Bhopal Cylinder Black Marketing:मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इन दिनों दोतरफा मार पड़ रही है. एक तरफ आसमान से बरसती आग और तपती गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर रखा है, तो दूसरी तरफ सात समंदर पार चल रहे ईरान-इजरायल संघर्ष की तपिश ने भोपाल की रसोइयों को ठंडा कर दिया है. युद्ध के कारण बिगड़ी सप्लाई चेन का बहाना बनाकर शहर में गैस का एक समानांतर और खतरनाक काला बाज़ार फल-फूल रहा है. NDTV के स्टिंग ऑपरेशन में राजधानी के अशोका गार्डन इलाके में एक ऐसे रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जहां आम आदमी की मजबूरी को भुनाया जा रहा है और चूल्हा सुधारने वाली दुकानों से खुलेआम दोगुने दामों पर सिलेंडर बेचकर अवैध रीफिलिंग का खेल खेला जा रहा है. जो न सिर्फ खतरनाक है बल्कि आम लोगों के साथ लूट भी है.
ईरान-इजरायल संघर्ष का बहाना और ब्लैक मार्केटिंग
पिछले कुछ दिनों से मध्य प्रदेश में गैस सप्लाई को लेकर परेशानी बनी हुई है. ईरान-इजरायल संघर्ष के चलते कमर्शियल LPG सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित होने की खबरें आई हैं, जिसने होटल और कैटरिंग कारोबार की कमर तोड़ दी है. इसी किल्लत को अवसर बनाकर कुछ लोग अवैध कमाई में जुट गए हैं. NDTV की टीम जब अशोका गार्डन के 80 फीट रोड स्थित चूल्हा मरम्मत की दुकानों पर पहुंची, तो वहां का नजारा हैरान करने वाला था. एक दुकानदार ने बिना किसी डर के कहा, "इंडेन नहीं है, भारत गैस मिल जाएगी लेकिन 1500 रुपये लगेंगे. एजेंसी में स्टॉक नहीं है, युद्ध चल रहा है भाई... ये तो ब्लैक मार्केट है, पहले एजेंसी देख लो न मिले तो मेरा नंबर ले जाना."
मौत से खिलवाड़: छोटी दुकानों में अवैध रीफिलिंग
स्टिंग के दौरान यह भी सामने आया कि इन दुकानों पर न सिर्फ महंगे सिलेंडर बेचे जा रहे हैं, बल्कि छोटे घरेलू सिलेंडरों में अवैध रूप से गैस भरी जा रही है. दुकानदार ने टीम से पूछा, "कहां रहते हो? लगता है तुम्हें जानता हूं... छोटा सिलेंडर भरवा दूंगा, 120 रुपये लगेंगे." यह प्रक्रिया न केवल गैरकानूनी है, बल्कि घनी आबादी वाले इलाकों में किसी बड़े हादसे को दावत देने जैसी है. एक अन्य दुकान पर तो फोन की घंटी बजना बंद नहीं हो रही थी. वहां दुकानदार ने सिलेंडर की कीमत 1300 रुपये बताई और मोलभाव करने पर साफ कह दिया कि "बाजार में गैस नहीं है, सस्ती चाहिए तो आगे ढूंढ लो."
शादी सीजन पर संकट और कमर्शियल सप्लाई ठप
LPG डिस्ट्रीब्यूशन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीएस शर्मा ने इस संकट की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि 9 मार्च से उत्पादन और डिस्पैच प्रभावित होने के कारण कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई पूरी तरह रुक गई है. इसका सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग व्यवसाय पर पड़ा है. आलम यह है कि शादियों के सीजन में कैटरिंग के ऑर्डर तक रद्द करने की नौबत आ गई है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब घरेलू गैस बुकिंग के नियम भी सख्त कर दिए गए हैं. अब अगली बुकिंग के लिए कम से कम 25 दिन का अंतर अनिवार्य कर दिया गया है.
सरकार की निगरानी और प्रशासन का दावा
हालात को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और MSME मंत्री चैतन्य कश्यप की एक कैबिनेट समिति बनाई है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनता से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, प्रदेश में ईंधन की सप्लाई पर्याप्त है. वहीं, भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने गैस वितरकों के साथ बैठक कर कालाबाजारी रोकने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति में केवल हॉस्पिटल और शैक्षणिक संस्थानों जैसी अत्यावश्यक सेवाओं को ही छूट दी गई है.
दावे और हकीकत के बीच पिसती जनता
प्रशासन भले ही नियंत्रण के दावे कर रहा हो, लेकिन NDTV का स्टिंग एक अलग ही हकीकत बयां करता है. एक तरफ आम आदमी गैस एजेंसियों के बाहर पसीने में तरबतर होकर कतारों में खड़ा है, वहीं दूसरी तरफ शहर की तंग गलियों में मजबूरी का फायदा उठाकर सिलेंडरों की सट्टेबाजी चल रही है. सरकारी तंत्र और कालाबाजारियों के बीच की यह जंग फिलहाल आम आदमी की जेब और रसोई पर भारी पड़ रही है.
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