Chhattisgarh government schools News: छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने नए शैक्षणिक सत्र से सरकारी स्कूलों में कई नवाचार का ऐलान किया है. हालांकि, मंत्रोच्चार से स्कूलों की शुरुआत करने की घोषणा की वजह से इस पर सियासत शुरू हो गया है. मंत्री के इस घोषणा के बाद पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने शिक्षा मंत्री से पूछा है कि क्या यह सब सरकारी स्कूल को शिशु मंदिर बनाने की कोशिश है.
दरअसल, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए कहा था कि अब स्कूलों में पढ़ाई की शुरुआत मंत्रोच्चार के साथ की जाएगी. इसके साथ ही प्रतिदिन राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के साथ विद्यार्थियों को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने पर भी जोर दिया जाएगा. शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल किताबों तक सीमित शिक्षा नहीं रखा जाएगा, बल्कि बच्चों का समग्र विकास किया जाएगा. इसी कड़ी में स्कूलों के पाठ्यक्रम और गतिविधियों में व्यापक बदलाव किए जाएंगे.
इन नई घोषणाओं का किया ऐलान
उन्होंने बताया कि अब बच्चों को बारहखड़ी से लेकर आधुनिक तकनीक जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तक की जानकारी दी जाएगी, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सके. इसके अलावा हर महीने दो से तीन महापुरुषों पर व्याख्यान आयोजित कर छात्रों को उनके जीवन और विचारों से प्रेरित किया जाएगा. हालांकि, इस फैसले पर विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. इसके साथ ही उन्होंने मंत्रोच्चार से स्कूलों की शुरुआत करने की घोषणा भी की.
विपक्ष ने किया करारा हमला
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में विफल रही है. इसी वजह से अब इस तरह के फैसलों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि अभी तक कई स्कूलों में बच्चों को किताब तक उपलब्ध नहीं हो पाई है. वहीं, आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया भी सुचारू रूप से नहीं चल रही है. दीपक बैज ने आगे कहा कि प्रदेश के कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी है और बालिकाओं के लिए शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं. ऐसे में मंत्रोच्चार लागू करना प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार सरकारी स्कूलों को शिशु मंदिर की तरह चलाना चाहती है.
यह भी पढ़ें- LPG News: सील लगे LPG सिलेंडर में भी एक से दो किलो कम निकली गैस, जानें- कौन कर रहा है ये खेला
इस मुद्दे पर अब प्रदेश में शिक्षा और राजनीति दोनों स्तरों पर बहस तेज हो गई है. एक ओर सरकार इसे सांस्कृतिक और आधुनिक शिक्षा का संतुलन बता रही है. वहीं, विपक्ष इसे जमीनी समस्याओं से ध्यान हटाने की कोशिश करार दे रहा है. आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन बदलावों का स्कूलों और छात्रों पर क्या असर पड़ता है.
यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ में 2 लाख शिक्षकों को मिलेगा प्रशिक्षण, रायपुर से शुरू होगा बड़ा अभियान














