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क्या होता है शॉर्टहैंड, जिसके चलते UPPSC की सरकारी भर्ती में पास नहीं हो पाया एक भी कैंडिडेट

What is Shorthand : UPPSC ने हाल ही में APS भर्ती परीक्षा का परिजल्ट घोषित किया, जिसमें एक भी कैंडिडेट सिलेक्शन नहीं पा सका. भर्ती प्रक्रिया में शॉर्टहैंड सबसे बड़ी चुनौती साबित हुई.

क्या होता है शॉर्टहैंड, जिसके चलते UPPSC की सरकारी भर्ती में पास नहीं हो पाया एक भी कैंडिडेट
शॉर्टहैंड के चलते एक भी उम्मीदवार नहीं हो पाया पास

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने हाल ही में अपर निजी सचिव (APS) भर्ती परीक्षा का रिजल्ट जारी किया है, जिसने सभी को चौंका दिया है. दरअसल, 331 पदों के लिए कराई गई भर्ती प्रक्रिया में कोई भी कैंडिडेट अंतिम चरण यानी शॉर्टहैंड परीक्षा पास नहीं कर सका. नतीजा यह हुआ कि सभी 331 पद खाली रह गए. इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर शॉर्टहैंड क्या है, यह इतना कठिन क्यों माना जाता है और आज के युवा इससे दूरी क्यों बना रहे हैं?

क्या होता है शॉर्टहैंड?

शॉर्टहैंड को हिंदी में आशुलेखन कहा जाता है. यह एक स्पेशल राइटिंग मेथड है, जिसमें सामान्य शब्दों की जगह संकेतों (Symbols), चिह्नों (Signs) और संक्षिप्त रूपों (Abbreviations) का इस्तेमाल किया जाता है. इसका मकसद किसी व्यक्ति के बोले गए शब्दों को बेहद तेज गति से लिखना होता है. पहले के दौर में पत्रकार, कोर्ट रिपोर्टर, सचिव और सरकारी कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारी इस मेथड का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते थे. जब रिकॉर्डिंग और डिजिटल ट्रांसक्रिप्शन की सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं, तब शॉर्टहैंड ही भाषण, बैठकों और डिक्टेशन को रिकॉर्ड करने का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता था.

सीखना आसान नहीं

शॉर्टहैंड केवल लिखने की कला नहीं, बल्कि एक टेक्निकल स्किल है. इसमें अलग-अलग आवाजों के लिए स्पेशल सिम्बल्स याद रखने पड़ते हैं. इसके साथ ही कैंडिडेट को सुनकर तुरंत लिखना और फिर उसे सामान्य भाषा में टाइप करना भी आना चाहिए. सरकारी भर्ती परीक्षाओं में अक्सर 80 से 100 शब्द प्रति मिनट की गति से डिक्टेशन दिया जाता है. इतनी तेज गति पकड़ने के लिए महीनों नहीं बल्कि कई बार सालों तक प्रैक्टिस करनी पड़ती है. यही वजह है कि कई उम्मीदवार लिखित परीक्षा और टाइपिंग टेस्ट तो पास कर लेते हैं, लेकिन शॉर्टहैंड में पिछड़ जाते हैं.

क्यों घटी सीखने वालों की संख्या 

डिजिटल युग में शॉर्टहैंड का इस्तेमाल काफी कम हो चुका है. आज स्मार्टफोन, ऑडियो रिकॉर्डर, स्पीच-टू-टेक्स्ट सॉफ्टवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड ट्रांसक्रिप्शन टूल्स ने इसकी जरूरत को काफी हद तक कम कर दिया है. प्राइवेट सेक्टर में शायद ही कोई संस्था अब शॉर्टहैंड को अनिवार्य योग्यता मानती हो. ऐसे में ज्यादातर युवा उन स्किल्स पर ध्यान देते हैं, जिनकी बाजार में ज्यादा मांग है, जैसे कंप्यूटर, डेटा एनालिटिक्स, कोडिंग या डिजिटल मार्केटिंग.

सरकारी नौकरियों में क्यों जरूरी है शॉर्टहैंड?

तकनीक ने कई बदलाव किए हैं, लेकिन कई सरकारी पदों पर आज भी अधिकारियों के भाषण, बैठकों के नोट्स और कॉन्फिडेंशियल डॉक्युमेंट्स के लिए स्टेनोग्राफर्स की जरूरत होती है. इसी कारण APS, स्टेनोग्राफर और निजी सचिव जैसे पदों की भर्ती में शॉर्टहैंड परीक्षा अनिवार्य रखी जाती है. सरकारी विभागों का मानना है कि प्रशिक्षित ट्रेन्ड स्टेनोग्राफर किसी भी डिक्टेशन को बिना तकनीकी बाधा के तुरंत रिकॉर्ड कर सकता है, इसलिए यह स्किल अभी भी जरूरी है.

बदलते दौर में पुरानी चुनौती

UPPSC के हालिया परिणाम ने दिखा दिया है कि शॉर्टहैंड अब भर्ती परीक्षाओं की सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बन गया है. एक ओर इसका इस्तेमाल लगातार घट रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकारी नौकरियों में इसकी अनिवार्यता बनी हुई है. यही वजह है कि आज के युवाओं के सामने सवाल है कि क्या वे एक कम इस्तेमाल होने वाले लेकिन सरकारी नौकरी के लिए जरूरी स्किल्स को सीखने में समय लगाएं. फिलहाल, सरकारी भर्ती व्यवस्था में शॉर्टहैंड की अहमियत बरकरार है और इसे नजरअंदाज करना उम्मीदवारों को भारी पड़ सकता है.

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