क्रिकेट हो या कोई और खेल, आखिर में क्यों मिलाया जाता है हाथ? जानें कैसे शुरू हुई ये परंपरा

खेलों में मैच के बाद खिलाड़ी हाथ क्यों मिलाते हैं? जानिए हाथ मिलाने की परंपरा का इतिहास, इसकी शुरुआत और खेल भावना से इसका संबंध.

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खेलों में हाथ मिलाना भी उसी पुरानी परंपरा से जुड़ा है. स्पोर्ट्स में यह सम्मान और अच्छे व्यवहार को दिखाने का जरिया बना.

Asia cup match 2025 handshake issue : एशिया कप 2025 के भारत-पाकिस्तान मैच के बाद भारतीय खिलाड़ियों ने दूसरी टीम के खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाया. जिसे लेकर कई तरह के रिएक्शन देखने को मिल रहे हैं. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने तीखी प्रतिक्रिया दी और आईसीसी में शिकायत भी दर्ज करा दी. इसी बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि खेल के बाद आखिर खिलाड़ियों को हाथ क्यों मिलाना जरूरी माना जाता है और इसकी शुरुआत कैसे हुई.

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हाथ मिलाने की शुरुआत कहां से हुई?

क्रिकेट हो या कोई दूसरा खेल, मैच खत्म होते ही खिलाड़ी एक-दूसरे से हाथ मिलाते नजर आते हैं, या फिर हॉकी में स्टिक्स हिलाकर सलाम करते हैं. यह नजारा तो हम सब देखते हैं, लेकिन क्या कभी सोचा कि यह परंपरा आखिर शुरू कैसे हुई?

असल में, खेल के मैदान पर हाथ मिलाना सिर्फ एक रिवाज नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आदत का हिस्सा है, जो शांति और सम्मान दिखाने के लिए बनी. प्राचीन काल में लोग दाहिना हाथ बढ़ाकर यह जताते थे कि उनके पास कोई हथियार नहीं है, ताकि सामने वाला उन पर भरोसा कर सके. 9वीं सदी के कुछ चित्रों में भी लोगों को हाथ मिलाते देखा जा सकता है. इससे साबित होता है कि मित्रता या सौहार्द दिखाने के लिए हाथ मिलाने की परंपरा हजारों साल पुरानी है.

खेलों में कब आया ये रिवाज?

खेलों में हाथ मिलाना भी उसी पुरानी परंपरा से जुड़ा है. स्पोर्ट्स में यह सम्मान और अच्छे व्यवहार को दिखाने का जरिया बना.

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हॉकी: NHL (National Hockey League) में "हैंडशेक लाइन" की शुरुआत 1908 से मानी जाती है, जब मैच के बाद खिलाड़ी लाइन बनाकर हाथ मिलाने लगे.

टेनिस: पोस्ट-मैच हैंडशेक 20वीं सदी से आम हो गया, जो अच्छे व्यवहार और खेल भावना का हिस्सा है.

क्रिकेट: मैच खत्म होते ही दोनों टीमें हाथ मिलाती हैं, जो सम्मान और अच्छे खेल की सराहना का तरीका है.

फुटबॉल और बेसबॉल: यहां कोच और प्लेयर्स मैच के बाद हाथ मिलाते हैं. 1980 के दशक से हाई-फाइव का चलन बढ़ा, लेकिन हैंडशेक अब भी कायम है.

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आज क्यों जारी है यह परंपरा?

आज भी हाथ मिलाना खेल के मैदान पर दुश्मनी खत्म करने और एक-दूसरे की तारीफ करने का सबसे सरल तरीका है. कुछ खेलों में यह थंब-ग्रिप या आर्म-रेसल स्टाइल में भी किया जाने लगा है, लेकिन इसकी बुनियादी सोच वही है- खेल को खेल भावना से जोड़े रखना.

हालांकि, भारत-पाकिस्तान अभी जिस राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति से गुजर रहे हैं, उसमें भारतीय टीम ने हाथ न मिलाकर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के प्रति अपना मौन विरोध दर्ज कराया है.

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