
एक शोध में यह पता चला है कि बच्चों में विचार करने और वयस्कों की तरह नैतिक फैसले लेने की क्षमता होती है। शोध में यह भी कहा गया है कि उनकी इस क्षमता को हरदम कम करके आंका गया है। शोध के निष्कर्ष में कहा गया है कि जब वयस्क नैतिक फैसले लेते हैं तो अपने कार्रवाई के नतीजों के बजाय लोगों के इरादों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। किसी को जानबूझकर चोट पहुंचाना, किसी को गलती से चोट पहुंचने से ज्यादा बदतर है।
ब्रिटेन के ईस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय में वरिष्ठ प्रवक्ता जेविन नोब्स ने कहा, "ज्यादातर वयस्कों के लिए यदि कोई जान-बूझकर बुरा करता है तो यह गलती से किए गए काम से ज्यादा बुरा होता है।"
अध्ययन में कहा गया कि विकासात्मक मनोविज्ञान में यह प्रचलित राय है कि छोटे बच्चों में नैतिक फैसले लोगों के इरादे के बजाय, मुख्य रूप से कार्रवाई के परिणाम पर निर्भर रहते हैं।
नोब्स ने कहा, "लेकिन, अध्ययन से पता चलता है कि बच्चे अपनी सोच में वयस्कों की तरह होते है। इससे पता चलता है कि छोटे बच्चे (करीब चार साल के) वयस्कों की तरह इरादा आधारित नैतिक फैसले ले सकते हैं। "
शोधकर्ताओं ने कहा कि यदि वयस्क व्यक्ति से निर्णय लेने में गलती हो सकती है, तो पांच साल के बच्चे से भी हो सकती है।
यह अध्ययन पत्रिका 'जर्नल कॉगनिशन' में प्रकाशित हुआ है। इसमें 138 बच्चे, जिनकी उम्र 4 से 8 साल रही और 31 वयस्कों पर अध्ययन किया गया। इन्हें कहानी सुनाकर इस पर आधारित सकारात्मक और नकारात्मक इरादों के बारे में पूछा गया।
ब्रिटेन के ईस्ट एंग्लिया विश्वविद्यालय में वरिष्ठ प्रवक्ता जेविन नोब्स ने कहा, "ज्यादातर वयस्कों के लिए यदि कोई जान-बूझकर बुरा करता है तो यह गलती से किए गए काम से ज्यादा बुरा होता है।"
अध्ययन में कहा गया कि विकासात्मक मनोविज्ञान में यह प्रचलित राय है कि छोटे बच्चों में नैतिक फैसले लोगों के इरादे के बजाय, मुख्य रूप से कार्रवाई के परिणाम पर निर्भर रहते हैं।
नोब्स ने कहा, "लेकिन, अध्ययन से पता चलता है कि बच्चे अपनी सोच में वयस्कों की तरह होते है। इससे पता चलता है कि छोटे बच्चे (करीब चार साल के) वयस्कों की तरह इरादा आधारित नैतिक फैसले ले सकते हैं। "
शोधकर्ताओं ने कहा कि यदि वयस्क व्यक्ति से निर्णय लेने में गलती हो सकती है, तो पांच साल के बच्चे से भी हो सकती है।
यह अध्ययन पत्रिका 'जर्नल कॉगनिशन' में प्रकाशित हुआ है। इसमें 138 बच्चे, जिनकी उम्र 4 से 8 साल रही और 31 वयस्कों पर अध्ययन किया गया। इन्हें कहानी सुनाकर इस पर आधारित सकारात्मक और नकारात्मक इरादों के बारे में पूछा गया।