Chhattisgarh Lok Bhawan Order: छत्तीसगढ़ में विश्वविद्यालय (Chhattisgarh University) के अधिकारी-कर्मचारियों पर किसी भी तरह की जांच करने से पहले लोक भवन (Chhattisgarh Lok Bhawan) से सरकार को अनुमति लेनी होगी. लोक भवन के हाल में ही जारी इस आदेश के बाद विपक्ष सवाल उठा रहा है कि क्या छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार (BJP Government) और राज्यपाल (Chhattisgarh Governor) के बीच में कोई टकरार है? क्या सरकार और राज्यपाल के बीच समन्वय बनाकर काम नहीं हो रहा है? इस पूरे मामले पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा है.
कांग्रेस ने क्या कहा?
छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला कहना है कि यह बेहद ही चिंताजनक है कि सरकार राज भवन का भरोसा खो चुकी है, कुछ मामलों में राजभवन सीधे निर्णय ले रहा है जो कि उनके अधिकार क्षेत्र के बाहर है. या अधिकारों का अतिक्रमण करके निर्णय लिया जा रहा है. हाल में ही एक आदेश जारी किया गया है कि विश्वविद्यालय के किसी कर्मचारी के खिलाफ अगर सरकार जांच कर रही है तो उससे पहले लोक भवन से अनुमति लेनी पड़ेगी, इससे पहले राज्यपाल जिलों में जाकर बैठकर ले रहे हैं. राज्य सरकार को इसको लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.
बता दें कि राज्यपाल इससे डेका इससे पहले कई जिलों में जाकर प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक लेते रहे हैं. इसको लेकर भी विपक्षी दल कांग्रेस सवाल उठाती रही है कि आखिर प्रदेश में क्या आपातकाल जैसी स्थिति बन गई है जो राज्यपाल को जिलों में जाकर प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक लेने की जरूरत पड़ रही है.
सरकार का क्या कहना है?
लोक भवन द्वारा जारी ताजा आदेश मामले में चर्चाओं का दौर जारी है. विपक्षी दल कांग्रेस गंभीर आरोप भी लगा रही है, लेकिन इस पर राज्य सरकार के जिम्मेदारों के अपने ही तर्क हैं. छत्तीसगढ़ सरकार में उपमुख्यमंत्री अरुण साव का कहना है कि कई बार प्रशासनिक निर्णय होते हैं. राज्यपाल विश्वविद्यालय के कुलाधिपति होते हैं. विश्वविद्यालय के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी होते हैं. ऐसे में प्रशासनिक दृष्टि से वह कोई निर्णय लिए होंगे.
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