नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब हकीकत बन गया है. आज (28 मार्च) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली-NCR के लोगों को इस एयरपोर्ट की सौगात देने वाले हैं. यह एयरपोर्ट स्विस मैनेजमेंट (Zurich Airport International) की विश्व स्तरीय दक्षता (Efficiency) और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का एक अनूठा संगम है. इस एयरपोर्ट का विकास यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (YIAPL) ने किया है. जो कि ज़्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल AG की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है. बता दें कि स्विस मैनेजमेंट (Zurich Airport International AG) को 40 साल का अनुभव है. एयरपोर्ट के निर्माण में टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के साथ मिलकर स्विस दक्षता (Swiss Efficiency) का उपयोग किया गया है. एयरपोर्ट का संचालन Christoph Schnellmann (CEO) और किरण जैन (COO) जैसी अनुभवी टीम के हाथों में है.
एयरपोर्ट की खासियत
- नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से दिल्ली NCR, नोएडा और पश्चिमी UP से आने-जाने की कनेक्टिविटी को बेहतर होगी.
- यह 5,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ.
- पहले चरण में एयरपोर्ट को एक रनवे के साथ संचालित किया जाएगा.
- इसकी सालाना यात्री क्षमता करीब 1 करोड़ 20 लाख होगी और प्रतिदिन औसतन करीब 150 उड़ानों के संचालन का अनुमान है.
- अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही यात्रियों की संख्या एक करोड़ के आंकड़े को पार करेगी, एयरपोर्ट पर दूसरे रनवे के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी.
- दो रनवे के साथ यह एयरपोर्ट करीब 7 करोड़ यात्रियों को सेवा देने में सक्षम होगा.
- यह एयरपोर्ट न केवल क्षेत्रफल के लिहाज से देश का सबसे बड़ा होगा, बल्कि आधुनिक तकनीक और भारतीय सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम भी पेश करेगा.
- एयरपोर्ट पूरी तरह से डिजिटल होगा, जिसमें DigiYatra तकनीक, सेल्फ-चेक-इन और सेल्फ-बैग ड्रॉप की सुविधा होगी.
- इसे भारत का सबसे 'ग्रीन' एयरपोर्ट माना जा रहा है.
- सिक्योरिटी जांच के बाद यात्री सीधे एयरोब्रिज तक पहुंचेंगे.
- एयरोब्रिज के माध्यम से यात्री बिना किसी असुविधा के सीधे विमान में सवार हो सकेंगे और अपने गंतव्य की ओर रवाना होंगे.
- डोमेस्टिक टर्मिनल में में एस्केलेटर की सुविधा भी दी गई है. जिससे यात्री आसानी से एयरोब्रिज तक पहुंच सकेंगे.
- एयरपोर्ट परिसर में आधुनिक कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब भी तैयार किया जा रहा है.
- जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने से इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बढ़ते यात्री दबाव को काफी हद तक कम किया जा सकेगा.
- रनवे पर प्रति घंटे लगभग 30 उड़ानों के संचालन की क्षमता विकसित की गई है.
संस्कृति की झलक
एयरपोर्ट का डिजाइन भी खास आकर्षण का केंद्र है. टर्मिनल का डिज़ाइन भारतीय संस्कृति और वास्तुकला से प्रेरित है. टर्मिनल के प्रवेश द्वार पर बनी सीढ़ियां वाराणसी के घाटों की याद दिलाती हैं, जो उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान हैं.
इसके अलावा एयरपोर्ट में बड़े-बड़े कांच के पैनल का उपयोग किया गया है. यानी टर्मिनल दिन में सूरज की रोशनी से चमकता रहेगा. एयरपोर्ट की छत को भी बेहद खास तरीके से बनाया गया है. इसकी छत सफेद रंग की है. जो ति पवित्र नदियों की लहरों जैसी लगती हैं. इससे ऐसा प्रतीत होता है मानो पानी की लहरें ऊपर की ओर बन रही हों, जो यात्रियों को एक अलग ही अनुभव प्रदान करेगा.














