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सिर्फ 40% फ्रेशर्स को ही मिल पा रहा 5 लाख का पैकेज, 90 फीसदी युवा कम सैलरी पर काम करने को तैयार- स्टडी

Freshers Salary Package: इस स्टडी में बताया गया है कि 84% ग्रेजुएट छात्र अभी भी प्लेसमेंट का इंतजार कर रहे हैं. कई युवा ऐसे भी हैं, जिन्हें एआई की ट्रेनिंग नहीं मिली है.

सिर्फ 40% फ्रेशर्स को ही मिल पा रहा 5 लाख का पैकेज, 90 फीसदी युवा कम सैलरी पर काम करने को तैयार- स्टडी
नौकरियों को लेकर स्टडी में बड़ा खुलासा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के चलते कई नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है, भले ही ये कह जा रहा हो कि आगे एआई बंपर नौकरियां पैदा कर सकता है, लेकिन फिलहाल ये नौकरियों को निगलने में लगा है. ऐसे में नौकरी करना और इसे बचाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है. अब एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि 73% ग्रेजुएट फ्रेशर प्रति वर्ष 5 लाख रुपये से ज्यादा की सैलरी की उम्मीद करते हैं, लेकिन सिर्फ 40% ही इसे हासिल कर पाते हैं. यानी बाकी के युवाओं को समझौता करना पड़ रहा है. 

स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा 

हायरिंग प्लेटफॉर्म 'अनस्टॉप' (Unstop) की एक स्टडी में ये खुलासा हुआ है. इसमें बताया गया है कि सैलरी में इतनी कमी पहले कभी नहीं देखी गई थी. 'अनस्टॉप टैलेंट रिपोर्ट 2026' 500 से ज्यादा HR लीडर्स और 37,000 से ज्यादा छात्रों के इनपुट पर आधारित है. इस स्टडी में बताया गया है कि हायरिंग में कमी नहीं आई है. असल में 88 प्रतिशत कंपनियां हायरिंग मोड में हैं और 90 प्रतिशत ने अपने हायरिंग बजट को बरकरार रखा है या बढ़ाया है. फिर भी कैंपस प्लेसमेंट की कहानी काफी निराश करने वाली है. 

स्टडी की बड़ी बातें 

  • स्टडी में बताया गया है कि 84% ग्रेजुएट छात्र अभी भी प्लेसमेंट का इंतजार कर रहे हैं. 
  • 85% इंजीनियरिंग छात्रों का प्लेसमेंट नहीं हुआ है. 
  • 17% ग्रेजुएट छात्रों को ऑफर मिलने में देरी हुई या उनके ऑफर वापस ले लिए गए.
  • महज 14% फ्रेशर्स को 9 लाख रुपये से ऊपर का वेतन मिलता है, जबकि 60% इसकी उम्मीद करते हैं.
  • 30% MBA छात्र 10 लाख रुपये से कम कमाते हैं और 39% इंजीनियर 7 लाख रुपये से कम कमाते हैं.

क्या है असली वजह?

अनस्टॉप के फाउंडर और सीईओ अंकित अग्रवाल ने इसे लेकर जानकारी देते हुए बताया कि सैलरी का यह अंतर बाजार की मंदी नहीं है, ये एक सुधार की तरह है. लंबे समय तक, कॉलेज का नाम सैलरी पैकेज का पैमाना हुआ करता था, लेकिन अब भारतीय कंपनियां केवल क्षमता के लिए पैसा देना बंद कर चुकी हैं. उन लोगों को चुना जा रहा है, जो पहले दिन से ही कंपनी के लिए फायदे का सौदा हों. यानी अब कॉलेज या संस्थान का टैग नहीं बल्कि कंपनियों को काबिलियत का सबूत चाहिए. 

एआई का कितना रोल?

करीब आधे से ज्यादा ग्रेजुएट्स ऐसे हैं, जिनके पास एआई की कोई ट्रेनिंग नहीं है. इसमें 46% इंजीनियरिंग छात्र हैं. वहीं, 57% कंपनियां स्क्रीनिंग के लिए और 55% AI-आधारित इंटरव्यू के लिए AI का इस्तेमाल कर रही हैं. यानी अब खेल के नियम पूरी तरह से बदल चुके हैं. यही वजह है कि युवाओं को मनचाहा सैलरी पैकेज नहीं मिल पा रहा है. 

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