महापौर ने तीन अधिकारियों को बनाया बंधक! एएसपी, सीएसपी सहित दो थानों की पुलिस ने कराया रिहा 

छत्तीसगढ़ के दुर्ग में महापौर अलका बाघमार और अधिकारियों के बीच विवाद ने सियासी रूप ले लिया. भूमिपूजन कार्यक्रम से शुरू हुआ मामला इतना बढ़ा कि महापौर पर अधिकारियों को केबिन में बंधक बनाने के आरोप लग गए. स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा.

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Durg Mayor Controversy: छत्तीसगढ़ के दुर्ग में एक मामूली प्रशासनिक नाराजगी अचानक बड़े सियासी ड्रामे में बदल गई. महापौर अलका बाघमार पर तीन अधिकारियों को अपने केबिन में रोककर “बंधक” बनाने जैसे गंभीर आरोप लगे. मामला तब और तूल पकड़ गया जब अधिकारियों ने खुद को असहज महसूस करते हुए पुलिस को बुला लिया और दो थानों की टीम को मौके पर पहुंचना पड़ा.

कार्यक्रम से शुरू हुआ पूरा विवाद

पूरा मामला उरला स्थित एक सरकारी स्कूल में अतिरिक्त कक्ष के भूमिपूजन कार्यक्रम से शुरू हुआ. इस कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव मुख्य अतिथि थे. महापौर अलका बाघमार जब कार्यक्रम में देरी से पहुंचीं, तब तक भूमिपूजन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी.

मंच पर पहुंचते ही उन्होंने अधिकारियों पर नाराजगी जताई और खुले तौर पर लापरवाही का आरोप लगाया. महापौर ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को समय पर सूचना देना अधिकारियों की जिम्मेदारी है, लेकिन अधिकारी इस जिम्मेदारी को गंभीरता से नहीं लेते.

मंच से ही अधिकारियों को लगाई फटकार

कार्यक्रम के दौरान महापौर ने तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए अधिकारियों को जमकर लताड़ा. उन्होंने कहा कि केवल औपचारिकता निभाने के बजाय अधिकारियों को अपने काम पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने यहां तक कह दिया कि जो अधिकारी जिम्मेदारी से काम नहीं कर सकते, उन्हें मुफ्त में वेतन लेने का कोई अधिकार नहीं है. इस बयान के बाद कार्यक्रम का माहौल काफी तनातनी भरा हो गया.

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अगले दिन केबिन में बनाया 'बंधक' 

विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ. अगले दिन महापौर ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के कार्यपालन अभियंता जे.के. मेश्राम, एसडीओ सी.के. सोने और मंडी बोर्ड के एसडीओ प्रवीण पांडे को अपने केबिन में बुलाया. महापौर ने उनसे कार्यक्रम में हुई लापरवाही का कारण पूछा और जवाब मांगते हुए उन्हें वहीं बैठाए रखा.

‘जवाब दो, तब तक बाहर नहीं जाओगे'

बताया जा रहा है कि जब अधिकारियों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो महापौर ने सख्त रुख अपनाया. उन्होंने साफ कहा कि जब तक सही जवाब नहीं मिलेगा, तब तक कोई भी केबिन से बाहर नहीं जाएगा, चाहे देर रात ही क्यों न हो जाए. इतना ही नहीं, महापौर ने अपने गार्ड को भी निर्देश दिए कि किसी भी अधिकारी को बाहर जाने न दिया जाए. इस दौरान अधिकारियों को फोन करने के लिए भी बाहर नहीं जाने दिया गया.

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अधिकारियों ने चुपके से पुलिस को लगाया फोन

केबिन के अंदर का माहौल धीरे-धीरे तनावपूर्ण होता चला गया. खुद को असहज महसूस कर रहे अधिकारियों में से एक ने किसी तरह पुलिस को सूचना दे दी. जानकारी मिलते ही एडिशनल एसपी, सीएसपी और दो थानों की पुलिस टीम नगर निगम कार्यालय पहुंची. पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए स्थिति को संभाला और अधिकारियों को केबिन से बाहर निकाला. इस घटना के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया.

महापौर अलका बाघमार ने दी सफाई  

इस पूरे विवाद पर महापौर अलका बाघमार ने अपनी सफाई भी दी है. उन्होंने कहा कि अधिकारियों को केवल जवाब देने के लिए बुलाया गया था और उन्होंने आगे ऐसी गलती न करने का आश्वासन भी दिया. बंधक बनाए जाने के आरोपों को उन्होंने सिरे से खारिज किया. महापौर का कहना है कि वहां कोई बंधक नहीं था और पुलिस को बुलाने की घटना भी अधिकारियों की तरफ से बनाई गई स्थिति थी. उन्होंने कहा कि जब कोई बंधक था ही नहीं, तो इसे बंधक बनाना कैसे कहा जा सकता है.

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