दिग्विजय सिंह ने फिर दिया विवादित बयान, बोले- भारत में एक भी Hindu नहीं..

दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में कहा कि भारत में एक भी हिंदू नहीं है, क्योंकि "हिंदू" शब्द फारसी भाषा से आया है और इसका उपयोग सिंधु नदी के पार रहने वाले लोगों के लिए किया गया था.

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Madhya Pradesh Congress: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह (Digvijaya Singh) ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है. उनके इस बयान से कांग्रेस पार्टी की मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं. उन्होंने सागर (Sagar News) जिले में फिर से भारत में हिंदू नहीं है, वाला बयान दोहराया है. इससे पहले भी वह ऐसा ही बयान भोपाल में दे चुके हैं. उन्होंने कहा कि असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) और भाजपा (BJP) मिलकर खेल खेलते हैं.

राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान के तहत मंगलवार को सागर जिले की बीना तहसील के गोदना गांव पहुंचे था. यहां आयोजित ग्राम चौपाल में उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने मनरेगा, भाजपा की विचारधारा और ‘हिंदू' शब्द को लेकर ऐसा बयान दिया, जो अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं का विषय बन गया है.

मनरेगा को लेकर केंद्र पर साधा निशाना

दिग्विजय सिंह ने कहा कि मनरेगा गरीब, किसान और मजदूरों के लिए अधिकार आधारित योजना है, जिसे भाजपा सरकार धीरे-धीरे खत्म करना चाहती है. उन्होंने कहा कि मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान को जन आंदोलन बनाने के लिए पंचायत स्तर पर 25-25 लोगों की समितियां गठित की जाएंगी, ताकि गांव-गांव में लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा सके.

आरएसएस को लेकर भी बोले

दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा की विचारधारा पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की बात करते हैं, यदि ऐसा होता है तो देश में रहने वाले सिख, ईसाई और मुस्लिम समुदाय के लोग कहां जाएंगे. उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं का देश है और यहां सभी धर्मों और समुदायों को साथ लेकर चलना ही देश की ताकत है.

हिंदू नहीं, हम हैं...

‘हिंदू' शब्द को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहा कि भारत में एक भी हिंदू नहीं है. हिंदू एक फारसी शब्द है, जिसका प्रयोग सिंधु नदी के पार रहने वाले लोगों के लिए किया गया था. यह शब्द संस्कृत के ‘सिंधु' से निकला, जिसे फारसी और यूनानी लोगों ने अपनी भाषा में ‘हिंदू' बना दिया. उन्होंने कहा कि यह शुरुआत में एक भौगोलिक पहचान थी, जो बाद में मध्यकाल में धार्मिक पहचान में बदल गई. दिग्विजय सिंह ने जोर देते हुए कहा, “हम हिंदू नहीं, बल्कि सनातनी हैं.”

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