Pritam Lodhi Notice by BJP: भाजपा के भीतर अनुशासन को लेकर एक बड़ा कदम सामने आया है. शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा सीट से विधायक प्रीतम सिंह लोधी को पार्टी ने नोटिस जारी किया है. पार्टी नेतृत्व ने उनके हालिया व्यवहार को अनुचित मानते हुए तीन दिन के भीतर जवाब देने को कहा है. इस पूरे मामले ने राजनीतिक के साथ‑साथ सामाजिक स्तर पर भी हड़कंप मचा दिया है.
पार्टी ने माना विधायक का आचरण अनुशासनहीन
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के कार्यालय ने साफ तौर पर स्वीकार किया है कि बीते दिनों विधायक प्रीतम सिंह लोधी का आचरण ठीक नहीं था. इसी आधार पर पार्टी मुख्यालय से उन्हें नोटिस जारी किया गया है. प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कम लेकिन सटीक शब्दों में नोटिस भेजते हुए यह साफ कर दिया है कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं रहा, तो आगे की कार्रवाई हो सकती है.
तीन दिन में जवाब देने का अल्टीमेटम
पार्टी द्वारा दिए गए नोटिस में विधायक को तीन दिन का समय दिया गया है, ताकि वे अपने पक्ष में जवाब रख सकें. यह नोटिस सीधे पार्टी मुख्यालय से जारी हुआ है, जिससे साफ है कि मामला शीर्ष नेतृत्व की नजर में गंभीर है.
एसडीओपी को धमकी से बढ़ा विवाद
पूरा विवाद 16 अप्रैल की घटना से जुड़ा माना जा रहा है. उस दिन विधायक के बेटे की थार गाड़ी से हुई दुर्घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई से नाराज होकर विधायक ने करैरा एसडीओपी आयुष जाखड़ को लेकर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था. विधायक ने कथित तौर पर उनके घर में गोबर भर देने जैसी धमकी दी थी, जिससे प्रदेश भर की आईपीएस लॉबी नाराज हो गई.
आईपीएस एसोसिएशन ने सीएम को लिखा पत्र
इस बयान के बाद मध्य प्रदेश आईपीएस एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विधायक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की. पुलिस अधिकारियों ने इसे प्रशासनिक अधिकारियों का अपमान और कानून-व्यवस्था को कमजोर करने वाला बताया.
सामाजिक संगठनों का भी बढ़ता विरोध
राजनीतिक कार्रवाई के साथ‑साथ सामाजिक स्तर पर भी विधायक के खिलाफ नाराजगी सामने आई. शिवपुरी में भीम आर्मी से जुड़े लोगों ने सड़कों पर उतरकर विधायक के खिलाफ प्रदर्शन किया. वहीं सहरिया क्रांति संगठन से जुड़े आदिवासी समाज ने भी चेतावनी देते हुए आंदोलन की बात कही और विधायक के व्यवहार को समाज के लिए अपमानजनक बताया.
अब मीडिया पर लगाए आरोप
नोटिस मिलने के बाद प्रीतम सिंह लोधी के सुर कुछ बदले हुए नजर आ रहे हैं. पिछले कुछ घंटों से उन्होंने मीडिया पर आरोप लगाना शुरू कर दिया है. उनका कहना है कि मीडिया ने उनके बयानों को तोड़‑मरोड़कर पेश किया और मामले को बेवजह तूल दिया. हालांकि पार्टी और सामाजिक संगठनों का रुख अभी भी सख्त बना हुआ है.
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पार्टी के नोटिस का जवाब विधायक क्या देते हैं. उनके जवाब के आधार पर ही तय होगा कि आगे पार्टी की ओर से कोई बड़ी कार्रवाई होती है या नहीं.














