पश्चिम बंगाल में हो रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा आदेश जारी किया है. सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के दौरान दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए ओडिशा और झारखंड के न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की जाए. पश्चिम बंगाल में जजों की कमी के चलते ये फैसला लिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को जारी करने के लिए एक बार फिर अपनी स्पेशल पावर का इस्तेमाल किया, जिसे आर्टिकल 142 कहते हैं. आइए जानते हैं कि आर्टिकल 142 क्या है और किन मामलों में सु्प्रीम कोर्ट इसका इस्तेमाल करता है.
चुनाव आयोग को निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश जारी किया है कि 28 फरवरी तक तय किए गए दावों के साथ अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाए, जिसके बाद सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी होगी. पड़ोसी राज्यों के जजों की मदद लेने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर जरूरत पड़ती है, तो ओडिशा और झारखंड के न्यायिक अधिकारियों को पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से संबंधित दावों और आपत्तियों को तय करने के लिए लगाया जा सकता है. कोर्ट ने डिस्ट्रिक्ट जजों के अलावा कम से कम 3 साल का अनुभव रखने वाले सीनियर और जूनियर डिवीजन के सिविल जजों को भी इस काम में शामिल करने की इजाजत दी है.
क्या है आर्टिकल 142?
सुप्रीम कोर्ट को भारतीय संविधान में एक खास ताकत दी गई है, जिसमें जरूरत पड़ने पर सर्वोच्च अदालत पूर्ण न्याय कर सके. इस स्पेशल पावर का इस्तेमाल कर सुप्रीम कोर्ट खुद से कोई भी फैसला सुना सकता है. जिन मामलों में सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि न्याय पूरा नहीं हुआ है या फिर कुछ गलत हो रहा है तो उनमें आर्टिकल 142 का इस्तेमाल कर आदेश जारी किया जाता है.
हाल ही में मध्य प्रदेश के छात्र अथर्व चतुर्वेदी के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने यही किया था. सुप्रीम कोर्ट ने EWS कैटेगरी में छात्र को मेडिकल सीट देने का आदेश दिया था. इससे पहले चंडीगढ़ मेयर चुनाव और बुलडोजर एक्शन पर भी सुप्रीम कोर्ट ने अपनी इस ताकत का इस्तेमाल कर आदेश दिया था.














