भारत में इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS) और इंडियन फॉरेन सर्विस (IFS) बहुत ज्यादा सम्मानित और हाई लेवल सर्विसेज मानी जाती हैं. इन दोनों ही सर्विसेज को पाने के लिए UPSC की कठिन परीक्षा से गुजरना पड़ता है. एक तरफ जहां IAS अधिकारी देश के अंदर प्रशासन संभालते हैं, वहीं IFS अधिकारी विदेशों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं. इन दोनों की अपनी अलग पहचान, जिम्मेदारियां और फायदे हैं, जिसके कारण उम्मीदवारों के लिए किसी एक को चुनना मुश्किल हो जाता है.
IAS और IFS में क्या है अंतर?
IAS अधिकारी देश के भीतर काम करते हैं. उनके कंधों पर सरकारी नीतियों को लागू करने, कानून-व्यवस्था बनाए रखने, विकास कार्यों के संचालन और निगरानी एवं जनता की समस्याओं का समाधान करने की जिम्मेदारी होती है. वहीं, IFS अधिकारी विदेशों में तैनात रहकर भारत के कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करते हैं. वे दूसरे देशों के साथ समझौते, संधियों पर बातचीत, विदेश में भारतीय नागरिकों की मदद और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बात रखते हैं. IAS एक ऑल इंडिया सर्विस है, जबकि IFS एक सेंट्रल सर्विस मानी जाती है.
किसके पास ज्यादा पावर होती है?
पावर के मामले में, IAS अधिकारियों को देश के अंदर ज्यादा प्रशासनिक अधिकार मिलते हैं. वे नीतियां बनाने और उन्हें लागू करने में अहम भूमिका निभाते हैं. दूसरी ओर, IFS अधिकारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की विदेश नीति को आगे बढ़ाते हैं. हालांकि, उनकी भूमिका भी बेहद अहम होती है, लेकिन घरेलू प्रशासन में IAS का प्रभाव ज्यादा होता है.
सैलरी में कौन आगे?
IAS और IFS दोनों को अच्छी सैलरी और सुविधाएं मिलती हैं. 7वें वेतन आयोग के तहत IAS और IFS की शुरुआती सैलरी लगभग एक जैसी ही होती है, जिसमें बेसिक पे लगभग 56,100 रुपए प्रति माह है. इस अलावा HRA, TA, DA और मेडिकल सुविधाएं भी मिलती हैं. DA, HRA और ट्रेवल जैसे अलाउंसेज को मिलाकर उनकी कुल शुरुआती सैलरी 85,000 से 1,00,000 रुपए प्रति महीने के बीच हो सकती है. IFS अधिकारियों को स्पेशल फॉरेन अलाउंस भी मिलता है, जिससे उनकी कुल कमाई और बढ़ जाती है. सिविल सर्विसेज में सबसे ज्यादा सैलरी कैबिनेट सेक्रेटरी को दी जाती है, जो IAS अधिकारी होते हैं. उनकी सैलरी लगभग 2,50,000 रुपए प्रति माह तक हो सकती है.
पोस्ट और करियर ग्रोथ
IAS अधिकारी SDM, DM और कमिश्नर से लेकर कैबिनेट सेक्रेटरी तक बन सकते हैं. उनका सीधा असर देश के प्रशासन और जनता पर पड़ता है. IFS अधिकारी थर्ड सेक्रेटरी से लेकर एंबेसडर और हाई कमिश्नर तक बनते हैं. वे दुनियाभर में भारत की छवि और हितों को आगे बढ़ाते हैं.
कौन-सी सर्विस चुनें?
IAS और IFS दोनों ही सर्विसेज देश के विकास में अहम भूमिका निभाती हैं. इसका चयन पूरी तरह आपकी रुचि और करियर लक्ष्य पर निर्भर करता है. अगर आप देश के अंदर रहकर लोगों की जिंदगी में बदलाव लाना चाहते हैं, तो IAS आपके लिए बेहतर ऑप्शन है. वहीं, अगर आप विदेशों में काम करना चाहते हैं, अलग-अलग संस्कृतियों को जानना चाहते हैं और कूटनीति में रुचि रखते हैं, तो IFS आपके लिए सही रहेगा.
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