Jal Jeevan Mission 2.0 Cabinet Approval Water Scheme: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) की अवधि दिसंबर 2028 तक बढ़ाने (Jal Jeevan Mission Extension) को मंजूरी दे दी गई है. इसके साथ ही योजना को जल जीवन मिशन 2.0 (Jal Jeevan Mission 2.0) के रूप में पुनर्गठित किया गया है. फैसले के तहत ग्रामीण पेयजल आपूर्ति को और मजबूत करने के साथ‑साथ सेवा आधारित, टिकाऊ और पारदर्शी सिस्टम विकसित करने पर फोकस रहेगा.
मिशन का बजट बढ़कर 8.69 लाख करोड़ रुपये
सरकार ने जल जीवन मिशन के लिए कुल व्यय बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपये कर दिया है. इसमें से 3.59 लाख करोड़ रुपये की सहायता केंद्र सरकार द्वारा दी जाएगी. सरकार का लक्ष्य तय समयसीमा के भीतर हर ग्रामीण परिवार को नल से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है.
पहले ही दिन मध्यप्रदेश ने केंद्र से किया एमओयू
जल जीवन मिशन 2.0 के पहले ही दिन मध्यप्रदेश सरकार ने केंद्रीय जल शक्ति और पेयजल मंत्रालय के साथ एमओयू किया. इस समझौते के तहत पेयजल योजनाओं के लिए पाइपलाइन बिछाने से लेकर पूरी अधोसंरचना के निर्माण तक के काम किए जाएंगे, ताकि शुद्ध पेयजल अंतिम छोर तक पहुंच सके. एमओयू के दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटील, जल शक्ति राज्यमंत्री वी. सोमन्ना, मध्यप्रदेश के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपत्तिया उइके, प्रमुख सचिव पी. नरहरि समेत केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.
गांव‑गांव तक जल आपूर्ति और जल संचयन पर जोर
योजना का मुख्य उद्देश्य पंचायतों की भागीदारी से जलापूर्ति और जल संचयन को छोटे‑छोटे गांवों तक पहुंचाना है. सरकार का फोकस सिर्फ पानी पहुंचाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसकी नियमितता और गुणवत्ता बनाए रखने पर भी रहेगा.
ग्रामीण पेयजल के लिए अहम कदम : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि जल जीवन मिशन 2.0 ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का प्रदेश की जनता की ओर से आभार जताया.
हर योजना पर गुणवत्ता और समयसीमा पर नजर : CM
मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश में मिशन के तहत स्वीकृत सभी ग्रामीण नल‑जल योजनाओं को गुणवत्ता के साथ लागू किया जा रहा है. निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी योजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. मुख्यमंत्री के अनुसार, ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी के साथ ‘हर घर जल प्रमाणित' पंचायतों में ग्रामीण पेयजल योजनाओं के घटकों का निरीक्षण किया जा रहा है. इस प्रक्रिया को ‘जल आकलन' नाम दिया गया है, जिससे योजनाओं की गुणवत्ता और स्थायित्व सुनिश्चित किया जा सके.
‘जल अर्पण' उत्सव और ‘जल महोत्सव'
प्रदेश में पूर्ण हो चुकी योजनाओं का हस्तांतरण निर्वाचित प्रतिनिधियों और ग्रामीणों की सहभागिता से ‘जल अर्पण' उत्सव के रूप में किया जा रहा है.
देश का पहला जल अर्पण उत्सव 23 दिसंबर 2025 को राजगढ़ जिले के कुंडीबेय गांव में आयोजित हुआ था. इसके अलावा 8 मार्च से 22 मार्च तक ‘जल महोत्सव' के अंतर्गत राज्यभर में जल संरक्षण और जनजागरूकता से जुड़े कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं.
पंचायतों को संचालन और रखरखाव में मिलेगी ताकत
राज्य मंत्रि‑परिषद ने “मध्यप्रदेश पंचायत (ग्रामीण नल जल योजना संचालन‑संधारण एवं प्रबंधन नीति), 2026” को भी मंजूरी दी है. इस नीति के तहत ग्राम पंचायतों को योजनाओं के संचालन और रखरखाव में अधिक अधिकार और जिम्मेदारी दी जाएगी.
2028 तक हर घर तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भरोसा जताया कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटील के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार दिसंबर 2028 तक जल जीवन मिशन के सभी कार्य पूरे कर लेगी. उन्होंने कहा कि यह मिशन ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता सुधारने और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम पहल साबित होगा.
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