इंदौर TI इंद्रमणि पटेल मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त; पॉकेट गवाह रोकने पर मांगे सुझाव

Indore TI Indramani Patel Case: सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि टीआई इंद्रमणि पटेल ने “अपने बनाए हुए गवाहों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल” किया, जो न केवल पुलिस कार्रवाई पर प्रश्नचिह्न लगाता है बल्कि आपराधिक न्याय व्यवस्था को भी प्रभावित करता है. कोर्ट ने इसे साफ शब्दों में “बदमाशी” करार दिया था.

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Supreme Court: इंदौर TI इंद्रमणि पटेल मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त; पॉकेट गवाह रोकने पर मांगे सुझाव

Indore TI Indramani Patel Case Supreme Court: इंदौर के चर्चित टीआई इंद्रमणि पटेल (Indore TI Indramani Patel) मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए कहा है कि पटेल को अगले आदेश तक लाइन अटैच ही रखा जाए. इसके साथ ही देशभर में पुलिस मामलों में “पॉकेट गवाह” के इस्तेमाल को रोकने के लिए कोर्ट ने सभी पक्षों से सुझाव मांगे हैं. अब मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च को होगी. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कोर्ट के पूर्व आदेश के अनुपालन में टीआई इंद्रमणि पटेल को पहले ही थाने से हटाकर लाइन अटैच कर दिया गया है. इस पर कोर्ट ने निर्देश दिया कि उन्हें अगले आदेश तक इसी स्थिति में रखा जाए. समयाभाव के कारण लंबी सुनवाई संभव न होने पर कोर्ट ने मामले को 10 मार्च के लिए स्थगित कर दिया.

पॉकेट गवाहों पर सख्त टिप्पणी: “आपराधिक न्याय प्रणाली पर उठते हैं गंभीर सवाल”

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस द्वारा “पॉकेट गवाह” यानी ऐसे गवाह जो कई मामलों में बार‑बार पेश किए जाते हैं, उनके उपयोग को गंभीर मुद्दा बताया. अदालत ने कहा कि कई मामलों में एक ही गवाह को दर्जनों बार पेश किया गया. अलग‑अलग प्रकृति के मामलों और अलग‑अलग स्थानों पर समान गवाह दिखाए गए. यह तरीका न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

कोर्ट ने इस समस्या के समाधान के लिए सभी पक्षों से व्यवहारिक सुझाव मांगे हैं, ताकि आगे पॉकेट गवाहों के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए गाइडलाइन बनाई जा सके.

वहीं 13 जनवरी की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि टीआई इंद्रमणि पटेल ने “अपने बनाए हुए गवाहों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल” किया, जो न केवल पुलिस कार्रवाई पर प्रश्नचिह्न लगाता है बल्कि आपराधिक न्याय व्यवस्था को भी प्रभावित करता है. कोर्ट ने इसे साफ शब्दों में “बदमाशी” करार दिया था.

सरकार से पूछा क्यों नहीं हुई अब तक विभागीय कार्रवाई?

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि ऐसे मामलों में क्या कार्रवाई की गई? विभागीय जांच किस स्थिति में है?
रिकॉर्ड और जवाब अगली सुनवाई में पेश किए जाएं. अदालत के कड़े रुख के बाद पुलिस विभाग में हलचल मची है. सूत्रों के अनुसार, संबंधित अधिकारी अपनी सफाई की तैयारी में जुटे हुए हैं.

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