Ajit Pawar Plane Crash: अजित पवार के प्लेन का ब्लैक बॉक्स हुआ बरामद, इसमें क्या-क्या रिकॉर्ड होता है?

Ajit Pawar Plane Black Box: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और एनसीपी के बड़े नेता अजित पवार का प्लेन क्रैश में निधन हो गया है. अजित पवार बारामती जा रहे थे, तभी बीच में उनका प्लेन नीचे गिर गया. फिलहाल क्रैश के पीछे के कारणों का पता नहीं लग पाया है.

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प्लेन क्रैश का राज कैसे खुलता है

Ajit Pawar Plane Crash: एनसीपी नेता और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का प्लेन 28 जनवरी की सुबह क्रैश हो गया. इस प्लेन में उनके साथ कुल पांच लोग सवार थे. प्लेन हादसे में सभी लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. हर कोई ये जानना चाहता है कि प्लेन क्रैश कैसे हो गया. इसी बीच अजित पवार के प्लेन का ब्लैक बॉक्स बरामद हो गया है. आइए जानते हैं कि ब्लैक बॉक्स क्या होता है और इसमें कौन सी चीजें रिकॉर्ड होती हैं. साथ ही जानेंगे कि प्लेन क्रैश के बाद इस चीज की ही सबसे पहले क्यों तलाश की जाती है. 

सबसे पहले खोजी जाती है ये चीज

किसी भी प्लेन क्रैश के बाद सबसे पहले जिस चीज की तलाश की जाती है, वो होता है उसका ब्लैक बॉक्स... ये वही चीज है, जिससे पता चलता है कि हादसा कैसे हुआ और प्लेन में आखिरी पलों में क्या-क्या हुआ था. मलबे से सुरक्षा एजेंसियां इस ब्लैक बॉक्स को निकालती हैं और फिर इसे जांच के लिए भेजा जाता है. 

क्या होता है ब्लैक बॉक्स?

ब्लैक बॉक्स (Black Box) हर प्लेनमें लगा एक बेहद मजबूत रिकॉर्डिंग डिवाइस होता है. इसका काम उड़ान के दौरान होने वाली हर एक चीज क डेटा सुरक्षित रखना होता है. इसमें पायलट क्या बोल रहे हैं, इसकी रिकॉर्डिंग भी होती है. साथ ही प्लेन में आने वाली हर तकनीकी खराबी की जानकारी भी इसमें होती है. इसे प्लेन में इसलिए रखा जाता है, जिससे पता लग पाए कि दुर्घटना का असली कारण क्या था. इसका नाम भले ही ब्लैक बॉक्स हो, लेकिन ये गहरे नारंगी रंग का होता है, इस रंग के पीछे कारण है कि ये मलबे में ये दूर से नजर आ जाता है और इसे खोजने में मशक्कत नहीं करनी पड़ती है. 

दो अलग-अलग रिकॉर्डर

ब्लैक बॉक्स में दो ऐसी चीजे होती हैं, जो अलग-अलग चीजों का रिकॉर्ड रखने का काम करती हैं. पहला FDR (Flight Data Recorder) होता है, जिसमें प्लेन की तकनीकी जानकारी, जैसे- ऊंचाई (Altitude), रफ्तार, फ्यूल आदि का रिकॉर्ड रहता है. वहीं दूसरा CVR (Cockpit Voice Recorder) होता है, जिसमें पायलटों के बीच की बातचीत, रेडियो मैसेज और कॉकपिट के अंदर बजने वाले अलार्म या फिर दूसरी आवाजों का रिकॉर्ड होता है. 

ब्लैक बॉक्स को इस तरह से बनाया जाता है कि ये किसी भी हालात में सही सलामत रहे. ये 1100°C की गर्मी को एक घंटे तक झेल सकता है. वहीं समुद्र की गहराइयों में भी काम करता है. अब अजित पवार के विमान के मलबे से भी ब्लैक बॉक्स को निकाला जाएगा और लैब में इसकी जांच होगी, इसके बाद डीजीसीए की तरफ से हादसे को लेकर रिपोर्ट जारी होगी, जिसमें ये बताया जाएगा कि आखिर हादसे के पीछे असली वजह क्या थी. 

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