MP Gehu Kharidi 2026: मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर सियासत तेज हो गई है. प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता कमलनाथ ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस बार गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी सुनिश्चित करने के बजाय सरकार ने किसानों के खिलाफ एक सुनियोजित ‘चक्रव्यूह' रच दिया है. कमलनाथ का कहना है कि बारदाने की कमी, सैटेलाइट सर्वे और स्लॉट बुकिंग जैसी व्यवस्थाओं के जरिए किसानों को एमएसपी पर गेहूं बेचने से रोका जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि इससे छोटे, मझोले और बड़े सभी वर्ग के किसान प्रभावित हो रहे हैं और सरकार का गेहूं खरीदी का लक्ष्य सिर्फ दिखावा बनकर रह गया है.
बारदाने की कमी का बहाना, खरीदी एक महीने लेट
कमलनाथ ने कहा कि भाजपा सरकार ने सबसे पहले बारदाने (बोरियों) की कमी का बहाना बनाकर गेहूं खरीदी की प्रक्रिया को करीब एक महीना पीछे खिसका दिया. खरीदी में देरी का सीधा नुकसान छोटे किसानों को हुआ, जिन्हें अपनी जरूरतों और समय के दबाव में औने‑पौने दाम पर बिचौलियों को गेहूं बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा.
सैटेलाइट सर्वे के नाम पर छोटे किसानों को बाहर किया
जब गेहूं खरीदी शुरू हुई, तब सरकार ने नया बहाना सैटेलाइट सर्वे का बना दिया. कमलनाथ के अनुसार, हजारों छोटे किसानों की स्लॉट बुकिंग इस आधार पर अस्वीकार कर दी गई कि उनके खेतों की फसल सैटेलाइट सर्वे में सत्यापित नहीं हो रही है. उन्होंने सवाल उठाया कि जो फसल किसान अपनी आंखों से खेत में देख रहा है, वह सैटेलाइट से कैसे ‘अस्वीकृत' हो सकती है.
MP Gehu Kharidi 2026: गेहूं खरीदी पर कमलनाथ का बयान
'स्लॉट बुकिंग में लगातार आ रही दिक्कतें'
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके बाद भी किसानों की समस्या खत्म नहीं हुई. स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया लगातार बाधित होती रही, जिससे किसान परेशान होते रहे. बार‑बार पोर्टल की समस्याओं और तकनीकी अड़चनों के चलते बड़ी संख्या में किसानों को आज तक स्लॉट ही नहीं मिल पाया.
बड़े किसानों के खिलाफ नई शर्त, दोहरे नुकसान का आरोप
कमलनाथ ने आरोप लगाया कि छोटे किसानों को पहले इस व्यवस्था में फंसाने के बाद सरकार मझोले और बड़े किसानों के खिलाफ नया कुचक्र लेकर आई. नई व्यवस्था के तहत पहले 5 एकड़ से कम भूमि वाले किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा और उसके बाद अन्य किसानों का. सरकार जानती है कि छोटे किसान पहले ही बड़ी मात्रा में गेहूं बिचौलियों को बेच चुके हैं. इस तरह सरकार ने छोटे और मझोले दोनों वर्ग के किसानों से कम गेहूं खरीदने का रास्ता निकाल लिया.
सरकारी आंकड़े ही खोल रहे हैं पोल : कमलनाथ
कमलनाथ ने 23 अप्रैल 2026 तक के सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में 19 लाख से अधिक किसानों ने एमएसपी पर गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण कराया है, लेकिन अब तक केवल करीब 7 लाख किसानों के ही स्लॉट बुक हो पाए हैं. उन्होंने कहा कि पंजीकरण और स्लॉट अलॉटमेंट के बीच इतना बड़ा अंतर खुद ही सरकार के षड्यंत्र को उजागर करता है.
100 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य सिर्फ दिखावा?
कमलनाथ ने सरकार के 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद लक्ष्य पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि पिछले साल प्रदेश में करीब 245 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन हुआ था और सरकार खुद दावा कर रही है कि इस साल उत्पादन और ज्यादा है. ऐसे में कुल उत्पादन के मुकाबले इतनी कम खरीदी का लक्ष्य किसानों के साथ अन्याय है.
MSP 2700 न देने पर माफी की मांग
कमलनाथ ने भाजपा सरकार से मांग की कि किसानों को इस चक्रव्यूह में उलझाने के बजाय अधिकतम किसानों से गेहूं खरीद की जाए. स्लॉट बुकिंग और सैटेलाइट सर्वे की समस्याओं को तत्काल दूर किया जाए. साथ ही उन्होंने वादे के अनुसार 2700 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी न देने के लिए भाजपा से किसानों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की भी मांग की.
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