विज्ञापन

नहाते समय पहले पानी कहां डालना चाहिए? 9 साल की बच्ची के सवाल ने मां को भी कर दिया कन्फ्यूज

नहाने की सही शुरुआत क्या है? सिर पर पहले पानी डालना सुरक्षित है या नहीं, क्या इससे हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा होता है? जानें साइंस और एक्सपर्ट्स की राय-

नहाते समय पहले पानी कहां डालना चाहिए? 9 साल की बच्ची के सवाल ने मां को भी कर दिया कन्फ्यूज
नहाते समय पानी कहां डालना चाहिए? सिर पर पहले डालना सही या खतरनाक | Bathing Tips
Ndtv
"मेरी 9 साल की बेटी लावण्या ने जब पूछा मम्मा, नहाते समय सबसे पहले पानी कहां डालना चाहिए?' तो मैं कुछ सेकंड के लिए चुप रह गई. सवाल छोटा था, लेकिन जवाब इतना आसान नहीं."

मेरी 9 साल की बेटी लावण्या बहुत चंचल है. अक्सर ऐसे सवाल पूछ लेती है जिनके जवाब तलाशने में मेरे सिर में खुजली हो जाती है. पर हां, एक बात माननी पड़ेगी - इस चक्कर में कई बार मैं ऐसे टॉपिक्स पर भी डीप रिसर्च कर लेती हूं, जिन पर आज तक सिर्फ सुनी-सुनाई बातों को फॉलो करती आई हूं.

हाल ही में जब मैंने बाल्टी से नहाने के लिए कहा तो पहला सवाल आया - बाल्टी क्यों, शावर क्यों नहीं? 

बाल्टी vs शावर: क्या सच में शॉवर से ज्यादा पानी खर्च होता है?

तब मैंने उसे कुछ स्टडी और डेटा का हवाला देते हुए बताया था कि शावर से पानी ज्यादा वेस्ट होता है. इसलिए हमें पानी बचाने के लिए शावर की बजाय बाल्टी से नहाना चाहिए. अब जैसा कि लावण्या की आदत है, उन्हें सबूत चाहिए. तो मैंने उन्हें जगुआर की वेबसाइट पर दी गई जानकारी का संदर्भ दिया, जहां यह लिखा गया है:

'आपके नहाने की अवधि का आपके पानी के बिल पर सीधा असर पड़ता है. ज्यादा देर तक नहाने में ज्यादा पानी खर्च होता है, जिसका मतलब है कि खर्च भी ज्यादा होगा. औसतन, 10 मिनट तक नहाने में लगभग 25 गैलन पानी खर्च होता है. अगर आप 15 मिनट तक नहाते हैं, तो यह मात्रा काफी बढ़ जाती है. नहाने का समय बस कुछ मिनट कम करने से ही आपके पानी के बिल में काफी बचत हो सकती है.'

इसके अलावा NPR के एक सर्वे के अनुसार भारत में तकरीबन 2 बिलियन लोग रोजाना नहाने के लिए बाल्टी और मग का इस्तेमाल करते हैं.

लेखकों के लिए सुझाव: अगर आप फिर भी शावर ही लेना चाहते हैं, तो शावर का समय थोड़ा कम रखें. टाइमर लगाना या पानी बचाने वाला शावर टाइमर इस्तेमाल करना आपको इस बात का ध्यान रखने में मदद कर सकता है कि आप कितनी देर तक नहा रहे हैं.

बहरहाल, इतनी बातों के बाद मैडम बाल्टी से नहाने को तैयार तो हुईं. लेकिन पानी हाथ में लेकर पहला सवाल ये पूछ बैठीं - 

नहाते समय सबसे पहले पानी कहां डालना चाहिए?

अब, मेरे लिए ये गंभीर सवाल था. इसलिए नहीं कि पूरे जीवन में कभी मेरे मन में यह सवाल नहीं आया, बल्कि इसलिए कि मुझे इसका जवाब बिना किसी तर्क के दिया गया था. और मैं कोशिश करती हूं कि हर बात को अपने बच्चों तक तार्किक तरीके से ही पहुंचाऊं.

अब शुरू हुआ रिसर्च का सिलसिला. गूगल ने बहुत कुछ बताया - नहाना हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है. अब NPR के जिस सर्वे की हम बात कर रहे थे, अगर उसे देखें तो 2 बिलियन लोग रोज भारत में बाल्टी और मग्गे से नहाते हैं. और लावण्या के इस सवाल का लोग अनजाने में अलग-अलग जवाब देते हैं.

बहरहाल, मसला यहां मेरे जवाब का था कि इस चक्रव्यूह को मैं कैसे तोड़ूं.

जब तर्कसंगत जवाब की तलाश शुरू की तो सबसे पहले ईशा फाउंडेशन के संस्थापक और आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव का एक वीडियो और उनकी वेबसाइट का एक पेज सामने आया. इसमें वे बता रहे हैं कि नहाने की शुरुआत शरीर के किस हिस्से से की जानी चाहिए.

सद्गुरु का कहना है कि नहाने का यह छोटा-सा तरीका भी शरीर के अनुभव पर असर डाल सकता है. सद्गुरु के नाम से प्रसिद्ध जग्गी वासुदेव का कहना है कि अचानक शरीर पर ठंडा पानी डालने से पूरी शरीर की गर्मी सिर पर पहुंच जाती है, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए.

नदी में डुबकी लगाना

ईशा के इस लेख में बताया गया कि यौगिक कल्चर में नहाने का अर्थ ही नदी में डुबकी लगाने से होता है. इस तरीके में पूरा सिर पानी में डूबता है. लेकिन आजकल घरों के बाथरूम में नहाने का चलन है. कई लोग, खासकर महिलाएं, रोज सिर पर पानी डालकर बाल गीले करने से बचती हैं.

ऐसे में सद्गुरु जग्गी वासुदेव की सलाह है कि लोग सिर भले ही पूरा गीला न करें, लेकिन सिर के बीच के हिस्से पर जरा सा पानी डालकर उसे ठंडा जरूर करना चाहिए. इससे एक ठंडक सी महसूस होती है, इसके बाद आप शरीर पर पानी डाल सकते हैं.

लेकिन...

मैं ठहरी मिलेनियल. मैं सद्गुरु के इस वीडियो से संतुष्ट हो गई और लगा कि बच्चे के लिए ये जवाब काफी है. मैंने उसे ब्रीफ कर दिया और कहा:

''बेटा, नहाते समय सबसे पहले सिर पर डालना चाहिए.''

''लेकिन इससे तो हार्ट अटैक हो सकता है... लावण्या का नया वार...''

मैं यह भूल गई थी कि जिन मोहतरमा को मैं ये जवाब दे रही हूं वे टेक्नोलॉजी वाले बच्चे हैं. जो मैंने 10वीं कक्षा में भी नहीं पढ़ा था, वह ये चौथी में ही घोल कर पी चुकी हैं. मैडम का अगला वार हुआ और बोलीं:

"Why Do Strokes Often Happen in the Bathroom? Does Pouring Water on Your Head First Really Cause Heart Attacks?" ... क्यों मम्मा, बोलो-बोलो.

लावण्‍या मैडम का सवाल

उफ्फ... एक बार तो लगा कि काश इसे कह दिया होता - शावर ही ले लो. लेकिन मैं भी ज्यादा ही अलग लेवल की पैरेंटिंग के चक्कर में अपनी ही क्लास लगवा लेती हूं. अब और दो सवालों के जवाब देने थे. ऐसा लग रहा था पानी की बाल्टी तालाब है, और सवाल यक्ष से युधिष्ठिर जी पूछ रहे हैं कि जवाब देंगे तभी मैं पानी को छूऊंगा, अन्यथा नहीं...

हम्म... तो जवाब है, तलाशा गया.

ज्यादातर स्ट्रोक नहाते हुए क्यों आते हैं और सिर पर पहले पानी डालने से हार्ट अटैक हो सकता है क्या?

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में एक रिसर्च छपी. इसमें 1939 मरीजों में से 78 को नहाते समय स्ट्रोक आया था, जिसने इस दावे पर सवाल उठाए.

तो क्या नहाते हुए सबसे पहले सिर पर पानी डालने से हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट हो सकते हैं? ये खबरें सही हैं कि स्ट्रोक और हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट के मामले अक्सर नहाते हुए या इस दौरान देखे गए हैं. लेकिन इसमें कहीं भी यह स्पष्ट नहीं है कि यह सिर पर पानी डालने से ही हुआ. असल में यह बहुत ज्यादा ठंडा पानी अचानक से इस्तेमाल करने से बदली दिल की धड़कन के कारण हुआ.

अचानक ठंडे पानी से शरीर में cold shock हो सकता है. नसें सिकुड़ भी सकती हैं और चक्कर आ सकते हैं. लेकिन सिर पर पहले पानी डालने से स्ट्रोक होगा - इसका कोई सीधा सबूत नहीं मिला है.

यह काफी हद तक आपकी उम्र, ओवरऑल सेहत और पानी व शरीर के तापमान पर निर्भर करता है. हेमोरेजिक स्ट्रोक में नहाने का ज्यादा अनुपात यह संकेत दे सकता है कि कमजोर लोगों के लिए नहाते समय हेमोरेजिक स्ट्रोक का थोड़ा जोखिम हो सकता है. इस रेट्रोस्पेक्टिव स्टडी ने नहाने और स्ट्रोक के बीच कोई कारण-कार्य संबंध स्थापित नहीं किया, न ही जोखिम कारकों की पहचान की. इसका मतलब है कि भविष्य में और प्रॉस्पेक्टिव स्टडीज की जरूरत है. यह निष्कर्ष कि नहाने से जुड़े ज्यादातर स्ट्रोक के मरीज बाथटब के बाहर ही बेहोश पाए गए, यह बताता है कि बाथटब में डूबने की दुर्घटनाओं में स्ट्रोक की भूमिका शायद कम ही होती है.

तो क्या नहाते समय सबसे पहले सिर पर पानी डालना चाहिए?

कुल मिलाकर अब तक मैं काफी कुछ पढ़ चुकी थी और अपने नहाने को और 20 मिनट टालने में लावण्या सफल हो गई थी. जैसे ही मेरी नजर घड़ी पर पड़ी, मैं दौड़ दी दफ्तर के लिए, उसे यह कहते हुए कि सावधानी के साथ और पानी के साथ सहज होते हुए आराम-आराम से कहीं पर भी पानी डाल सकती हो. बस अचानक से बहुत ज्यादा ठंडा पानी कहीं नहीं डालना.

क्योंकि कभी-कभी बच्चों के सवाल सिर्फ जिज्ञासा नहीं होते… वो हमारी आदतों की सच्चाई भी सामने ला देते हैं, तो द‍िन की यह शुरुआत भी यादगार रही.

एक लाइन में इस सवाल का जवाब है -  कोई सख्त नियम नहीं है, लेकिन एक्सपर्ट्स अचानक ठंडा पानी डालने से बचने की सलाह देते हैं.

संदर्भ सूची

https://www.npr.org/sections/goatsandsoda/2014/07/25/335250270/our-india-correspondent-cant-kick-the-bucket-bathing-habit

https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/28341200/

pubmed.ncbi.nlm.nih.gov

https://isha.sadhguru.org/en/wisdom/video/are-you-showering-right-way

https://www.medicalnewstoday.com/articles/why-do-cardiac-arrests-happen-in-the-bathroom

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com