दिल्ली में आयोजित हुए इंडिया एआई समिट में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कपड़े उतारकर प्रदर्शन किया, अब इस मामले में लगातार गिरफ्तारियां हो रही हैं. दिल्ली पुलिस तमाम राज्यों से कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर रही है. इसी बीच जब दिल्ली पुलिस की एक टीम कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के लिए हिमाचल प्रदेश पहुंची तो वहां की पुलिस ने उसे रोक लिया. इस दौरान हिमाचल प्रदेश पुलिस बार-बार ट्रांजिट रिमांड की बात कर रही थी. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि ये ट्रांजिट रिमांड क्या होती है और इसे लेना क्यों जरूरी है.
दिल्ली पुलिस पर किडनैपिंग का केस
हिमाचल प्रदेश पुलिस की तरफ से दिल्ली पुलिस की टीम के खिलाफ किडनैपिंग का केस दर्ज किया गया है. वीडियो में भी पुलिस अधिकारी को ये कहते सुना जा सकता है कि आपके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है. कई घंटे तक ये हाई वोल्टेज ड्रामा चलता रहा और आखिरकार दिल्ली पुलिस को ट्रांजिट रिमांड मिल गई. फिलहाल दिल्ली पुलिस सभी आरोपियों को अपने साथ लेकर वापस लौट चुकी है.
क्या होती है ट्रांजिट रिमांड?
हर अपराध की पहले थाने में शिकायत या एफआईआर दर्ज की जाती है. कुछ मामलों में जब अपराधी दूसरे राज्यों में होते हैं और उन्हें लाने में कई घंटे लग सकते हैं, ऐसे में अपराधी को उसी क्षेत्र के मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होता है. मजिस्ट्रेट की इजाजत के बाद अपराधी को लेकर जाने के लिए ट्रांजिट रिमांड मिलती है. जैसा कि अगर कोई अपराधी कश्मीर में मौजूद है और उसके खिलाफ मामला दिल्ली में दर्ज हुआ है तो ऐसे में ट्रांजिट रिमांड की जरूरत होती है. कश्मीर से गिरफ्तारी के बाद अपराधी को वहीं मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया जाएगा और ट्रांजिट रिमांड मांगी जाएगी. ये सब इसलिए होता है, क्योंकि किसी भी अपराधी को गिरफ्तारी के 24 घंटे के अंदर कोर्ट में पेश किया जाना जरूरी होता है.
दिल्ली पुलिस को 24 घंटे से पहले क्यों रोका?
दिल्ली पुलिस और हिमाचल प्रदेश पुलिस के बीच बहस का जो वीडियो सामने आया है, उसमें दिल्ली पुलिस के अधिकारी को कहते सुना जा सकते है कि अभी 24 घंटे नहीं हुए हैं और हम आरोपियों को कोर्ट में पेश कर सकते हैं. हालांकि इसके बावजूद हिमाचल प्रदेश पुलिस ने दिल्ली पुलिस की टीम को रोककर रखा. इसके पीछे उनका ये तर्क था कि पहले ही दिल्ली पुलिस के खिलाफ किडनैपिंग का मामला दर्ज है, ऐसे में उन्हें जाने नहीं दिया जा सकता है.
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