वक्फ बिल पर संसद में बहस के दौरान विपक्षी सांसदों द्वारा संशोधनों पर सवाल उठाए जाने पर जवाब देते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि बिल संयुक्त संसदीय समिति को गया था. विपक्ष की भी यही मांग थी. कमिटी के सुझाव कैबिनेट के पास गए. भारत सरकार ने इसे स्वीकार किया. संशोधन के रूप में किरेन रिजिजू लेकर आए हैं. कैबिनेट के अनुमोदन के बिना कोई भी संसोधन बिल में शामिल नहीं किए गए हैं. कमिटी ने कोई बदलाव ही नहीं करने थे, तो यह कांग्रेस के जमाने की कमिटी नहीं है. अगर कमिटी ने कोई विचार ही नहीं करने हैं, तो फिर कमिटी किस बात की है.
बताते चलें कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में वक्फ संसोधन विधेयक पेश करते हुए कहा कि उन्हें आशा है कि बिल पर विरोध करने वालों के दिल भी बदलेंगे. उन्होंने शायर इमाम आजम की शायरी सुनाते हुए कहा...
किसी की बात कोई बद-गुमाँ न समझेगा
ज़मीं का दर्द कभी आसमाँ न समझेगा
गौरतलब है कि वक्फ (संशोधन) विधेयक पर लोकसभा में बहस की शुरुआत हो गई है. विधेयक पर बहस के लिए स्पीकर ओम बिरला ने 8 घंटे का समय निर्धारित किया है. जहां सत्ता पक्ष के सांसद बिल का समर्थन कर रहे हैं, वहीं विपक्ष इसका कड़ा विरोध कर रहा है. कांग्रेस ने इस विधेयक का कड़ा विरोध करने का ऐलान किया है.
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