इथेनॉल वाले पेट्रोल को लेकर हंगामा मचा हुआ है. सोशल मीडिया पर कई लोग दावा कर रहे हैं कि E20 वाले पेट्रोल से उनकी लाखों की गाड़ियां खराब हो रही हैं. हालांकि, ऑटो एक्सपर्ट्स का दावा है कि इससे कुछ नहीं होता. इसी बीच केंद्रीय सड़क और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि डीजल में सीधे इथेनॉल नहीं मिला सकते, इसलिए आइसोब्यूटेनॉल बनाया जा रहा है जो डीजल में मिलाया जाएगा.
गडकरी ने कहा, 'हम डीजल में इथेनॉल नहीं डाल सकते. इसलिए इथेनॉल से आइसोब्यूटेनॉल भी बन रहा है. आइसोब्यूटेनॉल डीजल का विकल्प बन सकता है. डीजल में भी 15% आइसोब्यूटेनॉल मिलाने का काम चल रहा है.'
ये पहली बार नहीं है, जब गडकरी ने डीजल में 15% आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की बात कही है. पिछले महीने भी गडकरी ने एक कार्यक्रम में कहा था कि सरकार डीजल में 15% आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की संभावना पर विचार कर रही है.
कब तक आएगा ऐसा वाला डीजल?
सरकार ने 2023 से इथेनॉल वाला पेट्रोल शुरू कर दिया है. अभी देश में E20 पेट्रोल बिक रहा है. इसमें 20% इथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है.
लेकिन अब सरकार डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिलाने पर काम कर रही है. इस पर लंबे समय से काम चल रहा है. माना जा रहा है कि इसी साल के आखिर तक आइसोब्यूटेनॉल वाला डीजल आ सकता है.
पिछले महीने कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के एक कार्यक्रम में सड़क-परिवहन मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने कहा था कि सरकार इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रही है और 2026 के आखिर तक इसे मिलाने का आदेश आ सकता है.
डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिलाने पर क्या असर होगा, इसके लिए भारत पेट्रोलियम (BPCL) पहले से ही रिसर्च कर रही है. उमाशंकर का कहना था कि इसके नतीजे 'उत्साहजनक' रहे हैं.
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क्या होता है ये आइसोब्यूटेनॉल?
आइसोब्यूटेनॉल भी एक अल्कोहल होता है, जो बायोफ्यूल कैटेगरी में आता है. इसे इथेनॉल से ही बनाया जाता है. इथेनॉल को डायरेक्ट डीजल में नहीं मिलाया जा सकता, इसलिए इससे आइसोब्यूटेनॉल बनाया जाएगा और फिर डीजल में मिलाया जाएगा. आइसोब्यूटेनॉल को भी गन्ने, अनाज या खेती से मिलने वाले बायोमास के फर्मेंटेशन से बनाया जाता है.
ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के मुताबिक, इथेनॉल के उलट आइसोब्यूटेनॉल डीजल के साथ ज्यादा आसानी से मिल जाता है.
आइसोब्यूटेनॉल का फ्लैश पॉइंट ज्यादा होता है, यानी इसमें आग लगने की संभावना कम होती है. इसके अलावा इसेक वोलेटिलिटी यानी उड़ने की क्षमता भी कम होती है.
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डीजल में भी इथेनॉल क्यों नहीं?
पेट्रोल और डीजल इंजन अलग-अलग तरीके से चलते हैं. डीजल की तुलना में पेट्रोल इंजन में बदलाव करना थोड़ा ज्यादा आसान होता है. डीजल, पेट्रोल से अलग तक का फ्यूल है, इसलिए इसमें किसी भी चीज को मिलाने के लिए इंजन की क्षमता और कम्पैटिबिलिटी का अलग स्तर जरूरी होता है.
पेट्रोल इंजन में फ्यूल स्पार्क प्लग की चिंगारी से चालू होता है, जबकि डीजल इंजन में फ्यूल बहुत ज्यादा कंप्रेशन यानी दबाव के कारण खुद ही चालू हो जाता है.
इसलिए डीजल के साथ थोड़ी सी भी छेड़छाड़ रिस्की होती है. डीजल में बदलाव करने से कंबशन टाइमिग बिगड़ सकती है और इंजन खट-खट की आवाज कर सकता है. इसके अलावा, पुरानी गाड़ियों का इंजन खराब भी हो सकता है.
डीजल में इथेनॉल नहीं मिलाया जा सकता, क्योंकि इससे इंजन पर बुरा असर पड़ सकता है. इसलिए आइसोब्यूटेनॉल बनाया जा रहा है, जिसे डीजल में मिलाया जाएगा.
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गाड़ियों पर असर पड़ेगा?
जिस तरह से दावा किया जा रहा है कि E20 पेट्रोल से गाड़ियों का माइलेज और परफॉर्मेंस कम हो रही है. उसी तरह से डीजल में आइसोब्यूटेनॉल मिलाने की बात सामने आने के बाद सबसे बड़ी चिंता गाड़ियों का माइलेज और परफॉर्मेंस ही है.
डीजल की तुलना में आइसोब्यूटेनॉल मिला डीजल माइलेज पर असर डाल सकता है. हालांकि, डीजल में 15% आइसोब्यूटेनॉल मिलाने से असर बहुत कम पड़ने की उम्मीद है. क्योंकि इथेनॉल की तुलना में आइसोब्यूटेनॉल में एनर्जी ज्यादा होती है, इसलिए माइलेज में कमी आती भी है, तो वह मामूली होगी.
आइसोब्यूटेनॉल वाला डीजल गाड़ियों पर किस तरह से असर डाल सकता है? इसे लेकर अभी रिसर्च हो रही है. जून में वी. उमाशंकर ने बताया था कि भारत पेट्रोलियम इसे लेकर रिसर्च कर रही है और इसके नतीजे बहुत उत्साहजनक हैं.
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