Republic Day Parade 2026 Chhattisgarh Ki Jhanki: गणतंत्र दिवस (Republic Day) के अवसर पर कर्तव्य पथ पर निकलने वाली छत्तीसगढ़ की झांकी (Chhattisgarh Tableau) इस वर्ष देशवासियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनने जा रही है. “स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्” थीम पर आधारित यह झांकी छत्तीसगढ़ के जनजातीय वीर नायकों के संघर्ष, बलिदान और देशभक्ति की अमर गाथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत करेगी. झांकी के माध्यम से देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की संकल्पना और उपलब्धियों को भव्य स्वरूप में प्रदर्शित किया जाएगा. रक्षा मंत्रालय के नेतृत्व में बुधवार को राष्ट्रीय रंगशाला कैंप में आयोजित प्रीव्यू के दौरान छत्तीसगढ़ की झांकी का प्रदर्शन किया गया. झांकी में उन जनजातीय वीर नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई है, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के अन्यायपूर्ण कानूनों और दमनकारी नीतियों के खिलाफ संघर्ष करते हुए स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी.
जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की गौरवगाथा
झांकी में नवा रायपुर अटल नगर में स्थापित देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय को प्रमुखता से दर्शाया गया है. इस संग्रहालय में छत्तीसगढ़ सहित देश के 14 प्रमुख जनजातीय स्वतंत्रता आंदोलनों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों के माध्यम से संरक्षित और प्रदर्शित किया गया है.
यह संग्रहालय जनजातीय समाज के योगदान, संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम है. इस ऐतिहासिक संग्रहालय का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य गठन की रजत जयंती के अवसर पर किया था.
एक महीने की कड़ी मेहनत से झांकी को मिला अंतिम आकार
विशेषज्ञ समिति से अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों, शिल्पकारों और कलाकारों ने बीते एक माह से दिन‑रात परिश्रम कर झांकी को अंतिम रूप दिया है. उल्लेखनीय है कि इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में भाग लेने के लिए देशभर से 17 राज्यों की झांकियों का चयन किया गया है, जिनमें छत्तीसगढ़ की झांकी अपनी विशिष्ट थीम और प्रस्तुति के चलते खास मानी जा रही है.
झांकी में उकेरे गए प्रेरणादायी दृश्य
झांकी के अग्र भाग में वर्ष 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह के नायक वीर गुंडाधुर को दर्शाया गया है. धुर्वा समाज के इस महान योद्धा ने अंग्रेजी शासन के अन्याय के विरुद्ध जनजातीय समाज को एकजुट किया था. भूमकाल विद्रोह के प्रतीक के रूप में आम की टहनियां और सूखी मिर्च झांकी में विशेष रूप से प्रदर्शित हैं. इस विद्रोह की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अंग्रेजों को नागपुर से सेना बुलानी पड़ी, बावजूद इसके वे वीर गुंडाधुर को पकड़ नहीं सके.
झांकी के पृष्ठ भाग में छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह को घोड़े पर सवार, हाथ में तलवार लिए दर्शाया गया है. उन्होंने अकाल के समय गरीबों और वंचितों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में उल्लेखनीय भूमिका निभाई.
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