ये है भारत की सबसे लंबी ट्रेन, लंबाई जानकर दंग रह जाएंगे आप

भारत की सबसे लंबी ट्रेन में 354 वैगन और 7 इंजन लगे हैं. ये ट्रेन काफी तेजी से चलती है. इसकी एवरेज स्पीड 40 किमी प्रति घंटे की है. दूसरे नंबर की सबसे लंबी ट्रेन का रिकॉर्ड सुपर वासुकी के पास है. इस ट्रेन की लंबाई भी अच्छी-खासी है.

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भारत की सबसे लंबी ट्रेन

India Longest Train: भारतीय रेलवे ने करोड़ों लोगों की जिंदगी आसान बनाई है. रोजाना बड़ी संख्या में लोग ट्रेन से सफर करते हैं. देश की फैक्ट्रियों, बिजली घरों तक सामान भी ट्रेन से ही पहुंचता है. आपने वंदे भारत जैसी सुपरफास्ट ट्रेन के बारे में तो सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत की सबसे लंबी ट्रेन कौन सी है और उसकी लंबाई कितनी है. अगर नहीं तो आज हम आपको इस ट्रेन के बारें में वो बातें बताएंगे, जिससे आप हैरान रह जाएंगे.

भारत की सबसे लंबी ट्रेन कौन सी है

अब भारत की सबसे लंबी मालगाड़ी का खिताब रुद्रास्त्र के नाम हो गया है. पिछले साल के आखिरी में ही इस सुपर लंबी ट्रेन का सफल ट्रायल पूरा किया गया और इसके सामने पिछली सभी मालगाड़ियां छोटी पड़ गईं. इसमें 354 वैगन, 7 इंजन हैं. इसकी कुल लंबाई करीब 4.5 किलोमीटर है. ट्रायल के दौरान जब ट्रेन चलनी शुरू हुई, तो आगे का हिस्सा स्टेशन से निकल चुका था, लेकिन आखिरी छोर आंखों से दिख ही नहीं रहा था.

रुद्रास्त्र का ट्रायल कहां हुआ था

इस ऐतिहासिक ट्रायल को पूर्व मध्य रेलवे के डीडीयू मंडल में किया गया, जिसकी शुरुआत गंजख्वाजा स्टेशन से हुई और यह गढ़वा रोड स्टेशन तक चली. इस दौरान 200 किलोमीटर का सफर तय किया, इसमें सिर्फ 5 घंटे का समय लगा. ट्रेन की औसत रफ्तार 40 किमी प्रति घंटा है. यह ट्रेन 6 खाली बॉक्सन रेक को जोड़कर तैयार की गई है.

सुपर वासुकी दूसरी सबसे लंबी ट्रेन

इससे पहले देश की सबसे लंबी ट्रेन सुपर वासुकी थी. यह भी एक विशाल मालगाड़ी है, जिसे खासतौर पर कोयला ढोने के लिए बनाया गया है. इस ट्रेन में पूरे 295 वैगन लगे हैं. इसे चलाने के लिए 6 इंजन एक साथ लगाए जाते हैं. इंजन समेत इसकी कुल लंबाई करीब 3.5 किलोमीटर है. मतलब, अगर यह ट्रेन आपके सामने से गुज़रे, तो आपको इसे पूरी तरह निकलने में करीब 4 मिनट लग जाएंगे.

सुपर वासुकी क्यों है इतनी खास

सुपर वासुकी को भारतीय रेलवे ने 15 अगस्त 2022 को शुरू किया था, जब देश आजादी का 75वां अमृत महोत्सव मना रहा था. इस ट्रेन को खासतौर पर इसलिए तैयार किया गया ताकि बिजली उत्पादन इकाइयों तक कोयले की सप्लाई बिना रुकावट हो सके. यह ट्रेन एक बार में 27,000 टन कोयला ले जा सकती है. इतना कोयला किसी 3000 मेगावाट के पावर प्लांट को पूरे एक दिन तक बिजली बनाने में मदद करता है.

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