मुल्ला और अयातुल्ला में क्या अंतर होता है? जानें ईरान में किसके खिलाफ हो रहा प्रदर्शन

Iran Protest: ईरान में प्रदर्शन लगातार तेज हो रहे हैं और अब तक 60 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. यहां सरकार के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर चुके हैं और मुल्लाओं को भगाने की बात कर रहे हैं.

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ईरान में प्रदर्शन

मुल्लाओं को ईरान छोड़ना होगा, तानाशाही मुर्दाबाद... पिछले कुछ दिनों से ईरान में यही नारे सुनाई दे रहे हैं. खामेनेई सरकार के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर चुके हैं और हिंसक प्रदर्शन जारी हैं. महंगाई के खिलाफ ये प्रदर्शन शुरू हुआ था, लेकिन अब इसे ईरान के धर्म गुरुओं के खिलाफ भी माना जा रहा है. यही वजह है कि लोग मुल्लाओं को देश छोड़ने की हिदायत दे रहे हैं. आज हम आपको मुस्लिम धर्म गुरुओं और मौलवियों के लिए इस्तेमाल होने वाले शब्द मुल्ला और अयातुल्ला के बीच का अंतर बताएंगे. साथ ही ये भी बताएंगे कि क्यों ईरान के लोग इनसे नाराज हैं. इस पूरे मुद्दे पर बात करने के लिए हमने इस्लामिक मामलों के जानकार डॉ मुमताज आलम रिजवी से बातचीत की. 

क्या होते हैं अयातुल्ला?

इस्लाम में अयातुल्ला एक सर्वोच्च पदवी है, इसे अल्लाह की निशानी भी कहा जाता है. शिया मुस्लिमों के लिए ये एक सम्मानजनक पद होता है. आमतौर पर सबसे विद्वान मौलवियों को ये उपाधि मिलती है. 1979 की इस्लामिक क्रांति में सबसे अहम भूमिका निभाने वाले अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी सबसे ज्यादा मशहूर आयतुल्लाह थे, जो ईरान के सर्वोच्च नेता चुने गए. उनके बाद अब अयातुल्ला अली खामेनेई के हाथों में ईरान की सत्ता है. 

इस्लामिक मामलों के जानकर डॉ मुमताज आलम रिजवी ने बताया कि रुहानी ऐतबार से चीजों को देखने वाले को ईरान में सर्वोच्च नेता माना जाता है, इन्हें मजहबी पेशवा भी कहा जा सकता है. ये कोई सरकारी ओहदा नहीं है, ये मौलाना या मौलवी की तरह ही एक पदवी है. 

क्या होते हैं मुल्ला?

डॉ. मुमताज ने बताया कि मुल्ला कोई इस्लामिक टर्म नहीं है, इसे मौलवियों के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है. मुल्ला नाम की कोई भी चीज नहीं है, मौलाना का बिगड़ा हुआ रूप ही मुल्ला है. ऐसे प्रदर्शनों में आमतौर पर सत्ता में बैठे धार्मिक गुरुओं के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है. इसीलिए ईरान में भी मुल्लाओं को सत्ता से बाहर करने के नारे लगाए जा रहे हैं. 

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क्यों जल रहा है ईरान?

ईरान में हिंसक प्रदर्शन के पीछे देश में महंगाई और सरकार की नीतियां हैं. लोग ईरानी मुद्रा में गिरावट और बेरोजगारी से लेकर तमाम मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. फिलहाल ईरान में इंटरनेट और फोन लाइनें बंद कर दी गई हैं और कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया है. अब तक इस हिंसक प्रदर्शन में 40 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. 

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