Raghav Chadha Joins BJP: राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी छोड़ी, क्या दल बदल कानून के दायरे में आएंगे?

What Is Anti Defection Law: राघव चड्ढा ने बताया कि उनके साथ पार्टी के दो तिहाई सांसद भी बीजेपी में शामिल हो रहे हैं, ऐसे में उन्होंने ये संकेत दे दिया कि उनके खिलाफ दल बदल कानून के तहत एक्शन नहीं हो सकता है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
What Is Anti Defection Law: राघव चड्ढा पर क्यों लागू नहीं होगा एंटी डिफेक्शन लॉ

Raghav Chadha Anti Defection Law: आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने बीजेपी ज्वाइन कर ली है. उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि आम आदमी पार्टी अपने मूल सिद्धांत से भटक चुकी है, यही वजह है कि उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया है. इस दौरान राघव चड्ढा ने बार-बार एक बात पर जोर दिया कि उनके साथ पार्टी के दो तिहाई सांसद भी बीजेपी ज्वाइन कर रहे हैं. अब भले ही आपको ये दो तिहाई वाला आंकड़ा सामान्य लग रहा हो, लेकिन इसके पीछे की वजह एंटी डिफेक्शन लॉ यानी दल बदल कानून का नियम शामिल है. आइए जानते हैं कि पार्टी छोड़ने पर दल बदल कानून क्या कहता है. 

क्या है दल बदल कानून?

जब देश में जनादेश की अनदेखी होने लगी और कई नेता रोज पार्टी बदलने लगे तो इसे लेकर एक कानून की जरूरत महसूस हुई. इसे दल बदल कानून या फिर एंटी डिफेक्शन लॉ के नाम से जाना जाता है. साल 1985 में, राजीव गांधी सरकार संविधान में संशोधन करने और दलबदल पर रोक लगाने के लिए एक विधेयक लाई थी, जिसके बाद 1 मार्च 1985 को ये कानून लागू हुआ. 

क्या कहता है दल बदल कानून?

  • अगर कोई चुना हुआ विधायक या फिर सांसद किसी पार्टी को छोड़ देता है तो उसे अयोग्य करार दिया जा सकता है. 
  • कोई सदस्य अगर पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर वोट करता है तो भी वो इस कानून के तहत अयोग्य करार दिया जा सकता है. 
  • पार्टी की तरफ से व्हिप जारी होने के बावजूद अगर कोई सदस्य वोट नहीं करता है तो भी वो इस कानून की जद में आ सकता है. 

क्या है बचने का तरीका?

दल बदल कानून से बचने का तरीका भी है. अगर एक या दो विधायक या सांसद पार्टी छोड़ते हैं तो उनके खिलाफ एंटी डिफेक्शन लॉ के तहत कार्रवाई हो सकती है. हालांकि अगर पार्टी के कुल विधायकों या फिर सांसदों के दो तिहाई सदस्य एक साथ पार्टी छोड़ते हैं तो ये कानून लागू नहीं होता है. ऐसे में उन सभी सांसदों या विधायकों की सदस्यता बनी रहती है. इतना ही नहीं, ये दो तिहाई सांसद पार्टी  राघव चड्ढा ने भी इसी वजह से ये बार-बार बताया कि उनके साथ AAP के दो तिहाई सांसद मौजूद हैं. 

कब लागू नहीं होता है एंटी डिफेक्शन लॉ?

  • दो तिहाई सदस्यों का दूसरी पार्टी में शामिल होना या फिर अलग पार्टी बनाना
  • अगर कोई राजनीतिक पार्टी किसी दूसरी पार्टी में अपना विलय कर लेती है 
  • जो सदस्य पार्टी का विलय स्वीकार नहीं करते हैं और अलग होने का फैसला लेते हैं 
  • दल बदल को लेकर स्पीकर ही आखिरी फैसला सुनाते हैं, इसमें कोई दखल नहीं दे सकता है

ये भी पढ़ें - Raghav Chadha Education: पढ़ाई के मामले में कई नेताओं को मात देते हैं राघव चड्ढा, इस बड़ी यूनिवर्सिटी से ली है डिग्री

Advertisement
Featured Video Of The Day
हाथ से पेन नहीं पकड़ पाता, मुंह से लिखकर फैजान ने टॉप किया झारखंड 10वीं एग्जाम