रोमांटिक फिल्म देखने वालों को सलमान खान की फिल्म तेरे नाम (Tere Naam) तो जरूर याद होगी. फिल्म में सलमान खान के कैरेक्टर का नाम राधे होता है. इस फिल्म में उन्हें एक लड़की से प्यार हो जाता है और जब उसे लड़की नहीं मिलती है तो वह मानसिक रूप से अस्वस्थ हो जाता है. कुछ ऐसा ही घटना मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से सामने आई है. पिता और आसपास के लोगों का कहना है कि प्यार में मिले दर्द और बेवफाई में हंसता-खेलता युवक मानसिक रूप से अस्वस्थ हो गया. जिले के बमीठा थाना क्षेत्र के गांव का युवक पिछले कई वर्षों से जंजीरों में बंधा जीवन काटने को मजबूर था, जिसे अब मनोचिकित्सक (Psychiatrist) डॉ. संजय शर्मा के प्रयासों से नई उम्मीद मिली है.
दिल्ली में 7-8 साल पहले हुआ प्यार
जानकारी के अनुसार, युवक करीब 7-8 साल पहले दिल्ली में मजदूरी करता था. वहां उसे एक युवती से प्रेम हो गया, लेकिन प्यार में मिले धोखे ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया. घर लौटने के बाद वह गुमसुम रहने लगा, खाना-पीना छोड़ दिया और दिन-रात बेवफाई के गाने सुनता रहता था. धीरे-धीरे उसकी स्थिति इतनी बिगड़ गई कि वह हिंसक हो गया.
आर्थिक तंगी के कारण पिता उसका इलाज कराने में असमर्थ थे और सुरक्षा की दृष्टि से उसे जंजीरों से बांधकर रखने को मजबूर थे.
डॉ. संजय शर्मा और पुलिस की टीम ने बढ़ाया मदद का हाथ
युवक की दयनीय स्थिति की सूचना मिलते ही समाज सेवी डॉ. संजय शर्मा सक्रिय हुए. उन्होंने महिला थाना प्रभारी प्रतिभा श्रीवास्तव के सहयोग से युवक को जंजीरों से मुक्त कराया और जिला चिकित्सालय में उसका मेडिकल परीक्षण कराया.
डॉ. संजय शर्मा ने बताया कि "सोनू की हालत गंभीर जरूर है, लेकिन सही इलाज से वह पूरी तरह ठीक हो सकता है. हमने उसे न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि उसे ग्वालियर की मानसिक आरोग्यशाला भेजा जा सके."
संजय दत्त का फैन है युवक, पिता को अब चमत्कार की उम्मीद
दिलचस्प बात यह है कि मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के बावजूद युवक बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त का बड़ा प्रशंसक है और अक्सर उनकी तरह एक्टिंग करता है. युवक के पिता की भिक्षावृत्ति कर जीवन यापन कर रहे हैं. उन्होंने डॉ. शर्मा और प्रशासन की इस मदद के लिए आभार व्यक्त किया है. उन्हें विश्वास है कि ग्वालियर में इलाज के बाद उनका बेटा फिर से सामान्य होकर घर लौटेगा
डॉ. शर्मा का सेवा संकल्प
उल्लेखनीय है कि अब तक 1500 से अधिक मानसिक रोगियों को ग्वालियर आरोग्यशाला भिजवा चुके हैं. इनमें से लगभग 1400 लोग पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने परिवारों के पास लौट चुके हैं और आज समाज की मुख्यधारा का हिस्सा हैं.














