POCSO Act provisions : तमिलनाडु के थूथुकुडी से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने कानून की ताकत और पुलिस की मुस्तैदी की नई मिसाल पेश की है. यहां की एक विशेष पोक्सो (POCSO) अदालत ने विलाथिकुलम की 17 वर्षीय नाबालिग लड़की से बलात्कार और उसकी बेरहमी से हत्या करने के मामले में 38 वर्षीय दोषी धर्ममुनीस्वरन उर्फ मावीरन को 'डबल डेथ सेंटेंस' यानी दोहरी मौत की सजा सुनाई है. यह मामला मीडिया में आने के ूबाद हर आम इंसान के मन में एक ही सवाल उठ रहा है आखिर डबल डेथ सेंटेंस होती क्या है? क्या दोषी को दो बार फांसी दी जा सकती है? आइए जानते हैं इसका क्या है मतलब और ऐसी सजा कब मुकर्रर की जाती है.
क्या होती है 'डबल डेथ सेंटेंस'? What is a 'Double Death Sentence'कानूनी बारीकियों के अनुसार, जब कोई अपराधी एक ही घटना में दो अलग-अलग ऐसे जघन्य अपराध करता है, जिनमें से दोनों के लिए कानून में अलग से मौत की सजा का प्रावधान हो, तो अदालत उसे 'डबल डेथ सेंटेंस' सुनाती है.
इस मामले में, दोषी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और पोक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत मुकदमा चला. उसने दो भयानक अपराध किए:
पहला, नाबालिग से बलात्कार जिसके लिए मौत की सजा का प्रावधान है
दूसरा, बलात्कार के बाद उसकी हत्या इसके लिए भी मौत की सजा का प्रावधान है
हालांकि इंसान की जिंदगी एक ही होती है, इसलिए प्रैक्टिकली तो दोषी को फांसी की सजा एक ही बार दी जाएगी. लेकिन कानूनी तौर पर दोनों संगीन अपराधों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने दोनों धाराओं में अलग-अलग मौत की सजा मुकर्रर की है. जो समाज को एक कड़ा संदेश देता है कि ऐसे जघन्य कृत्य के लिए कानून में रत्ती भर भी रहम नहीं है.
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