72 घंटे में 5 बड़ी वारदातों से दहला  छत्तीसगढ़, 'अपराधगढ़' बताने पर छिड़ी सियासी जंग

छत्तीसगढ़ में महज 72 घंटों के भीतर राज्य में हुई पांच बड़ी आपराधिक घटनाओं ने न केवल आम जनता के मन में डर पैदा कर दिया है, बल्कि प्रदेश की कानून व्यवस्था और बीजेपी सरकार को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है.

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72 घंटों में 5 बड़ी वारदातों से दहला छत्तीसगढ़
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छत्तीसगढ़, जिसे अपनी शांति और संस्कृति के लिए जाना जाता है, पिछले तीन दिनों से बड़े आपराधिक घटनाओं को लेकर सुर्खियों में है. दरअसल, महज 72 घंटों के भीतर राज्य में हुई पांच बड़ी आपराधिक घटनाओं ने न केवल आम जनता के मन में डर पैदा कर दिया है, बल्कि प्रदेश की कानून व्यवस्था और बीजेपी सरकार को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है. अपहरण की कोशिश से लेकर डबल मर्डर, लूट और बम मिलने तक की खबरों ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है.

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर समेत अन्य हिस्सों में अपराध का ग्राफ अचानक तेजी से ऊपर गया है. पिछले तीन दिनों में कुछ ऐसी आपराधिक घटनाएं हुई है, जिसने सभी को हिलाकर रख दिया है. 5 मई, दोपहर 12 बजे राजनांदगांव में प्रख्यात समाज सेविका फूलबासन बाई यादव को अगवा करने का प्रयास किया गया. दिनदहाड़े हुई इस घटना ने सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी.5 मई को ही रात 10:30 बजे राजधानी रायपुर के पंडरी इलाके में एक शख्स ने अपनी ही दो सालियों की गोली मारकर हत्या कर दी. इतना ही नहीं, आरोपी ने एक मेडिकल स्टोर पर भी फायरिंग की, जिससे इलाके में दहशत फैल गई. इसी दिन यानी 5 मई को रात 9 बजकर 10 मिनट पर खरोरा इलाके में एक ज्वेलरी दुकान के मैनेजर को निशाना बनाकर अपराधियों ने करीब एक करोड़ रुपये के जेवर और नकदी लूट ले गए. इसके बाद 6 मई को रायपुर के न्यू राजेंद्र नगर में एक बस से चार बोरियों में भरा कैश बरामद किया गया. पुलिस को इसमें बड़े 'हवाला' कारोबार का संदेह है. इसके बाद 7 मई को रायपुर के रावणभाठा इलाके में एक घर के भीतर बम बनाने की सामग्री मिलने से हड़कंप मच गया. वहीं, इस पूरे मामले पर रायपुर डीसीपी मयंक गुर्जर ने बताया कि संदिग्ध बैग मिलने की सूचना पर बम निरोधक दस्ते के साथ जांच की गई है और मामले की गहराई से तफ्तीश जारी है.

 "छत्तीसगढ़ बना अपराधगढ़": कांग्रेस

इन घटनाओं के बाद विपक्ष पूरी तरह हमलावर है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने सरकार को घेरते हुए इसे 'अपराधगढ़' कह कर तीखा हमला किया है. कांग्रेस नेता व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सवाल उठाया है कि राज्य में पूर्णकालिक डीजीपी (DGP) क्यों नहीं है? उनके मुताबिक, नेतृत्व की कमी अपराध बढ़ने का मुख्य कारण है. कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश के गृह मंत्री बंगाल चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं, जबकि मुख्यमंत्री मौन साधे हुए हैं. वहीं, सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि जब राजधानी में बम बनाने की कवायद हो रही हो, तो समझा जा सकता है कि अपराधी कितने बेखौफ हैं.

सरकार का पलटवार

विपक्ष के तीखे हमलों के बीच उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने सरकार का बचाव किया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इन मामलों को लेकर बेहद गंभीर है और अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. साव ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कम से कम कांग्रेस को अपराध के मामले में बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. उन्हें अपना कार्यकाल याद करना चाहिए. हमारी सरकार में जैसे ही कोई घटना होती है, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती है और अपराधियों को तुरंत पकड़ा जा रहा है.

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भले ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग जारी हो, लेकिन जमीनी हकीकत डराने वाली है. रायपुर की सड़कों पर चलती गोलियां, करोड़ों की लूट और संदिग्ध बमों की मौजूदगी यह बताती है कि अपराधी अब पुलिस के खौफ से दूर बड़ी वारदातों को अंजाम देने में हिचकिचा नहीं रहे हैं. सवाल यह है कि क्या छत्तीसगढ़ फिर से अपनी पुरानी 'शांति' वापस पा सकेगा या इस तरह की आपराधिक घटनाएं इसी तरह जनता को डराती रहेगी. 

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