- पश्चिम बंगाल के सभी काउंटिंग सेंटरों में थ्री-टियर सुरक्षा कवच और सख्त प्रवेश नियम लागू किए गए हैं
- काउंटिंग प्रक्रिया में QR कोड आधारित फोटो आईडी कार्ड अनिवार्य किए गए हैं, जो फर्जी प्रवेश को रोकने में मददगार
- काउंटिंग सेंटर में CCTV कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी लाइव फीड जिला अधिकारियों और चुनाव आयोग तक भेजी जा रही है
Bengal Counting centres Security: पश्चिम बंगाल चुनाव हो चुके हैं और उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद है. अब बस कुछ घंटों का इंतजार है और सामने आ जाएगा कि बंगाल की जनता ने इस बार किसे सत्ता सौंपी है. कल यानि 4 मई को वोटों की गिनती होनी है. ऐसे में काउंटिंग सेंटरों को किसी अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है. सुरक्षा ऐसी है कि कोई परिंदा भी पर नहीं मार पाए. चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के सभी काउंटिंग सेंटरों को हाई-सिक्योरिटी जोन में बदल दिया है, जहां थ्री-टियर सुरक्षा कवच, डिजिटल मॉनिटरिंग, सख्त प्रवेश नियम और बड़े पैमाने पर केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है. मकसद साफ है- काउंटिंग प्रोसेस को को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण बनाना.
थ्री-टियर सुरक्षा कवच
पश्चिम बंगाल के हर कांउटिंग सेंटर को थ्री-टियर सुरक्षा कवच से बांटा गया है. हर स्तर पर सख्त निगरानी है.
पहला घेरा: सबसे बाहरी स्तर पर राज्य पुलिस तैनात है. यह घेरा काउंटिंग सेंटर से लगभग 100 मीटर की दूरी तक फैला हुआ है. यहां किसी भी अनधिकृत वाहन, भीड़ या संदिग्ध गतिविधि को तुरंत रोका जा रहा है. पुलिस की जिम्मेदारी है कि केवल अधिकृत व्यक्तियों और वाहनों को ही आगे बढ़ने दिया जाए.
दूसरा घेरा: इस स्तर पर केंद्रीय अर्धसैनिक बल (CAPF) तैनात हैं. यहां प्रवेश के लिए पहचान पत्रों की कड़ी जांच की जा रही है. हर व्यक्ति की एंट्री से पहले उसके दस्तावेजों का सत्यापन अनिवार्य है.
तीसरा घेरा: यह सबसे संवेदनशील और सुरक्षित क्षेत्र है, जो काउंटिंग हॉल के ठीक बाहर स्थित है. यहां केंद्रीय सुरक्षा बलों का सख्त पहरा है. केवल उन्हीं अधिकारियों, कर्मचारियों और एजेंट्स को प्रवेश मिल रहा है, जिनके पास QR कोड आधारित फोटो आईडी कार्ड है. बिना स्कैनिंग के किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं है.
डिजिटल निगरानी: टेक्नोलॉजी के जरिए पारदर्शिता
टेक्नोलॉजी के जरिए पारदर्शिता: इस बार सुरक्षा व्यवस्था में डिजिटल टेक्नोलॉजी का बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया है, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो. पहली बार रिटर्निंग ऑफिसर्स और काउंटिंग एजेंट्स के लिए QR कोड सक्षम आई-कार्ड अनिवार्य किए गए हैं. प्रवेश से पहले इन कार्ड्स को स्कैन किया जाता है, जिससे फर्जी एंट्री की संभावना खत्म हो जाती है.
CCTV और वेबकास्टिंग: स्ट्रांग रूम से लेकर काउंटिंग टेबल तक हर जगह CCTV कैमरे लगाए गए हैं. इन कैमरों की लाइव फीड जिला चुनाव अधिकारियों के साथ-साथ दिल्ली स्थित चुनाव आयोग मुख्यालय तक भेजी जा रही है. इससे पूरी प्रक्रिया पर रियल-टाइम निगरानी संभव हो रही है. विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की डिजिटल मॉनिटरिंग न केवल पारदर्शिता बढ़ाती है, बल्कि विवाद की स्थिति में प्रमाण के तौर पर भी काम करती है.
मोबाइल फोन पर बैन: मतगणना हॉल के अंदर मोबाइल फोन ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है. केवल ऑब्जर्वर और रिटर्निंग ऑफिसर को ही मोबाइल रखने की अनुमति है. यह कदम किसी भी तरह की सूचना लीक, अफवाह या अनुचित प्रभाव को रोकने के लिए उठाया गया है.
ग्राउंड जीरो पर भारी सुरक्षा बलों की तैनाती
पूरे राज्य में 780 से अधिक कंपनियों के केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है. कोलकाता में अकेले लगभग 60 कंपनियां तैनात हैं. संवेदनशील जिलों जैसे दक्षिण 24 परगना और बीरभूम में अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है. 77 विशेष पुलिस ऑब्जर्वर्स को केवल सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए नियुक्त किया गया है. ये ऑब्जर्वर्स सीधे चुनाव आयोग को रिपोर्ट कर रहे हैं, जिससे किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में तुरंत कार्रवाई संभव हो सके.
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धारा 144 और चेकप्वाइंट
काउंटिंग सेंटरों के आसपास धारा 144 लागू कर दी गई है, जिससे चार या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक है. अंतरराज्यीय सीमाओं और जिला बॉर्डर्स पर चेकप्वाइंट बनाए गए हैं. हर आने-जाने वाले वाहन की जांच की जा रही है. इससे बाहरी तत्वों के प्रवेश को रोकने के लिए सख्त निगरानी रखी जा रही है. फाल्टा और कुछ अन्य इलाकों में तनाव की खबरों के बाद वहां अतिरिक्त क्विक रिस्पांस टीमें (QRT) तैनात की गई हैं, जो किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं.
स्ट्रांग रूम की सुरक्षा भी अभेद्य
मतदान के बाद EVM और VVPAT मशीनों को जिन स्ट्रांग रूम में रखा गया है, वहां भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. इसकी 24 घंटे निगरानी हो रही है. CAPF की लगातार तैनाती के बीच यहां राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की भी मौजूदगी है. दरअसल, इन उपायों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतगणना से पहले किसी भी तरह की छेड़छाड़ की संभावना न रहे. चुनाव आयोग ने इस बार सुरक्षा को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है. आयोग के अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की लापरवाही या गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. विशेष रूप से उन इलाकों पर ज्यादा ध्यान दिया गया है, जहां पहले चुनाव के दौरान हिंसा या तनाव की घटनाएं सामने आई थीं.
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