- उज्जैन के तराना में VHP के नेता सोहल ठाकुर पर हमले से सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी और तोड़फोड़ हुई
- हिंसा में कम से कम तेरह बसें और कई कारें क्षतिग्रस्त हुईं तथा कई घरों और दुकानों को भी नुकसान पहुंचा
- पुलिस ने मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया और बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लगा दी गई
पश्चिमी मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के तराना कस्बे में गुरुवार शाम एक युवा विश्व हिंदू परिषद (VHP) नेता पर हुए हमले ने देखते-ही-देखते उग्र सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले लिया. छोटे से इस कस्बे में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़, आगजनी और सख़्त पुलिस कार्रवाई देखने को मिली. यह घटना इसलिए भी बेहद संवेदनशील मानी जा रही है, क्योंकि उज्जैन, प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री डॉ. मोहन यादव का गृह जिला है. आखिर, ये हिंसा क्यों भड़की, पुलिस ने अब तक क्या एक्शन लिया... घटना की इनसाइड स्टोरी.
क्यों भड़की हिंसा?
उज्जैन हिंसा की शुरुआत गुरुवार रात हुई, जब स्थानीय विश्व हिंदू परिषद की गौ सेवा प्रकोष्ठ के प्रमुख सोहल ठाकुर बुंदेला पर कथित रूप से अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ युवकों ने हमला कर दिया. बताया गया कि सुखला गली इलाके में घूरने और एक ही स्थान पर खड़े होने को लेकर पहले कहासुनी हुई, जो जल्द ही हिंसक झड़प में बदल गई. इस हमले में सोहल ठाकुर को चोट आईं, जो फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं.
13 बसें और कई कारों में तोड़फोड़!
हमले के बाद दोनों समुदायों के लोग सड़कों पर उतर आए. पत्थरबाज़ी शुरू हुई और वाहनों व संपत्तियों को निशाना बनाया गया. बस स्टैंड के पास खड़ी कम से कम 11 बसें क्षतिग्रस्त हुईं, जबकि कई कारें और मोटरसाइकिलें भी तोड़ी गईं. मौके पर पहुंची पुलिस ने देर रात हालात पर काबू पाया. हमलावरों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और तराना में बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी गई.
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जुमे की नमाज के बाद फिर आमने-सामने आए लोग
हालांकि, शुक्रवार दोपहर खासकर जुमे की नमाज़ के बाद हालात फिर बिगड़ गए. दोनों पक्षों के हथियारबंद युवकों के आमने-सामने आने से स्थानीय पुलिस दबाव में आ गई. स्थिति संभालने के लिए ज़िले के पांच से दस थानों से अतिरिक्त बल बुलाया गया. ताज़ा झड़पों में फिर से वाहनों, घरों और दुकानों को निशाना बनाया गया. एक समुदाय की महिलाओं ने आरोप लगाया कि तलवार, रॉड और लाठियों से लैस लोग उनके मोहल्लों में घुसे, घरों पर पथराव किया और एक पूजा स्थल को भी निशाना बनाने की कोशिश की.
भीड़ के सामने बेबस दिखी पुलिस
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पुलिस की मौजूदगी के बावजूद कुछ लोग बंद घरों के ताले तोड़ने की कोशिश करते दिखे, जिससे हिंसा की गंभीरता साफ झलकती है. अन्य क्लिप्स में दोनों पक्षों के लोग खुलेआम हथियार लहराते और एक-दूसरे को ललकारते नजर आए, जबकि पुलिस भीड़ को तितर-बितर करने में जूझती दिखी. शुक्रवार को पुलिस ने हमले के मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया. इसके बाद घायल वीएचपी नेता के समर्थकों ने तराना थाने के बाहर प्रदर्शन किया और गिरफ्तार आरोपियों को सार्वजनिक रूप से घुमाने तथा उनके मकान गिराने की मांग की.
20 लोग हिरासत में, CM ने दी चेतावनी
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, हिंसा में कम से कम 13 बसें और 10 कारें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुईं, एक बस को आग के हवाले कर दिया गया और 4 से 6 घरों को नुकसान पहुंचा. उज्जैन के पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया, 'अब तक 15 से 20 लोगों को हिरासत में लिया गया है. सीसीटीवी फुटेज और वीडियो खंगाले जा रहे हैं। दंगे में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा.' वहीं, दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 से लौटने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख़्त चेतावनी दी. उन्होंने कहा, 'हिंसा में शामिल किसी भी व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाएगा, और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया.'
इस बीच, तराना के शहर काजी सफीउल्लाह और स्थानीय कांग्रेस विधायक महेश परमार ने शांति की अपील की. उनका कहना था कि तराना का कोई बड़ा सांप्रदायिक हिंसा का इतिहास नहीं रहा है. उन्होंने कहा, 'गुरुवार की आपराधिक घटना के दोषियों को कानून के तहत सख़्त सज़ा मिलनी चाहिए, लेकिन उसके नाम पर निर्दोष नागरिकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए.'
डीआईजी नवनीत भसीन, कलेक्टर रोशन सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा ने पुलिस बल के साथ तराना क्षेत्र में फ्लैग मार्च किया. अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों का भ्रमण कर हालात का जायजा लिया और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की. तराना की सड़कों पर देर रात तक सारे अधिकारी डटे रहे.













