छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बिना पेनेट्रेशन ‘रेप’ नहीं, ‘रेप का प्रयास है’

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि पीड़िता के साथ पूर्ण पेनेट्रेशन नहीं हुआ है और केवल जननांग रगड़ने की घटना हुई है, तो इसे बलात्कार नहीं बल्कि बलात्कार का प्रयास माना जाएगा

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने केवल जननांग रगड़ने की घटना को बलात्कार नहीं बल्कि बलात्कार का प्रयास माना है
  • मेडिकल रिपोर्ट में हाइमन सुरक्षित पाया गया जबकि वल्वा में लालिमा और मानव शुक्राणु की पुष्टि हुई थी
  • आरोपी को धारा 376(1) की सजा रद्द कर धारा 376/511 के तहत साढ़े तीन वर्ष की सजा सुनाई गई है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि पीड़िता के साथ पूर्ण पेनेट्रेशन नहीं हुआ है और केवल जननांग रगड़ने की घटना हुई है, तो इसे बलात्कार नहीं बल्कि बलात्कार का प्रयास माना जाएगा, मेडिकल साक्ष्यों में हाइमन सुरक्षित पाए जाने के आधार पर कोर्ट ने दोषी की सजा सात साल से घटाकर साढ़े तीन साल कर दी. न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकलपीठ ने कहा कि आरोपी की नीयत आपराधिक और स्पष्ट थी, लेकिन पेनेट्रेशन के ठोस प्रमाण न होने से यह अपराध धारा 376 के बजाय धारा 376/511 के अंतर्गत आएगा. घटना की पृष्ठभूमि मामला वर्ष 2004 का है.

अभियोजन के अनुसार,पीड़िता को उसके घर से जबरन खींचकर आरोपी अपने घर ले गया, वहां कपड़े उतारकर उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की गई, इतना ही नहीं, पीड़िता को कमरे में बंद कर हाथ-पैर बांध दिए गए और मुंह में कपड़ा ठूंस दिया गया, बाद में उसकी मां ने उसे छुड़ाया. ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को आईपीसी की धारा 376(1) और 342 के तहत दोषी ठहराते हुए सात वर्ष का कठोर कारावास सुनाया था.

मेडिकल रिपोर्ट और बयान में विरोधाभास

हाईकोर्ट ने पीड़िता की गवाही और मेडिकल रिपोर्ट का गहन परीक्षण किया. प्रारंभिक बयान में पेनेट्रेशन का आरोप था, लेकिन बाद में पीड़िता ने स्वीकार किया कि आरोपी ने केवल अपना प्राइवेट पार्ट उसके प्राइवेट पार्ट पर रखा,प्रवेश नहीं किया.

डॉक्टर की रिपोर्ट में हाइमन सुरक्षित पाया गया. हालांकि, वल्वा में लालिमा और कपड़ों पर मानव शुक्राणु की पुष्टि हुई,कोर्ट ने कहा कि ये तथ्य अपराध की कोशिश दर्शाते हैं, लेकिन पूर्ण बलात्कार सिद्ध नहीं करते.

तैयारी और प्रयास में अंतर

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि आरोपी के कृत्य जबरन ले जाना, कपड़े उतरवाना और जननांग रगड़ना सिर्फ तैयारी नहीं,बल्कि अपराध के प्रयास की श्रेणी में आते हैं, कोर्ट ने दोहराया कि बलात्कार के लिए “पेनेट्रेशन” अनिवार्य तत्व है, बिना इसके धारा 376 लागू नहीं हो सकती.

उम्र पर आपत्ति खारिज

पीड़िता की उम्र को लेकर उठाई गई आपत्ति भी कोर्ट ने खारिज कर दी. स्कूल रजिस्टर को साक्ष्य अधिनियम की धारा 35 के तहत मान्य सार्वजनिक दस्तावेज माना गया. हाईकोर्ट ने धारा 376(1) के तहत दोषसिद्धि रद्द कर आरोपी को धारा 376/511 (बलात्कार का प्रयास) में दोषी ठहराया. 3 वर्ष 6 माह कठोर कारावास व ₹200 जुर्माना लगाया. धारा 342 के तहत 6 माह की सजा बरकरार दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी. आरोपी को दो माह के भीतर आत्मसमर्पण का निर्देश दिया गया है.

Advertisement
Featured Video Of The Day
Mumbai Coastal Road पर बजता है 'जय हो'! देश का पहला म्यूजिकल रोड लॉन्च | CM Fadnavis | Maharashtra