- हरियाणा में भाजपा ने पंजाबी समुदाय के वरिष्ठ नेता संजय भाटिया को राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है.
- संजय भाटिया की नियुक्ति से बीजेपी पंजाब विधानसभा चुनावों में पंजाबी मतदाताओं को संदेश देना चाहती है.
- संजय भाटिया 57 वर्ष के हैं, पानीपत के मॉडल टाउन निवासी और भाजपा में प्रदेश महामंत्री जैसे पदों पर रहे हैं.
हरियाणा में BJP ने राज्यसभा चुनाव के लिए पंजाबी समुदाय से आने वाले वरिष्ठ नेता संजय भाटिया को उम्मीदवार बनाकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है. पार्टी का यह कदम न सिर्फ हरियाणा की सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश माना जा रहा है, बल्कि आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों को देखते हुए पंजाबी मतदाताओं तक मजबूत संदेश पहुंचाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है. एक पंजाबी चेहरे को राज्यसभा भेजकर भाजपा व्यापक क्षेत्रीय संतुलन और समुदाय विशेष के प्रतिनिधित्व को रेखांकित कर रही है.
पानीपत के मॉडल टाउन निवासी 57 वर्षीय संजय भाटिया, जिन्हें ‘बंटी भाई' के नाम से भी जाना जाता है, संगठनात्मक राजनीति का लंबा अनुभव रखते हैं। उनका जन्म हरियाणा के पानीपत जिले में हुआ और उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की. वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं और भाजपा में प्रदेश महामंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं.
2019 के लोकसभा चुनाव में संजय भाटिया को मिली थी बड़ी जीत
संजय भाटिया करनाल लोकसभा सीट से सांसद रह चुके हैं. भाटिया गृह मामलों की स्थायी समिति, सांसदों के वेतन एवं भत्तों संबंधी संयुक्त समिति तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति के सदस्य रहे. वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अपने पहले ही चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी. उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को 6.54 लाख मतों के अंतर से हराया और कुल 9,09,432 वोट हासिल किए, जो हरियाणा के 53 वर्षों के इतिहास में सबसे बड़ी जीतों में गिनी जाती है. संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका और नेतृत्व के प्रति प्रतिबद्धता ने उन्हें पार्टी का भरोसेमंद चेहरा बनाया है.
उन्हें हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री Manohar Lal Khattar का करीबी माना जाता है. राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा रही है कि वे पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee और वरिष्ठ भाजपा नेता Lal Krishna Advani के निकट रहे हैं. वर्ष 2000 में वे पानीपत नगर परिषद के चेयरमैन भी बने थे. संघ और संगठन से लंबे समय तक जुड़े रहने और नेतृत्व के विश्वास ने उन्हें राज्यसभा तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है.
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