West Bengal Election: शुभेंदु अधिकारी, अधीर रंजन चौधरी, दिलीप घोष समेत कई दिग्गजों की साख दांव पर, पहले चरण में 152 सीटों पर तय होगा सियासी रुख

23 अप्रैल को बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान हो रहा है. टीएमसी‑भाजपा में सीधी टक्कर है. नंदीग्राम, खड़गपुर सहित कई सीटों पर शुभेंदु, अधीर जैसे दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है.

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कोलकाता:

पश्चिम बंगाल में आज विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान हो रहा है. इस चरण में राज्य की कुल 294 विधानसभा सीटों में से 152 सीटों पर मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं. पिछली बार की तरह इस बार भी सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सीधा और तीखा मुकाबला माना जा रहा है. हालांकि, कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) भी अलग-अलग लड़ते हुए कई सीटों पर मुकाबले को दिलचस्प बना रही हैं.

पहले चरण की सीटों का पूरा गुणा-गणित 

पश्चिम बंगाल के पहले चरण में राज्य के 16 जिलों की 152 सीटों पर वोटिंग है, जिसमें उत्तर बंगाल की कूचबिहार, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर और मालदा इलाके की सीटें है. इसी तरह जंगलमहल और दक्षिण बंगाल की पुरुलिया, बांकुरा, झाड़ग्राम, पश्चिम मेदिनीपुर, पूर्व मेदिनीपुर का हिस्सा (नंदीग्राम समेत), बीरभूम और मुर्शिदाबाद सीटों पर वोटिंग है.

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पहले चरण को बेहद अहम इसलिए माना जा रहा है क्योंकि कई हाई-प्रोफाइल सीटों पर दिग्गज नेताओं की राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. यही चरण यह संकेत भी देगा कि जनता का रुझान इस बार किस दिशा में जा रहा है.

पहले चरण में कौन-कौन से बड़े चेहरे मैदान में?

इस चुनाव में कई अनुभवी और चर्चित नेता अपनी चुनावी किस्मत आजमा रहे हैं- 

शुभेंदु अधिकारी

भाजपा के सबसे बड़े चेहरों में शुमार शुभेंदु अधिकारी 2021 में नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराकर सुर्खियों में आए थे. इस बार वह नंदीग्राम के साथ-साथ भवानीपुर सीट से भी चुनाव लड़ रहे हैं. पहले चरण में नंदीग्राम में मतदान है, जहां उनका मुकाबला तृणमूल उम्मीदवार पबित्रा कर से है. यह सीट एक बार फिर सबकी नजरों में होगी.

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अधीर रंजन चौधरी

कांग्रेस के दिग्गज नेता और पांच बार के सांसद रहे अधीर रंजन चौधरी लोकसभा चुनाव में हार के बाद पहली बार विधानसभा चुनावी मैदान में उतरे हैं. वह बहरामपुर सीट से भाजपा विधायक सुब्रत मैत्रा को चुनौती दे रहे हैं.

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दिलीप घोष

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष खड़गपुर सदर सीट से वापसी की कोशिश कर रहे हैं. यहां उनका मुकाबला तृणमूल के प्रदीप सरकार से है, जिन्होंने 2019 के उपचुनाव में यह सीट जीती थी.

अग्निमित्रा पॉल

आसनसोल दक्षिण से भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल अपनी सीट बचाने की जंग लड़ रही हैं. तृणमूल ने उनके सामने वरिष्ठ नेता तापस बनर्जी को उतारकर मुकाबला कड़ा कर दिया है.

निसिथ प्रामाणिक और उदयन गुहा

पूर्व केंद्रीय मंत्री निसिथ प्रामाणिक ने इस बार दिनहाटा छोड़कर माथाभांगा सीट को चुना है, जहां उनका मुकाबला तृणमूल के सब्लू बर्मन से है. वहीं दिनहाटा सीट पर तृणमूल के राज्य मंत्री उदयन गुहा पार्टी की पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं.

हुमायूं कबीर

तृणमूल से निष्कासित पूर्व मंत्री हुमायूं कबीर अब अपनी नई पार्टी ‘आम जनता उन्नयन पार्टी' के टिकट पर डोमकल सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे यहां का मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है.

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जाकिर हुसैन

‘बीड़ी किंग' के नाम से मशहूर तृणमूल उम्मीदवार जाकिर हुसैन जंगीपुर से मैदान में हैं. 133 करोड़ रुपये से अधिक की घोषित संपत्ति के साथ वह इस चुनाव के सबसे अमीर उम्मीदवारों में शामिल हैं.

कृष्णा कल्याणी

रायगंज सीट से तृणमूल की उम्मीदवार कृष्णा कल्याणी पहले भाजपा से जीत दर्ज कर चुकी हैं, लेकिन बाद में पार्टी बदल ली. अब उनका सीधा मुकाबला भाजपा के कौशिक चौधरी से है.

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सुब्रत दत्ता

ओन्दा सीट से तृणमूल उम्मीदवार सुब्रत दत्ता भी चर्चा में हैं. एडीआर रिपोर्ट के मुताबिक, उनके खिलाफ आपराधिक मामलों की संख्या सबसे ज्यादा है.

इसके अलावा बालुरघाट, ओन्दा, दार्जिलिंग और जंगीपुर जैसी सीटों पर सीमा विवाद, गोरखालैंड की मांग, धनबल और अपराध के मुद्दों के चलते मुकाबला बेहद रोचक होने की उम्मीद है.

दिलचस्प है यह चुनाव

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मतदाताओं और मतदान केंद्रों की संख्या में पिछली तुलना में बदलाव किया गया है. आयोग ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा और अधिक मतदान केंद्र बनाए हैं, ताकि शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित किया जा सके.

2021 के चुनाव में क्या रहा था हाल

पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने प्रचंड बहुमत के साथ लगातार तीसरी बार सरकार बनाई थी. भाजपा मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी थी. वहीं कांग्रेस, माकपा और आईएसएफ का गठबंधन बुरी तरह विफल रहा था. राज्य के इतिहास में पहली बार कांग्रेस और माकपा का खाता तक नहीं खुल पाया था, जबकि आईएसएफ को सिर्फ एक सीट मिली थी.

सबसे चर्चित मुकाबला नंदीग्राम में हुआ था, जहां शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को करीबी अंतर से हराया था. हालांकि बाद में ममता ने भवानीपुर सीट से जीत दर्ज कर मुख्यमंत्री पद बरकरार रखा. पहले चरण की वोटिंग अब यह तय करेगी कि क्या तृणमूल अपनी मजबूत पकड़ बनाए रख पाएगी या भाजपा एक बार फिर बड़ा सियासी झटका देने की स्थिति में है.

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