झारखंड में जिंदा अमेरिकी बम के साथ फोटो ले रहे लोग, एक लापरवाही बन सकती है हादसा

गैस सिलेंडर के आकार वाले बम पर लिखा है-AN-M64 500-LB… American Made… Unexploded (UXO).  इस खतरनाक बम को निष्क्रिय करने के लिए रांची से बम स्क्वायड को बुलाया गया है.

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झारखंड में मिले अमेरिकी जिंदा बम के साथ फोटो ले रहे लोग
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  • मिट्टी और बालू के नीचे दबा हुआ था बम
  • बम डिफ्यूज करने के लिए रांची से बुलाई गई टीम
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Jharkhand News: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में पिछले दिनों द्वितीय विश्व युद्ध के समय का मिला अमेरिकी बम अब तक डिफ्यूज नहीं हुआ है. 227 किलोग्राम का अमेरिकी बम (AN-M64) सुवर्णरेखा नदी के किनारे के मिला था. पुलिस प्रशासन ने ग्रामीणों और मीडियाकर्मियों से घटनास्थल से दूर रहने की अपील की है. हालांकि, हैरानी की बात यह है कि इतनी संवेदनशील स्थिति के बावजूद घटनास्थल पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं. 

खिलौना जैसे बम के साथ ले रहे सेल्फी

बम के आसपास किसी तरह की घेराबंदी नहीं होने के कारण लोग बेखौफ होकर उसके करीब पहुंच रहे हैं, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है. स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई ग्रामीण इस जिंदा बम को खिलौना समझकर उसके साथ सेल्फी ले रहे हैं. हालांकि पुलिस प्रशासन द्वारा लगातार लोगों को चेतावनी दी जा रही है. लेकिन इसके बावजूद ग्रामीण लापरवाही बरत रहे हैं.

अमेरिकी बम के पास इकट्ठा लोग

बम पर लिखा है AN-M64 

बम का आकार किसी गैस सिलेंडर के बराबर है. रोचक बात यह है कि बम अब तक फटा नहीं है. जिस समय पूर्वी सिंहभूम के बहरागोड़ा प्रखंड के पानीपड़ा-नागुड़साई क्षेत्र में सुवर्णरेखा नदी तट पर बम मिला तो हड़कंप मच गया. अमेरिकी बम मिट्टी और बालू के नीचे दबा हुआ था. गैस सिलेंडर के आकार वाले बम पर लिखा है-AN-M64 500-LB… American Made… Unexploded (UXO). 

लोगों को बम से दूर रहने की सलाह

सुवर्णरेखा नदी के किनारे अमेरिकी बम मिलने पर बहरागोड़ा थाना प्रभारी शंकर प्रसाद कुशवाहा ने कहा कि मामले की जानकारी ग्रामीण एसपी को दे दी गई है.सुरक्षा को देखते हुए इलाके को घेर लिया गया है और लोगों को बम से दूर रहने की सख्त चेतावनी दी गई है.

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प्रशासन ने साफ कहा है कि बम के पास जाने की मनाही है. किसी भी तरह की छेड़छाड़ पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. इस खतरनाक बम को निष्क्रिय करने के लिए रांची से बम स्क्वायड को बुलाया गया है. साथ ही क्लाइकुंडा एयरबेस के अधिकारियों को भी पत्र भेजा गया है, ताकि पूरे मामले की तकनीकी जांच हो सके.

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