रांची: ई-रिक्शा और ऑटो के लिए नया नियम लागू, जाम में फंसी एंबुलेंस में बच्ची की मौत के बाद प्रशासन का फैसला

बच्ची को जन्म के साथ ही हाई -फीवर था. इसी वजह से रिम्स रेफर किया गया था. बच्ची को इमर्जेंसी में लाया गया था, लेकिन बच्ची की मौत रास्ते में ही हो गई थी. जिसके बाद अब कई सवाल खड़े हो गए हैं.

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जाम में फंसी एंबुलेंस में बच्ची की मौत के बाद ई-रिक्शा और ऑटो के लिए नए नियम

Jharkhand News: रांची में भीषण ट्रैफिक जाम एक प्रमुख समस्या है, जो कांटाटोली, रातू रोड और लालपुर जैसे इलाकों में आम है. अब इसी ट्रैफिक जाम में 25 अप्रैल को बुंडू से आ रही एंबुलेंस कांटाटोली चौक के पास फंस गई. एंबुलेंस में बीमार एक बच्ची थी, जिसे उसकी मां अपने सीने से इस आश में चिपाकर रखी थी कि अस्पताल में इलाज मिलने पर बच जाएगी, लेकिन करीब घंटे भर जद्दोजहद करने के बाद एंबुलेंस चालक नवजात को लेकर रिम्स पहुंची. पर डॉक्टरों ने अफसोस जताते हुए कहा कि आपने बच्ची को अस्पताल लाने में देर कर दी. इतना सुनते ही मां के आंखों से आंसुओं की धार बह निकली.  

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पैदा हुई थी बच्ची

दरअसल, गुरुवार की शाम पांच बजे सोनाहातू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बच्ची को जन्म दिया था. जन्म के बाद से नवजात को हाई फीवर था और सांस लेने में परेशानी थी. दो दिनों तक उपचार करने के बाद डॉक्टरों ने उसे रिम्स रेफर कर दिया था. रिम्स अस्पताल के डॉक्टर का कहना है कि सोनाहातू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के रिपोर्ट के मुताबिक बच्ची को जन्म के साथ ही हाई -फीवर था. इसी वजह से रिम्स रेफर किया गया था. बच्ची को इमर्जेंसी में लाया गया था, लेकिन बच्ची की मौत रास्ते में ही हो गई थी. 

जाम वाले इलाकों में होमगार्ड जवानों की होगी तैनाती

इस घटना के बाद प्रशासन ने ई-रिक्शा और ऑटो के लिए नए नियम लागू किए हैं, जिसके तहत कांटाटोली चौक से ई-रिक्शा सीधे नहीं गुजर सकेंगे. साथ ही रांची एसएसपी राकेश रंजन ने 5 नए ट्रैफिक पोस्ट बनाने और जाम वाले इलाकों में 600 होमगार्ड जवानों को तैनात करने का आदेश दिया है.
अब सवाल उठता है कि रांची के कांटाटोली में एक घंटे के ट्रैफिक जाम ने वह छीन लिया जो कभी वापस नहीं आ सकता. एक नवजात बच्ची ने एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया, क्योंकि सड़क पर खड़ी बस और ऑटो के लिए सवारी एक जिंदगी से कीमती थी. 

पिता वीणाधर महतो का कहना है कि मुझे किसी से शिकायत नहीं, बस जाम की वजह से किसी और की जान ना जाए. डॉक्टरों के ये शब्द 'आने में देर कर दी' उस मां के कानों में उम्र भर गुजेंगे. बच्ची के मौत के बाद आम लोगों के सामने भी तमाम सवाल भी खड़े हो रहे हैं कि क्या हम इतने स्वार्थी हो गए कि किसी की जान से ज्यादा हमें अपनी जल्दी प्यारी है. क्या हम इतने निष्ठुर हो गए हैं कि एंबुलेंस का सायरन भी हमें रास्ता देने पर मजबूर नहीं करता? 

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