कर केस रोकने का आरोप लगाया. जानिए कहां फंसा मामला, अब कब होगी सुनवाई.

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MP OBC आरक्षण केस में देरी: सुप्रीम कोर्ट आदेश के बाद भी हाईकोर्ट सुनवाई टली

MP OBC Reservation Case: मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण से जुड़े बहुचर्चित प्रकरणों में एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया अटक गई है. सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद आवश्यक रिकॉर्ड समय पर हाईकोर्ट में प्रस्तुत नहीं किए जा सके, जिसके चलते अंतिम सुनवाई नहीं हो पाई. अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में इन मामलों पर अगली सुनवाई 13, 14 और 15 मई 2026 को होगी. सुनवाई टलने के साथ ही राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. कांग्रेस ने सरकार पर जानबूझकर आरक्षण प्रक्रिया को रोकने और करोड़ों रुपये खर्च कर महंगे वकील खड़े करने का आरोप लगाया है, जबकि सरकार ने अपना पक्ष मजबूती से रखने की बात कही है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद रिकॉर्ड नहीं पहुंचे

ओबीसी आरक्षण से जुड़े कुल चार महत्वपूर्ण प्रकरणों की सुनवाई उस समय प्रभावित हुई, जब सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के 19 फरवरी 2026 के आदेश के बावजूद राज्य सरकार इन मामलों का रिकॉर्ड समय पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में ट्रांसफर नहीं करा सकी. इसके चलते कोर्ट के पास पूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे और अंतिम सुनवाई टालनी पड़ी. स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट को मजबूरन नई तारीखें तय करनी पड़ीं.

13, 14 और 15 मई 2026 को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने इन सभी प्रकरणों की विस्तृत सुनवाई के लिए 13, 14 और 15 मई 2026 की तिथियां निर्धारित की हैं. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी और 20 मार्च 2026 को आदेश पारित कर सभी प्रकरणों को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट को वापस भेजते हुए विशेष बेंच गठित कर तीन माह के भीतर फैसला करने के निर्देश दिए थे.

सरकार ने बदली कानूनी रणनीति, नई अधिसूचना जारी

ओबीसी आरक्षण मामलों की सुनवाई को लेकर राज्य सरकार ने नई अधिसूचना जारी की है. सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने कोर्ट में सरकार का आदेश प्रस्तुत करते हुए बताया कि अब विशेष अधिवक्ता सरकार की ओर से ओबीसी वर्ग का पक्ष नहीं रखेंगे. सरकार ने अपनी ओर से नए वकीलों को नामित किया है.

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तुषार मेहता और केएम नटराज करेंगे सरकार की पैरवी

महाधिवक्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि अब राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता तुषार मेहता और के. एम. नटराज ओबीसी आरक्षण से जुड़े प्रकरणों में पैरवी करेंगे. सरकार का तर्क है कि वह अपना पक्ष मजबूती और प्रभावी ढंग से रखना चाहती है, इसलिए यह बदलाव किया गया है.

कांग्रेस का आरोप: करोड़ों खर्च कर आरक्षण रोका जा रहा

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वर्ष 2019 में कमलनाथ सरकार ने ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक फैसला लिया था. उनका आरोप है कि वर्तमान मोहन यादव सरकार इसे लागू होने से रोकने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर महंगे वकील लगा रही है. पटवारी ने कहा कि भाजपा सरकार की मंशा शुरू से ही ओबीसी आरक्षण को कमजोर करने की रही है.

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कमलनाथ ने ओबीसी समाज से की सतर्क रहने की अपील

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी सरकार पर सीधा आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में वर्ष 2019 में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू किया गया था, लेकिन सरकार गिरने के बाद भाजपा ने इसे अमल में नहीं आने दिया. कमलनाथ ने ओबीसी समाज से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि भाजपा किसी भी समय नई रणनीति अपना सकती है.

2019 से अब तक का पूरा घटनाक्रम

कमलनाथ ने ओबीसी आरक्षण से जुड़े पूरे घटनाक्रम को क्रमवार गिनाते हुए बताया कि मार्च 2019 में कांग्रेस सरकार ने 27 प्रतिशत आरक्षण का फैसला लिया. 19 मार्च 2019 को हाईकोर्ट ने पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्सेज में इस आरक्षण पर आंशिक स्थगन दिया था. इसके बावजूद जुलाई 2019 में कांग्रेस सरकार ने सभी कानूनी अड़चनें दूर करने के लिए विधानसभा में 27 प्रतिशत आरक्षण का कानून पारित किया था.

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