बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में यौन शौषण? महिला कैदी का डीसी को पत्र- 'मेरे साथ कुछ गलत नहीं हुआ, जांच बंद करो'

जेल में बंद महिला कैदी से यौन शोषण का मामला झारखंड हाईकोर्ट में प्रक्रियाधीन है. अगली सुनवाई 8 जून को होगी. इससे पहले ही महिला ने पत्र लिखकर कहा कि वह किसी भी तरह की जांच नहीं चाहती है.

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बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा विवाद.

बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में महिला कैदी के कथित यौन शोषण और र गर्भवती होने के मामले पर में नया मोड़ आ गया है. महिला कैदी ने खुद ही ऐसे किसी मामले से इनकार कर दिया है. उपायुक्त मंजू नाथ भजन्त्री को लिखे पत्र में महिला ने कहा कि उसके साथ जेल में कुछ भी गलत नहीं हुआ है. वह कोई जांच नहीं चाहती और ना ही किसी को बयान देना चाहती है. कैदी का कहना है कि उसे इस मामले से दूर रखा जाए. मामले में सभी आरोप अफवाह हैं. इससे मीडिया में उसकी छवि खराब हो रही है. 

महिला बोली- मेरी छवि खराब हो रही है

उपायुक्त मंजू नाथ भजन्त्री ने पत्र की पुष्टि की है. उपायुक्त ने बताया, "महिला कैदी ने आग्रह किया है कि उसे अनावश्यक तंग नहीं किया जाए. उसके साथ किसी तरह का दुर्व्यवहार नहीं किया गया है. जांच टीम पूरे मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ बता सकते है."

हाईकोर्ट ने लगाई थी फटकार 

बता दें कि 22 मई को महिला बंदी के कथित यौन शोषण और गर्भवती होने के मामले पर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया था. वेकेशन बेंच ने राज्य सरकार समेत सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. साथ ही राज्य के डीजीपी को शपथपत्र दाखिल कर यह बताने को कहा था कि आरोपों की सत्यता की जांच के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं. 

अगली सुनवाई से पहले महिला का बयान अहम

इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 8 जून को होगी. इस दौरान सरकार को जांच से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य कोर्ट में पेश करने हैं. लेकिन अगली सुनवाई से पहले महिला के पत्र से पूरा मामला ही पलटता नजर आ रहा है.

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