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माइनिंग सेक्टर में करियर बनाने का मौका, सरकारी सेंटर से ट्रेनिंग लेकर सीधे ऑस्ट्रेलिया जाने का रास्ता साफ

Mining Career: माइनिंग सेक्टर में करियर बनाने वालों के लिए बड़ा मौका है. अब भारत में ही माइनिंग सेक्टर की इंटरनेशनल लेवल की ट्रेनिंग मिलेगी. सरकारी सेंटर से ट्रेनिंग लेने वाले युवाओं के लिए ऑस्ट्रेलिया तक पहुंचने का रास्ता भी खुलेगा.

माइनिंग सेक्टर में करियर बनाने का मौका, सरकारी सेंटर से ट्रेनिंग लेकर सीधे ऑस्ट्रेलिया जाने का रास्ता साफ
देशभर के युवाओं को मिलेगी ग्लोबल लेवल की ट्रेनिंग

Mining Career: अगर आप माइनिंग सेक्टर में इंटरनेशनल करियर बनाना चाहते हैं, तो आपके लिए बड़ी खुशखबरी है. अब आपको लाखों रुपए खर्च करके विदेश जाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि भारत सरकार खुद आपको अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग देकर सीधे ऑस्ट्रेलिया में नौकरी पाने के काबिल बनाने जा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान कई बड़े ऐतिहासिक समझौते हुए हैं. इन्हीं में से एक सबसे खास समझौता भारत के कौशल विकास मंत्रालय (MSDE) और वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के मशहूर सरकारी संस्थान 'TAFE' के बीच हुआ है. इस साझेदारी के तहत भारत में एक ऐसा वर्ल्ड क्लास सेंटर बनने जा रहा है, जो भारतीय युवाओं के लिए सीधे ऑस्ट्रेलिया के दरवाजे खोल देगा. आइए जानते हैं पूरा प्लान क्या है, यह सेंटर कहां बन रहा है और इससे आपको क्या-क्या फायदे होने वाले हैं.

ओडिशा के भुवनेश्वर में खुलेगा 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस'

इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए देश के सबसे खनिज-समृद्ध (Mineral-Rich) राज्य ओडिशा को चुना गया है. भुवनेश्वर में मौजूद नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (NSTI) कैंपस के अंदर यह खास 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन माइनिंग एंड मेट्स' (Centre of Excellence in Mining and METS) बनाया जा रहा है. इसका मतलब यह है कि स्थानीय और देशभर के युवाओं को अब ग्लोबल लेवल की ट्रेनिंग के लिए बड़े-बड़े मेट्रो सिटीज या विदेश भागने की जरूरत नहीं पड़ेगी. भुवनेश्वर का यह सेंटर ही उन्हें इंटरनेशनल माइनिंग एक्सपर्ट बना देगा.

इस सेंटर में क्या-क्या सीखने को मिलेगा

  • माइनिंग ऑपरेशंस यानी खदानों में काम करने की आधुनिक और स्मार्ट तरीके से ट्रेनिंग.
  • खदानों के अंदर खुद को और पूरी टीम को सेफ रखने (Mine Safety) के इंटरनेशनल नियम बताए जाएंगे.
  • खनिज प्रोसेसिंग(Mineral Processing) यानी जमीन से निकले खनिजों को रिफाइन और इस्तेमाल के लायक बनाने की तकनीक सिखाई जाएगी.
  • माइनिंग में इस्तेमाल होने वाली भारी मशीनरी (Heavy Mining Machinery) और ऑटोमैटिक मशीनों को चलाने और उन्हें मेंटेन करने की स्किल सिखाई जाएगी.
  • माइनिंग सेक्टर में इस्तेमाल होने वाली लेटेस्ट सॉफ्टवेयर और गैजेट्स की समझ यानी मॉडर्न माइनिंग टेक्नोलॉजी की जानकारी दी जाएगी.

सबसे बड़ा फायदा क्या होने वाला है

1. स्टूडेंट्स और ट्रेनीज का एक्सचेंज प्रोग्राम

इस समझौते के तहत भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच छात्रों, ट्रेनीज और इंस्ट्रक्टर्स (ट्रेनर्स) का एक्सचेंज प्रोग्राम चलेगा. यहां चुने गए बेहतरीन छात्रों और लोकल इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स को आगे की एडवांस ट्रेनिंग के लिए वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के TAFE संस्थानों में भेजा जाएगा. इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया के एक्सपर्ट्स भुवनेश्वर आकर मास्टरक्लास लेंगे.

2. ऑस्ट्रेलिया में मिलेगी भारतीय सर्टिफिकेट को मान्यता

अक्सर विदेश जाने में सबसे बड़ी दिक्कत यह आती है कि हमारे देश की डिग्री या वोकेशनल सर्टिफिकेट को वहां मान्यता नहीं मिलती, लेकिन इस बार सरकार ने इसका इंतजाम किया है. भारत के NCVET और ऑस्ट्रेलिया की अथॉरिटी ASQA के बीच एक मजबूत फ्रेमवर्क तैयार हुआ है. इससे भुवनेश्वर सेंटर से मिलने वाले वोकेशनल सर्टिफिकेट को ऑस्ट्रेलिया में भी पूरी मान्यता मिलेगी.

3. विदेशी कंपनियों में प्लेसमेंट का रास्ता साफ

पूरी ट्रेनिंग ऑस्ट्रेलिया के मानकों (Standards) के हिसाब से होगी, इसलिए ट्रेनिंग पूरी करते ही आप ग्लोबल टैलेंट पाइपलाइन का हिस्सा बन जाएंगे. इससे ऑस्ट्रेलिया समेत दुनियाभर की बड़ी-बड़ी माइनिंग कंपनियों में सीधे प्लेसमेंट मिलने के चांस बहुत ज्यादा बढ़ जाएंगे.

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