गौतम बुद्ध नगर जिले के जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब आम जनता के लिए तैयार हो गया और अब यहां से उड़ानें उड़ना शुरू भी हो जाएंगी. लगभग 25 साल यानी 2001 पहले इस एयरपोर्ट का सपना देखा गया था जो कि अब 2026 में पूरा हुआ है. नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को दिल्ली एनसीआर क्षेत्र के लिए दूसरे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में विकसित किया गया है. इस एयरपोर्ट से उत्तर प्रदेश के लोगों के अलावा दिल्ली के निवासियों को भी फायदा मिलेगा. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का कोड DXN है.
ग्लोबल एयरलाइंस संस्था IATA ने इस एयरपोर्ट को साल 2023 में DXN कोर्ट आवंटित किया था. इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) दुनिया की एयरलाइंस के लिए एक ट्रेड बॉडी है, जो लगभग 300 एयरलाइंस या कुल हवाई ट्रैफिक के 83 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करती है.
क्या है इस कोर्ड का मतलब
ये कोर्ड मिलने के बाद एयरपोर्ट के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर क्रिस्टोफ श्नेलमान ने कहा था "यह कोड, DXN, एयरपोर्ट की नोएडा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से निकटता का प्रतीक है." IATA दुनिया भर के एयरपोर्ट्स को उनकी आसान पहचान के लिए तीन-अक्षरों वाले कोड आवंटित करता है.
बता दें नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भारत की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा परियोजनाओं में से एक है. नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पहले चरण को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत लगभग 11,200 करोड़ रुपये के कुल निवेश से विकसित किया गया है. प्रारंभिक चरण में हवाई अड्डे की यात्री संचालन क्षमता 12 मिलियन यात्री प्रति वर्ष (एमपीपीए) होगी, जो हवाई अड्डे के पूर्ण विकसित होने तक 70 एमपीपीए तक हो जाएगी.
इसमें 3,900 मीटर लंबा रनवे है जो बड़े आकार के विमानों के संचालन में सक्षम है. इसके साथ ही इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) और उन्नत एयरफील्ड लाइटिंग सहित आधुनिक नेविगेशन सिस्टम हैं, जो हर मौसम में दिन-रात संचालन में कुशल हैं.














