'कोर्ट में ही लेंगे परीक्षा', बेतुकी याचिकाओं पर पहले भी खफा हो चुका सुप्रीम कोर्ट; पांच कहानियां

पिछले कुछ सालों में सुप्रीम कोर्ट ने अस्पष्ट और फालतू PIL के बढ़ते ट्रेंड पर सख्ती दिखाई है. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत पिछले कुछ दिनों में कम से कम 7 ऐसी PIL की आलोचना की है. जो कि एकदम फालूत थी. साथ ही उन पर भारी जुर्माना लगाने की धमकी भी दी थी.

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सुप्रीम कोर्ट ने कई बार पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) यानी जनहित याचिका के गलत इस्तेमाल के खिलाफ चेतावनी दी है. कोर्ट ने हाल ही में कई पिटीशन पर गहरी चिंता जताते हुए उन्हें 'फालतू पिटीशन भी करार दिया है. कोर्ट ने पाया की कई जनहित याचिकाओं को बिना रिसर्च या कानूनी आधार के फाइल किया जाता है. कोर्ट ने इन जनहित याचिका को पब्लिक मामलों को सुलझाने के बजाय मीडिया का ध्यान खींचना से जुड़ा हुआ पाया. पिछले कुछ सालों में सुप्रीम कोर्ट ने अस्पष्ट और फालतू PIL के बढ़ते ट्रेंड पर सख्ती दिखते हुए ऐसे पिटीशनर पर जुर्माना भी लगाया है.

पिछले दिनों चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने कम से कम 7 ऐसी PIL की आलोचना की थी. साथ ही उन पर भारी जुर्माना लगाने की धमकी भी दी थी. कुछ ऐसी की जनहित याचिका के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं. जिनको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर नाराजगी दिखाई थी.

"लुधियाना में स्वेटर बेचने वापस जाएं"

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए पाए कि जनहित याचिका एक होजरी व्यापारी ने दायर की थी. जो कि 12वीं तक पढ़ा था. ये याचिका PM CARES फंड से जुड़ी हुई थी. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने जब उससे पूछा कि उसने मुश्किल कानूनी शब्दों से भरी पिटीशन कैसे तैयार की. तो पिटीशनर ने माना कि उसने पहले कभी कोई केस फाइल नहीं किया था. दास नाम के एक टाइपिस्ट से ड्राफ्ट टाइप करवाया था. लेकिन बाद में AI टूल्स का इस्तेमाल करके इसे तैयार और मॉडिफाई किया. क्योंकि वह वकील का खर्च नहीं उठा सकता था. 

इस दौरन CJI ने काफी गुस्सा जाहिर किया और याचिकाकर्ता से कहा, "मैं आपका एक इंग्लिश का एग्जाम करवाऊंगा यहां, अगर आपके उसमें 30% भी आया तो मैं मान लूंगा कि पिटीशन आपने बनाई है." CJI ने उसे डांटा कि वह ईमानदारी से बताए कि पिटीशन किसने बनाई

बेंच ने उसे दोबारा ऐसी पिटीशन फाइल करने के खिलाफ चेतावनी दी और अपने बिजनेस पर लौटने की सलाह दी. चीफ जस्टिस ने व्यापारी से कहा कि  "जाओ लुधियाना में 2-3 और स्वेटर बेचो." 

"तुम्हारा लाइसेंस सस्पेंड कर देंगे"

"PIL के काम में आने से पहले, कड़ी मेहनत करें और जूनियर की तरह प्रैक्टिस करें" एक बिहार के युवा वकील की PIL फाइल करने को लेकर  CJI सूर्यकांत ने ये टिप्पणी की थी. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने युवा वकील से उसके अनुभव के बारे में पूछा था. तो वकील ने कोर्ट को बताया कि उसने नवंबर 2025 में प्रैक्टिस शुरू की थी.  बेंच ने तुरंत इस बात पर चिंता जताई कि कम अनुभव वाले वकील कानूनी प्रैक्टिस की बेसिक बातें सीखे बिना ही PIL फाइल करने की जल्दबाजी करते हैं. CJI ने वकील से कहा कि कानून के शुरुआती साल ड्राफ्टिंग, रिसर्च और कोर्टरूम डिसिप्लिन सीखने के लिए होते हैं, न कि सीधे PIL लिटिगेशन में कूदने के लिए.

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उन्होंने यह भी पूछा कि अगर बिना पूरी तैयारी के ऐसी पिटीशन फाइल की जाती रहीं तो कोर्ट को वकील का लाइसेंस सस्पेंड क्यों नहीं कर देना चाहिए. इस दौरान CJI ने वकील से पूछा की वो कहां से है. जब वकील ने जवाब दिया कि बिहार से है, तो चीफ जस्टिस ने कहा कि यह संघर्ष और कड़ी मेहनत के लिए जाना जाने वाला राज्य है. PIL के साथ कोर्ट जाने से पहले अपनी कानूनी स्किल्स को बेहतर बनाएं.

आधी रात को ड्राफ्ट करते हो क्या PIL?

सुप्रीम कोर्ट ने एक वकील सचिन गुप्ता को फटकार लगाई थी, जिसने एक पिटीशन दायर की थी जिसमें प्याज और लहसुन में तामसिक या नेगेटिव एनर्जी होती है या नहीं, इस पर रिसर्च करने का निर्देश देने की मांग की गई थी. पिटीशन को बेकार बताते हुए, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने वकील को, जो पार्टी-इन-पर्सन के तौर पर पेश हुए था, ऐसी PIL दायर करने के लिए फटकार लगाई. एडवोकेट सचिन गुप्ता ने कोर्ट से एक कमेटी बनाने की मांग की थी. जो इसपर रिसर्च करे कि गुजरात में प्याज की वजह से तलाक क्यों होते हैं. CJI ने पूछा, "आधी रात को यह सब पिटीशन ड्राफ्ट करते हो क्या... उन्होंने पूछा कि आप जैन समुदाय की भावनाओं को ठेस क्यों पहुंचाना चाहते हैं?" एडवोकेट, जो खुद पिटीशनर था उसने कोर्ट को बताया कि क्योंकि यह मुद्दा बहुत आम है, गुजरात HC में हाल ही में खाने में प्याज की वजह से तलाक हो गया था.  इस पिटीशन के अलावा, वकील सचिन गुप्ता ने दो और PIL भी फाइल की थीं. कोर्ट ने इन दोनों PIL पर भी सुनवाई करने से मना कर दिया था.

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"अपने विक्रेता से अपनी आपूर्ति भरने के लिए कहें, हमसे नहीं!"

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अंग्रेजी दैनिक की पूरी कॉपी की आपूर्ति की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया था. जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने जी एस राठौर की जनहित याचिका (पीआईएल) को खारिज किया था. साथ ही पीठ ने कहा था, "टाइम्स ऑफ इंडिया के खिलाफ रिट कैसे हो सकती है? क्या टाइम्स ऑफ इंडिया एक राज्य है कि हम इसके खिलाफ रिट याचिका पर विचार कर सकते हैं?" याचिका खारिज करते हुए शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा कि उसे अपने अखबार विक्रेता से कहना होगा कि वह उसे दैनिक के सभी सप्लीमेंट उपलब्ध कराए.

"आपको ऐसी जनहित याचिका दायर करने के लिए कौन उकसा रहा है?"

सुप्रीम कोर्ट ने मई 2025 में एडवोकेट विशाल तिवारी की एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया, जिसमें जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले के मद्देनजर भारत के पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों के लिए बेहतर सुरक्षा उपायों की मांग की गई थी.  न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने याचिका के पीछे की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा था, "आपका उद्देश्य क्या है? आपका मकसद क्या है? इस तरह की जनहित याचिका दायर करने के लिए आपको कौन उकसा रहा है?" जस्टिस कांत ने इस दौरान कहा था, “क्या आपको कोई सेंसिटिविटी समझ नहीं आती? क्या आपको अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास नहीं है? जब तिवारी ने कोर्ट के सामने सफाई देने की कोशिश की, और कहा, “हम सरकार के खिलाफ कोई डायरेक्शन क्लेम नहीं कर रहे हैं.”तो  जस्टिस कांत ने पूछा, “प्लीज़ पढ़िए... आप किस बेसिस पर इस ग्राउंड को वेरिफाई कर रहे हैं?

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