Nuclear Test: पिछले कुछ सालों में दुनिया के कई बड़े देश जंग के मैदान में हैं. रूस और यूक्रेन युद्ध के बाद अब इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर हमला बोल दिया है. इस हमले के बाद ईरान ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और अमेरिका को नुकसान पहुंचाने की हर कोशिश की जा रही है. इसी बीच कुछ दिन पहले ईरान में भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिसके बाद परमाणु बम की चर्चा तेज हो गई. बताया जा रहा है कि ईरान के पास अब भी काफी मात्रा में यूरेनियम मौजूद है, ऐसे में कुछ लोग सोशल मीडिया पर भूकंप के झटकों को न्यूक्लियर टेस्ट से जोड़कर देखने लगे. आज हम आपको बताएंगे कि परमाणु टेस्ट के दौरान भूकंप जैसे झटके क्यों लगते हैं और ये असली भूकंप से कितना अलग होता है.
ईरान में हिली थी धरती
ईरान के गेराश (Gerash) इलाके में 4.3 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था, जिसकी गहराई लगभग 10 किलोमीटर थी. एक्सपर्ट्स ने बताया कि ये भूकंप नेचुरल था और जमीन के नीचे कोई न्यूक्लियर टेस्ट नहीं किया गया. जिस इलाके में भूकंप आया वह जाग्रोस फोल्ड एंड थ्रस्ट बेल्ट पर है, जहां अक्सर भूकंप आते रहते हैं. यही वजह है कि इसे एक सामान्य घटना माना जा रहा है. ईरान के अलावा अमेरिका के नेवाडा (Nevada) में भी कई भूकंप के झटके महसूस हुए, जिन्हें लेकर भी इसी तरह की अटकलें लगाई गईं.
असली भूकंप और न्यूक्लियर टेस्ट में अंतर
एक्सपर्ट्स के मुताबिक सिस्मिक सिग्नेचर से ही भूकंप और बाकी हलचल की पहचान की जाती है. नेचुरल भूकंप और न्यूक्लियर टेस्ट के सिस्मिक सिग्नेचर अलग-अलग होते हैं. आमतौर पर परमाणु टेस्ट में प्राइमरी वेव्स काफी मजबूत होती हैं और फिर ये कमजोर पड़ने लगती हैं. इसके अलावा भूकंप की 10 किमी की गहराई भी ये बात साफ करती है कि ईरान में आया भूकंप असली था. न्यूक्लियर टेस्ट के बाद आसपास के इलाके में रिक्टर स्केल पर 5 से ज्यादा तीव्रता दर्ज की जा सकती है, वहीं ईरान में आए भूकंप की तीव्रता 4 दर्ज की गई. हालांकि तीव्रता बम की शक्ति पर भी निर्भर करती है.
न्यूक्लियर टेस्ट के दौरान क्यों आता है भूकंप?
परमाणु टेस्ट से भूकंप कितना आएगा, ये उसकी ताकत पर निर्भर करता है. यानी जितने मेगाटन का बम होगा, झटका उतना ही बड़ा हो सकता है. इसके अलावा ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि परीक्षण कितनी गहराई में किया गया है. आमतौर पर ऐसे परीक्षण जमीन के अंदर कई फीट गहराई में होते हैं, जिससे रेडियोएक्टिव पदार्थ बाहर नहीं निकल पाते हैं और खतरा कम होता है. 5 मेगाटन का परीक्षण 6 से ज्यादा तीव्रता का भूकंप पैदा कर सकता है. वैज्ञानिक जमीन से निकलने वाली तरंगों से ये पता लगा लेते हैं कि भूकंप टेक्टोनिक प्लेट्स के टकराने से आया है या फिर किसी धमाके से... न्यूक्लियर टेस्ट के दौरान महसूस होने वाले झटके का असर 10 से 15 किमी तक महसूस किया जा सकता है.
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