- छत्तीसगढ़ के धमतरी के एक स्कूल में 11वीं कक्षा के छात्र ने 18 सहपाठियों को अलग-अलग दिनों में काटा.
- प्रभावित बच्चों को स्वास्थ्य केंद्र में लेकर जाकर रेबीज से बचाव के टीके लगाए गए और जांच की गई.
- आरोपी छात्र को तीन साल पहले आवारा कुत्ते ने काटा था, लेकिन उसके शरीर में रेबीज के कोई लक्षण नहीं पाए गए.
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. ग्राम कोर्रा स्थित सिलौटी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 11वीं कक्षा के एक छात्र द्वारा अपने ही सहपाठियों को काटने की घटना ने स्कूल प्रशासन, अभिभावकों और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है. जानकारी के मुताबिक छात्र ने अलग-अलग दिनों में 18 बच्चों को शरीर के विभिन्न हिस्सों में काट लिया. जैसे ही मामला सामने आया, बच्चों के परिजनों में दहशत फैल गई और सभी प्रभावित छात्रों को स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर रेबीज से बचाव के टीके लगाए गए. खास बात यह है कि संबंधित छात्र को करीब तीन साल पहले एक आवारा कुत्ते ने काटा था, जिसके बाद इस घटना को लेकर तरह-तरह की आशंकाएं जताई जाने लगीं.
स्कूल में सामने बच्चों को काटा
यह पूरा मामला धमतरी जिले के ग्राम कोर्रा स्थित सिलौटी के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का है. बताया जा रहा है कि 11वीं कक्षा में पढ़ने वाले एक छात्र ने अपने साथ पढ़ने वाले कई छात्रों को अलग-अलग समय पर काटा. शुरुआत में इसे सामान्य शरारत माना गया, लेकिन जब ऐसे बच्चों की संख्या बढ़कर 18 तक पहुंच गई तो मामला गंभीर हो गया. घटना की जानकारी मिलने के बाद स्कूल प्रबंधन ने तत्काल स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी. इसके बाद प्रभावित छात्रों को उनके शिक्षकों के साथ स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया, जहां उन्हें एंटी रेबीज वैक्सीन लगाई गई.
परिजनों और शिक्षकों में मचा हड़कंप
एक साथ बड़ी संख्या में बच्चों को काटे जाने की जानकारी मिलते ही अभिभावकों में चिंता बढ़ गई. कई परिजन तुरंत स्कूल पहुंचे और बच्चों की स्वास्थ्य जांच कराने की मांग करने लगे. दूसरी ओर स्कूल के शिक्षक भी पूरे मामले को लेकर सतर्क हो गए. वहीं जिस छात्र पर बच्चों को काटने का आरोप है, उसका इलाज और परीक्षण धमतरी जिला अस्पताल में कराया.
डॉक्टर ने क्या कहा?
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर जयप्रकाश दीवान ने बताया कि बच्चों को किसी कुत्ते ने नहीं काटा है. जांच में यह बात सामने आई कि स्कूल के एक छात्र ने अलग-अलग दिनों में अपने साथियों को काटा था. सुरक्षा की दृष्टि से सभी प्रभावित बच्चों को रेबीज से बचाव के टीके लगा दिए हैं. डॉक्टर के अनुसार अब तक की जांच में संबंधित छात्र में रेबीज जैसे कोई लक्षण दिखाई नहीं हैं. उन्होंने बताया कि बच्चों और शिक्षकों से मिली जानकारी के आधार पर मामला फिलहाल किसी शरारत या मजाक की तरह प्रतीत हो रहा है.
रेबीज के लक्षण नहीं मिले
डॉक्टर जयप्रकाश दीवान ने बताया कि रेबीज के मरीज में आमतौर पर पानी से डर लगना, तेज रोशनी और आवाज से परेशानी होना, भोजन न कर पाना तथा मानसिक स्थिति में गंभीर बदलाव जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. लेकिन जिस छात्र की जांच की गई है, उसमें ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं. डॉक्टर के मुताबिक छात्र सामान्य रूप से खाना खा रहा है, पानी पी रहा है और उसकी स्थिति फिलहाल सामान्य है.
निगरानी में रखा गया छात्र
हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने मामले को पूरी तरह हल्के में नहीं लिया है. डॉक्टरों ने छात्र के अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन को उसे निगरानी में रखने की सलाह दी है. यदि भविष्य में कोई असामान्य व्यवहार या स्वास्थ्य संबंधी लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत स्वास्थ्य विभाग को सूचना देने को कहा गया है. चिकित्सकों का कहना है कि रेबीज से जुड़े मामलों में इनक्यूबेशन पीरियड निश्चित नहीं होता. यह कई बार कम तो कई बार लंबा भी हो सकता है.