Tiger State MP on Trial: भारत का ‘टाइगर स्टेट' कहे जाने वाले मध्यप्रदेश में एक ही हफ्ते में दो ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिन्होंने जंगल से लेकर न्यायालय तक सनसनी फैला दी. एक ओर अंतरराष्ट्रीय बाघ तस्करी सिंडिकेट के तीन अहम किरदारों को चार-चार साल की सजा सुनाई गई, वहीं दूसरी ओर बाघों की लगातार हो रही मौतों पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सीधी निगरानी शुरू कर दी.
नर्मदापुरम की विशेष अदालत ने विदिशा के कुख्यात आरोपी आदिन सिंह उर्फ कल्ला बावरिया, पंजाब के पुजारी सिंह और असम की रिंदिक तेरोनपी को चार-चार साल की सजा और 25-25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. ये तीनों एक अंतरराष्ट्रीय बाघ शिकार और तस्करी गिरोह के सक्रिय सदस्य बताए गए हैं. लेकिन, इन सजाओं के बीच एक कड़वी सच्चाई भी सामने आई है कि बाघ मर रहे हैं और उन्हें मारने वाले नेटवर्क पहले से कहीं ज्यादा संगठित और गहरे जमे हुए हैं.
कल्ला बावरिया कोई मामूली शिकारी नहीं
कल्ला बावरिया कोई मामूली शिकारी नहीं. मध्यप्रदेश की स्पेशल टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) के मुताबिक वह एक खतरनाक वन्यजीव अपराधी है, जिसकी तलाश न सिर्फ कई भारतीय राज्यों में थी बल्कि नेपाल में भी की जा रही थी. उस पर 2012 में नेपाल में बाघ शिकार और तस्करी का मामला दर्ज है, जबकि 2013 में महाराष्ट्र के अकोला में बाघ के अंगों की तस्करी में भी उसका नाम सामने आया था.
जांच ने अंतरराष्ट्रीय मोड़ लिया
वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) की विशेष खुफिया सूचना पर अगस्त 2023 में STSF ने उसे विदिशा के ग्यारसपुर से गिरफ्तार किया था. उसके दो अन्य सहयोगी पुजारी सिंह और रिंदिक तेरोनपी को 2025 में पंजाब और असम से पकड़ा गया. रिंदिक तेरोनपी (52) का नाम सामने आते ही जांच ने अंतरराष्ट्रीय मोड़ ले लिया. वह पहले भी अपने बेटे बेदासिंह सेनार के साथ पैंगोलिन स्केल्स और बाघ के अंगों की तस्करी में गिरफ्तार हो चुकी है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, वह दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैले एक संगठित वन्यजीव अपराध नेटवर्क की अहम कड़ी रही है.
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2026 के पहले महीने में 9 बाघों की मौत
बाघों की बढ़ती मौतों पर संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर को 25 फरवरी 2026 तक विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया. यह आदेश वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे की याचिका पर आया. वरिष्ठ वकील आदित्य सांघी ने अदालत के सामने चौंकाने वाले आंकड़े रखे. इस याचिका में एनडीटीवी की खबरों का भी ज़िक्र था जिसके मुताबिक 2025 में मध्यप्रदेश में 54 बाघों की मौत दर्ज हुई और 2026 के सिर्फ पहले महीने में ही 9 और बाघों की मौत हो चुकी है.
मजबूत एंटी-पोचिंग तंत्र लागू नहीं किया गया
बहस के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि बांधवगढ़ में संगठित शिकार जारी है. कई मौतों को “टेरिटोरियल फाइट” बताकर असली कारण शिकार या करंट से मारने को छिपाया जा रहा है. याचिका में यह भी आरोप है कि मजबूत एंटी-पोचिंग तंत्र लागू नहीं किया गया और अधिकारी “सोए हुए” हैं, जबकि संगठित गिरोह बेखौफ सक्रिय हैं. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हर मौत का कारण, परिस्थितियां और बचाव के उपायों की जानकारी दी जाए. अगली सुनवाई 25 फरवरी को होगी.
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क्या यह सजा कानून की जीत है?
मध्यप्रदेश खुद को गर्व से ‘टाइगर स्टेट' कहता है, लेकिन एक तरफ अंतरराष्ट्रीय तस्करों को सजा और दूसरी तरफ बढ़ती मौतों पर न्यायिक निगरानी यह तस्वीर एक गहरे विरोधाभास की ओर इशारा करती है. क्या यह सजा कानून की जीत है? या यह संकेत है कि जंगल में जाल और गहरा हो चुका है? अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट, सीमापार अपराधी, बढ़ती मौतें और अब हाईकोर्ट की सीधी निगरानीमध्यप्रदेश के बाघों की लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है.














